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Kathua News: लोगों को सिखाया तनाव मुक्त रहने का हुनर
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कठुआ। लोगों को तनाव मुक्त बनाने की दिशा में काम कर रहे आध्यात्मिक गुरु मास्टर जी के विशेष सत्संग का आयोजन शहर के पटेल नगर स्थित रामलीला मैदान में किया गया। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर उनके विचारों को सुना और अपने जीवन से जुड़ी समस्याओं के प्रश्न भी उनके समक्ष रखे। उन्होंने लोगों को तनाव मुक्त रहने के गुर सिखाए।
शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में मास्टर जी ने लोगों से मिले स्नेह का आभार जताया। कार्यक्रम के दौरान गायक गुराशीष सिंह ने अपने भजनों से उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर राम नाटक सभा पटेल नगर के कलाकारों ने माता शबरी और प्रभु श्रीराम भेंट का दृश्य प्रस्तुत करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं के समक्ष श्रीराम चरित से परिचित करवाया। कार्यक्रम के दौरान मास्टर जी ने राम नाटक सभा के कलाकारों की ओर से प्रस्तुत दृश्य से प्रेरित होकर कहा कि परमात्मा के प्रति श्रद्धा माता शबरी की भांति ही होनी चाहिए, जो भगवान को आप तक आने के लिए मजबूर कर दे। उन्होंने कहा कि लंकापति रावण भी महान धर्म ज्ञाता और भक्त था। अपनी भक्ति के कारण ही उसने अजेय होने का वर प्राप्त किया, लेकिन उसने रावण को अहंकारी बनाया, जो उसके पतन का कारण बना। उन्होंने कहा कि हमारे अंदर राम भी होता है और रावण भी अंदर ही बैठा है। जरूरत इस बात की है कि हम अपने अंदर के रावण को निकालें और राम को स्थापित करें।
उन्होंने कहा कि इस धरा पर जन्म लेने वाले हर व्यक्ति को शांति और सुख की कामना होती है। मौजूदा समय में इस धरती पर रहने वाले 800 करोड़ लोगों में हर एक ही कामना यही है लेकिन मरते दम तक आदमी सुख और शांति को नहीं प्राप्त कर पाता है। एक बच्चा जब जन्म लेता है तो उसमें इच्छाएं जागृत होती हैं। इसके अलावा माता-पिता यह आकांक्षा करते हैं कि उसके अच्छे मार्क्स आए। अगर ठीक आ जाते हैं तो अगली चिंता अच्छे कॉलेज में एडमिशन हो जाए, फिर उसे अच्छी नौकरी मिल जाए, फिर उसकी अच्छी शादी हो जाए। यह क्रम इसी तरह से आगे चलता रहता है, जिसके कारण न तो मनुष्य कभी चिंता मुक्त हो पाता है और न ही सुख की अनुभूति हो पाती है।
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शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में मास्टर जी ने लोगों से मिले स्नेह का आभार जताया। कार्यक्रम के दौरान गायक गुराशीष सिंह ने अपने भजनों से उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर राम नाटक सभा पटेल नगर के कलाकारों ने माता शबरी और प्रभु श्रीराम भेंट का दृश्य प्रस्तुत करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं के समक्ष श्रीराम चरित से परिचित करवाया। कार्यक्रम के दौरान मास्टर जी ने राम नाटक सभा के कलाकारों की ओर से प्रस्तुत दृश्य से प्रेरित होकर कहा कि परमात्मा के प्रति श्रद्धा माता शबरी की भांति ही होनी चाहिए, जो भगवान को आप तक आने के लिए मजबूर कर दे। उन्होंने कहा कि लंकापति रावण भी महान धर्म ज्ञाता और भक्त था। अपनी भक्ति के कारण ही उसने अजेय होने का वर प्राप्त किया, लेकिन उसने रावण को अहंकारी बनाया, जो उसके पतन का कारण बना। उन्होंने कहा कि हमारे अंदर राम भी होता है और रावण भी अंदर ही बैठा है। जरूरत इस बात की है कि हम अपने अंदर के रावण को निकालें और राम को स्थापित करें।
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उन्होंने कहा कि इस धरा पर जन्म लेने वाले हर व्यक्ति को शांति और सुख की कामना होती है। मौजूदा समय में इस धरती पर रहने वाले 800 करोड़ लोगों में हर एक ही कामना यही है लेकिन मरते दम तक आदमी सुख और शांति को नहीं प्राप्त कर पाता है। एक बच्चा जब जन्म लेता है तो उसमें इच्छाएं जागृत होती हैं। इसके अलावा माता-पिता यह आकांक्षा करते हैं कि उसके अच्छे मार्क्स आए। अगर ठीक आ जाते हैं तो अगली चिंता अच्छे कॉलेज में एडमिशन हो जाए, फिर उसे अच्छी नौकरी मिल जाए, फिर उसकी अच्छी शादी हो जाए। यह क्रम इसी तरह से आगे चलता रहता है, जिसके कारण न तो मनुष्य कभी चिंता मुक्त हो पाता है और न ही सुख की अनुभूति हो पाती है।
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