{"_id":"60a661128ebc3eb1f33b84f0","slug":"corona-virous-kathua-news-jmu2356175129","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीएमसी में रोजाना हो रही तीन से पांच मौतें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीएमसी में रोजाना हो रही तीन से पांच मौतें
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जीएमसी कठुआ में कोरोना से मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कुछ सप्ताह से हर चौबीस घंटे में जीएमसी कठुआ में ही तीन से पांच मौतें दर्ज हो रही हैं। हालात यह हैं कि अस्पताल पहुंचने वाले लोगों में अब दहशत की स्थिति है। आईसीयू वार्ड से लेकर कोविड वार्ड में पिछले कई दिनों से सौ से अधिक मरीजों का इलाज जारी है।
दवाओं से लेकर सुविधाओं की कोई भी कमी न होने की बात प्रशासन लगातार कर रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर इन मौतों के पीछे की वजह क्या है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें, तो कोरोना संक्रमित मरीजों का देरी से अस्पताल में पहुंचना घातक साबित हो रहा है। वहीं, परिजनों का कहना है कि अस्पताल में पहुंचने के बाद भी मरीज भगवान भरोसे ही होता है।
विशेषज्ञ डॉक्टर दिन में मात्र दो बार ही राउंड पर निकलते हैं। हालांकि इस संबंध में स्वास्थ्य सचिव की ओर से बाकायदा विशेषज्ञ डॉक्टरों को वार्ड का नियमित दौरा करने और मरीजों की हालात पर नजर रखने के निर्देश दिए गए थे। उधर, तीमारदारों का आरोप है कि आईसीयू समेत कोविड वार्ड में पैरामेडिक्स के सहारे मरीज होते हैं। इसको लेकर आए दिन लोगों में गुस्सा भी देखा जा रहा है। ऐसा मामला बुधवार को भी आया, जिसमें एक मृतक के परिजनों ने जीएमसी में तोड़फोड़ भी की।
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मौत के बढ़ते आंकड़ों से लोगों में डर
जीएमसी कठुआ में लगातार हो रही मौत से लोगों में डर का माहौल है। हालात यह हैं कि लोग अब संक्रमण के बाद होम आइसोलेशन के दौरान हालात बिगड़ने पर देरी से अस्पताल में रिपोर्ट कर रहे हैं, जो जानलेवा साबित हो रहा है। लोगों का तर्क है कि उन्हें यकीन नहीं रहा है कि वे अस्पताल जाने के बाद सकुशल वापस लौट भी सकेंगे या नहीं। होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों में भी तनाव बढ़ता जा रहा है।
आईसीयू समेत कोविड वार्ड में तीमारदारों की भीड़
जीएमसी कठुआ के कोविड वार्ड से लेकर आईसीयू तक में हालात ऐसे हैं कि भर्ती मरीजों की देखरेख के लिए तीमारदारों का तांता लग रहा है। इस दौरान न तो सामाजिक दूरी का ध्यान रखा जा रहा है न ही पीपीई किट को लेकर गंभीरता बरती जा रही है। ऐसे में अन्य लोगों के संक्रमित होने का खतरा बना हुआ है। मामले में अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि समझाने पर भी लोग मान नहीं रहे हैं। वहीं तीमारदारों का कहना है कि यदि वे मरीज के पास न रूकें, तो अस्पताल में उन्हें सुविधा देने और हाथ लगाने वाला भी कोई नहीं है। उधर, कोविड अस्पताल में जाने वाले यही तीमारदार बाजारों में दुकानों पर भी बैठ रहे हैं। खरीदारी करने के अलावा समाज से एक-दूसरे से मिलजुल रहे हैं। इससे संक्रमण बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
जीएमसी कठुआ की प्रधानाचार्य डॉ. अंजलि नादिर भट्ट के अनुसार मरीजों के लिए ऑक्सीजन से लेकर दवाओं आदि की निशुल्क व्यवस्था है। कई मरीज ऐसे हैं, जो 20-25 दिन बाद भी स्वस्थ होकर लौटे हैं। जीएमसी में हुई मौत के अधिकतर मामलों में लोग देरी से अस्पताल पहुंचते हैं, जिन्हें बचाने की पूरी कोशिश की जाती है। विशेषज्ञ डॉक्टर दिन में दो से तीन बार कोविड वार्ड का राउंड भी करते हैं। तीमारदारों को भी चाहिए कि वे कोविड वार्ड में जहां तक हो सके कम आएं और एहतियात बरतें। ऐसा न किया गया, तो संक्रमण बढ़ता जाएगा।
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दवाओं से लेकर सुविधाओं की कोई भी कमी न होने की बात प्रशासन लगातार कर रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर इन मौतों के पीछे की वजह क्या है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें, तो कोरोना संक्रमित मरीजों का देरी से अस्पताल में पहुंचना घातक साबित हो रहा है। वहीं, परिजनों का कहना है कि अस्पताल में पहुंचने के बाद भी मरीज भगवान भरोसे ही होता है।
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विशेषज्ञ डॉक्टर दिन में मात्र दो बार ही राउंड पर निकलते हैं। हालांकि इस संबंध में स्वास्थ्य सचिव की ओर से बाकायदा विशेषज्ञ डॉक्टरों को वार्ड का नियमित दौरा करने और मरीजों की हालात पर नजर रखने के निर्देश दिए गए थे। उधर, तीमारदारों का आरोप है कि आईसीयू समेत कोविड वार्ड में पैरामेडिक्स के सहारे मरीज होते हैं। इसको लेकर आए दिन लोगों में गुस्सा भी देखा जा रहा है। ऐसा मामला बुधवार को भी आया, जिसमें एक मृतक के परिजनों ने जीएमसी में तोड़फोड़ भी की।
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मौत के बढ़ते आंकड़ों से लोगों में डर
जीएमसी कठुआ में लगातार हो रही मौत से लोगों में डर का माहौल है। हालात यह हैं कि लोग अब संक्रमण के बाद होम आइसोलेशन के दौरान हालात बिगड़ने पर देरी से अस्पताल में रिपोर्ट कर रहे हैं, जो जानलेवा साबित हो रहा है। लोगों का तर्क है कि उन्हें यकीन नहीं रहा है कि वे अस्पताल जाने के बाद सकुशल वापस लौट भी सकेंगे या नहीं। होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों में भी तनाव बढ़ता जा रहा है।
आईसीयू समेत कोविड वार्ड में तीमारदारों की भीड़
जीएमसी कठुआ के कोविड वार्ड से लेकर आईसीयू तक में हालात ऐसे हैं कि भर्ती मरीजों की देखरेख के लिए तीमारदारों का तांता लग रहा है। इस दौरान न तो सामाजिक दूरी का ध्यान रखा जा रहा है न ही पीपीई किट को लेकर गंभीरता बरती जा रही है। ऐसे में अन्य लोगों के संक्रमित होने का खतरा बना हुआ है। मामले में अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि समझाने पर भी लोग मान नहीं रहे हैं। वहीं तीमारदारों का कहना है कि यदि वे मरीज के पास न रूकें, तो अस्पताल में उन्हें सुविधा देने और हाथ लगाने वाला भी कोई नहीं है। उधर, कोविड अस्पताल में जाने वाले यही तीमारदार बाजारों में दुकानों पर भी बैठ रहे हैं। खरीदारी करने के अलावा समाज से एक-दूसरे से मिलजुल रहे हैं। इससे संक्रमण बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
जीएमसी कठुआ की प्रधानाचार्य डॉ. अंजलि नादिर भट्ट के अनुसार मरीजों के लिए ऑक्सीजन से लेकर दवाओं आदि की निशुल्क व्यवस्था है। कई मरीज ऐसे हैं, जो 20-25 दिन बाद भी स्वस्थ होकर लौटे हैं। जीएमसी में हुई मौत के अधिकतर मामलों में लोग देरी से अस्पताल पहुंचते हैं, जिन्हें बचाने की पूरी कोशिश की जाती है। विशेषज्ञ डॉक्टर दिन में दो से तीन बार कोविड वार्ड का राउंड भी करते हैं। तीमारदारों को भी चाहिए कि वे कोविड वार्ड में जहां तक हो सके कम आएं और एहतियात बरतें। ऐसा न किया गया, तो संक्रमण बढ़ता जाएगा।