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अवैध खनन नहीं रोकने पर आंदोलन की चेतावनी
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बसोहली। जिला प्रशासन भले ही अवैैैैध खनन पर रोक के दावे कर रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि खनन माफिया बिना किसी डर के राज्य की खनन संपदा को हड़पने में लगे हुए हैं। इससे रियासत की सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है। इससे नाराज लोगों ने जल्द खनन माफिया पर कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
बसोहली तहसील के हट्ट माश्का इलाके में स्टोन क्रशर धड़ल्ले से चल रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक खनन से जुड़े लोगों को राजनीतिक संरक्षण होने से प्रशासन उन पर हाथ नहीं डाल रहा है। जब लोग इसकी शिकायत करते हैं तो ऐसा कह दिया जाता है कि स्टोन क्रशर हिमाचल की सीमा में है। इससे स्थानीय लोगों में खनन विभाग और प्रशासन के प्रति भारी रोष है।
पंचायत हट्ट माश्का के सरपंच शंकर सिंह ने बताया कि जिस स्थान पर स्टोन क्रशर लगा है, वह जगह जम्मू-कश्मीर की है या हिमाचल की, इसे लेकर जानबूझकर गफलत पैदा की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस जगह हिमाचल का क्रशर लगा हुआ है, वह जम्मू-कश्मीर के हिस्से में आती है, लेकिन जब भी कार्रवाई की मांग की जाती है तो लोगों को गुमराह करते हुए उसे हिमाचल की सीमा में बता दिया जाता है। शंकर सिंह ने बताया कि जब उन्होंने इस मामले को उठाया तो उनको क्रशर मालिकों की ओर से धमकियां भी मिलीं। इस संबंध में द्रमण पंचायत के सरपंच ने कहा कि हिमाचल के जिन लोगों ने जम्मू-कश्मीर के हट्ट माश्का में क्रशर लगाया है, वह बिना परमिशन के लगाया गया है। इसलिए प्रशासन को उस पर कार्रवाई करनी चाहिए।
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यह हो रहा नुकसान
हट्ट माश्का में 2011 में क्रशर लगाया गया था। इस बारे में डीसी कठुआ समेत प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार अवगत करवाया गया। गांव के लोगों ने बताया कि जम्मू कश्मीर के इस हिस्से की 300 कनाल भूमि को आज तक विभाग के अधिकारियों द्वारा नहीं नापा गया है। अवैध रूप से जम्मू कश्मीर के हिस्से का पत्थर उठाया जा रहा है, जिससे दरिया का पानी नहर के साथ टकराता है। इससे नहर की दीवारें क्षतिग्रस्त हो रही हैं। इतना ही नहीं नहर का 100 मीटर तक के रास्ते का एक हिस्सा भी टूट चुका है। अधिकारियों की मिलीभगत के चलते इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। हट्ट गांव के राजकुमार ने कहा कि जिस जमीन पर आज हिमाचल का क्रशर लगा है, 10 वर्ष पूर्व वहां करीब 1000 क्लोजर लगाए गए थे, जिनका आज नामोनिशान तक नहीं बचा है। लोगों ने इस जगह की हदबंदी करवाते हुए क्रशर को बंद करने की मांग राज्यपाल से की है।
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बसोहली तहसील के हट्ट माश्का इलाके में स्टोन क्रशर धड़ल्ले से चल रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक खनन से जुड़े लोगों को राजनीतिक संरक्षण होने से प्रशासन उन पर हाथ नहीं डाल रहा है। जब लोग इसकी शिकायत करते हैं तो ऐसा कह दिया जाता है कि स्टोन क्रशर हिमाचल की सीमा में है। इससे स्थानीय लोगों में खनन विभाग और प्रशासन के प्रति भारी रोष है।
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पंचायत हट्ट माश्का के सरपंच शंकर सिंह ने बताया कि जिस स्थान पर स्टोन क्रशर लगा है, वह जगह जम्मू-कश्मीर की है या हिमाचल की, इसे लेकर जानबूझकर गफलत पैदा की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस जगह हिमाचल का क्रशर लगा हुआ है, वह जम्मू-कश्मीर के हिस्से में आती है, लेकिन जब भी कार्रवाई की मांग की जाती है तो लोगों को गुमराह करते हुए उसे हिमाचल की सीमा में बता दिया जाता है। शंकर सिंह ने बताया कि जब उन्होंने इस मामले को उठाया तो उनको क्रशर मालिकों की ओर से धमकियां भी मिलीं। इस संबंध में द्रमण पंचायत के सरपंच ने कहा कि हिमाचल के जिन लोगों ने जम्मू-कश्मीर के हट्ट माश्का में क्रशर लगाया है, वह बिना परमिशन के लगाया गया है। इसलिए प्रशासन को उस पर कार्रवाई करनी चाहिए।
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यह हो रहा नुकसान
हट्ट माश्का में 2011 में क्रशर लगाया गया था। इस बारे में डीसी कठुआ समेत प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार अवगत करवाया गया। गांव के लोगों ने बताया कि जम्मू कश्मीर के इस हिस्से की 300 कनाल भूमि को आज तक विभाग के अधिकारियों द्वारा नहीं नापा गया है। अवैध रूप से जम्मू कश्मीर के हिस्से का पत्थर उठाया जा रहा है, जिससे दरिया का पानी नहर के साथ टकराता है। इससे नहर की दीवारें क्षतिग्रस्त हो रही हैं। इतना ही नहीं नहर का 100 मीटर तक के रास्ते का एक हिस्सा भी टूट चुका है। अधिकारियों की मिलीभगत के चलते इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। हट्ट गांव के राजकुमार ने कहा कि जिस जमीन पर आज हिमाचल का क्रशर लगा है, 10 वर्ष पूर्व वहां करीब 1000 क्लोजर लगाए गए थे, जिनका आज नामोनिशान तक नहीं बचा है। लोगों ने इस जगह की हदबंदी करवाते हुए क्रशर को बंद करने की मांग राज्यपाल से की है।