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सुनने के साथ-साथ मनन करना भी है आवश्यक
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कठुआ। जखबड़ गांव में श्रीराम कथा के दौरान संगत प्रवचनों से सराबोर हुई। संत कुलदीप शास्त्री महाराज ने संगत को प्रभु राम के जीवन से अवगत करवाया। मर्यादा पुरूषोत्तम के जीवन को अनुसरण करने का प्रयास करने के साथ ही माता-पिता की आज्ञा का पालन करने का आह्वान किया। धार्मिक सप्ताह के पांचवें दिन श्री कृष्ण जन्म की झांकी भी प्रस्तुत की गई।
संत कुलदीप शास्त्री ने कहा कि आज अनेकों स्थानों पर नित्यप्रति सत्संग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भारी संख्या में श्रोतागण वहां पहुंचकर इन विचारों को सुनते भी है। परंतु कोई परिवर्तन दिखाई नहीं देता। कारण क्या है, कारण यही है कि आज मनुष्य केवल इन विचारों को सुनने तक ही सीमित है। मात्र सुनना ही पर्याप्त नहीं है।
इतिहास साक्षी है कि जब-जब मनुष्य केवल सुनने तक ही रहा, तो उसके जीवन में अनेकों दुर्घटनाएं घटीं एवं वह अपने जीवन-लक्ष्य को पूर्ण नहीं कर पाया, जिस प्रकार नींव की पहली ईंट यदि गलत स्थान पर रख दी जाए, तो नींव ही नहीं वरन पूरी इमारत ही गिर जाएगी।
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उन्होंने कहा कि यदि हम प्रभु सिमरन में अपना जीवन लगाएं, तो ही जीवन के आवागमन के चक्र से मुक्त हो सकेंगे और मोक्ष हासिल करेंगे। यदि आरंभ में ही गलती की, तो आगे चलकर भी गलतियां ही होंगी। इसलिए संतों ने कहा है कि केवल सुनकर आचरण करना घातक सिद्ध हो सकता है। सुनने के साथ-साथ मनन करना भी आवश्यक है।
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संत कुलदीप शास्त्री ने कहा कि आज अनेकों स्थानों पर नित्यप्रति सत्संग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भारी संख्या में श्रोतागण वहां पहुंचकर इन विचारों को सुनते भी है। परंतु कोई परिवर्तन दिखाई नहीं देता। कारण क्या है, कारण यही है कि आज मनुष्य केवल इन विचारों को सुनने तक ही सीमित है। मात्र सुनना ही पर्याप्त नहीं है।
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इतिहास साक्षी है कि जब-जब मनुष्य केवल सुनने तक ही रहा, तो उसके जीवन में अनेकों दुर्घटनाएं घटीं एवं वह अपने जीवन-लक्ष्य को पूर्ण नहीं कर पाया, जिस प्रकार नींव की पहली ईंट यदि गलत स्थान पर रख दी जाए, तो नींव ही नहीं वरन पूरी इमारत ही गिर जाएगी।
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उन्होंने कहा कि यदि हम प्रभु सिमरन में अपना जीवन लगाएं, तो ही जीवन के आवागमन के चक्र से मुक्त हो सकेंगे और मोक्ष हासिल करेंगे। यदि आरंभ में ही गलती की, तो आगे चलकर भी गलतियां ही होंगी। इसलिए संतों ने कहा है कि केवल सुनकर आचरण करना घातक सिद्ध हो सकता है। सुनने के साथ-साथ मनन करना भी आवश्यक है।