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Kathua News: सिर्फ आधे घंटे की दूरी पर थी मौत, शुक्र है हम बच गए
Sun, 17 Aug 2025 02:08 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sun, 17 Aug 2025 02:08 AM IST
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कठुआ। मचैल में चंडी माता के दरबार से घर को लौट रहे निकले श्रद्धालुओं की आंखों में आस्था थी, लेकिन मौसम ने जैसे चेतावनी दी हो। जब तक बादल नहीं फटा सब कुछ सामान्य लग रहा था। अचानक अफरा-तफरी में सुरक्षाबलों ने भवन से लौट रहे भक्तों को चिशोती से पहले ही लौटा दिया।
कठुआ से दर्शन करने गए भक्तों बताया कि सिर्फ आधे घंटे की दूरी मौत थी, शुक्र है कि हम बच गए। वापसी का मंजर किसी दुःस्वप्न से कम नहीं था। यह बातें कठुआ से मचैल गए भक्तों के जत्थे में शामिल डॉ संजीव कुमार ने बताईं।
उनके साथ 12 और कठुआ निवासी थे जो दर्शन को गए थे। फिलहाल वे गुलाबगढ़ से तत्तापानी पहुंचे और वहां से कठुआ को लौट रहे थे। हर किसी की आंखों में डर और राहत दोनों था।
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डॉ वंदना मेहता, वंश मेहरा, रमेश कुमार बताया कि स्थानीय लोग भी इस आपदा से अछूते नहीं रहे। भवन पर यात्रा को रोके जाने के साथ ही छह लंगरों ने भोजन की व्यवस्था की और कई घरों ने अपने कमरे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए। यह मानवता की मिसाल थी।
यह राहत की एक किरण थी। प्रशासन और स्थानीय लोगों ने मिलकर रास्ता बनाया और मदद पहुंचाई। लेकिन जो दृश्य पीछे छूट गया, वह दिल को चीरने वाला था। लोगों के घर उजड़े हुए थे।
अब धीरे-धीरे यात्रा विरान होने लगी थी। लगातार घर से फोन और अपने का कुशलक्षेम जानने वालों की बेचैनी के बीच हालात पर नजर बनाए रखना भी जरूरी था। यह सिर्फ एक यात्रा नहीं थी।
यह आस्था, आपदा और इंसानियत की कहानी थी। एक ऐसा अनुभव, जो कठुआ के इन 12 लोगों की जिंदगी में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। भक्तों ने बताया कि कठुआ से 100 से अधिक लोगों का एक और जत्था दर्शन को गया था वो लोग भी सभी सुरक्षित हैं और घर को लौट रहे हैं। प्रशासन ने फिलहाल लौटने वाले भक्तों के लिए चिशोती से जम्मू तक मुफ्त बस सेवा भी शुरू कर दी है।
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कठुआ से दर्शन करने गए भक्तों बताया कि सिर्फ आधे घंटे की दूरी मौत थी, शुक्र है कि हम बच गए। वापसी का मंजर किसी दुःस्वप्न से कम नहीं था। यह बातें कठुआ से मचैल गए भक्तों के जत्थे में शामिल डॉ संजीव कुमार ने बताईं।
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उनके साथ 12 और कठुआ निवासी थे जो दर्शन को गए थे। फिलहाल वे गुलाबगढ़ से तत्तापानी पहुंचे और वहां से कठुआ को लौट रहे थे। हर किसी की आंखों में डर और राहत दोनों था।
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डॉ वंदना मेहता, वंश मेहरा, रमेश कुमार बताया कि स्थानीय लोग भी इस आपदा से अछूते नहीं रहे। भवन पर यात्रा को रोके जाने के साथ ही छह लंगरों ने भोजन की व्यवस्था की और कई घरों ने अपने कमरे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए। यह मानवता की मिसाल थी।
यह राहत की एक किरण थी। प्रशासन और स्थानीय लोगों ने मिलकर रास्ता बनाया और मदद पहुंचाई। लेकिन जो दृश्य पीछे छूट गया, वह दिल को चीरने वाला था। लोगों के घर उजड़े हुए थे।
अब धीरे-धीरे यात्रा विरान होने लगी थी। लगातार घर से फोन और अपने का कुशलक्षेम जानने वालों की बेचैनी के बीच हालात पर नजर बनाए रखना भी जरूरी था। यह सिर्फ एक यात्रा नहीं थी।
यह आस्था, आपदा और इंसानियत की कहानी थी। एक ऐसा अनुभव, जो कठुआ के इन 12 लोगों की जिंदगी में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। भक्तों ने बताया कि कठुआ से 100 से अधिक लोगों का एक और जत्था दर्शन को गया था वो लोग भी सभी सुरक्षित हैं और घर को लौट रहे हैं। प्रशासन ने फिलहाल लौटने वाले भक्तों के लिए चिशोती से जम्मू तक मुफ्त बस सेवा भी शुरू कर दी है।