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Kathua News: राज्य परिवहन के नक्शे में कठुआ नदारद, जिला मुख्यालय से नहीं चलती एक भी सरकारी बस
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कठुआ। सवा छह लाख की आबादी वाला कठुआ जिला मुख्यालय राज्य परिवहन के नक्शे से गायब है। यहां से किसी भी रूट पर एक भी सरकारी बस नहीं चल रही है।
हैरान की बात तो यह है कि शाम ढलने के बाद जिला मुख्यालय बस सेवा से वंचित हो जाता है। उसके बाद यहां से किसी भी स्थानीय या बाहरी स्टेशन के लिए सरकारी या फिर प्राइवेट बस सेवा यात्रियों को नहीं मिलती है, जबकि निजी ऑपरेटरों की 300 बसें रोजाना विभिन्न रूटों पर चल रही हैं। इसके चलते जम्मू और पठानकोट जाने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। वहीं, रेलवे स्टेशन का फायदा भी शहरवासियों को अधिक नहीं मिल पाता है। पठानकोट या जम्मू जाने वाले लोगों को पहले सात किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय कर रेलवे स्टेशन जाना पड़ता है। अधिकतर लोग लंबी दूरी की यात्रा के लिए ही रेल सेवा का इस्तेमाल करते हैं।
निजी बस ऑपरेटरों के हवाले है कठुआ-जम्मू रूट
शहर के लोग जम्मू या पठानकोट जाने के लिए पूरी तरह निजी बसों पर निर्भर हैं। यहां से जम्मू सहित अन्य रूटों पर 300 के करीब बसें चलती हैं। सरकारी बस सेवा न होने के कारण इन निजी बसों में सफर करना जिलावासियों की मजबूरी बन गई है। बता दें कि पहले कठुआ से इंटर स्टेट रूट पठानकोट और अमृतसर के लिए बसें चलती थीं लेकिन कोरोना के बाद से ये भी बंद हो गईं। इसके बाद से शहरवासियों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं।
2021 में मिली 800 बसों में से एक भी कठुआ को नहीं मिली
2021 में जम्मू-कश्मीर में 800 नई सरकारी बसें खरीदी गईं। इन्हें विभिन्न शहरों, जिलों, कस्बों व ग्रामीण क्षेत्र के अलावा अंतरराज्यीय रूट पर दौड़ाना भी शुरू कर दिया, लेकिन कठुआ जिले को एक भी सरकारी बस नहीं मिली। हालात यह है कि कोरोना काल से पहले जो एक दो जम्मू कश्मीर पथ परिवहन निगम की सरकारी बसें पठानकोट के लिए रोजाना चलती थीं, वे भी बंद कर दी गईं, जबकि प्रतिदिन जिला कठुआ से हजारों यात्री इंटर स्टेट रूट पर सफर करते हैं।
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इंटर स्टेट बस स्टॉप बना शोपीस
कई सालों से बार-बार मांग करने पर भी जिला मुख्यालय पर आज तक इंटर स्टेट बस स्टॉप शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि वर्ष 2004 से इंटर स्टेट बस स्टॉप बनाने की प्रक्रिया चल रही है, जिसे पूरा कर लिया गया है लेकिन परिवहन विभाग और नगर परिषद में बेहतर समन्वय न होने के कारण अभी तक यह बस स्टॉप शुरू नहीं हो पाया। इसके कारण कठुआ जिले के लोग बाहरी राज्यों में जाने के लिए आज भी हाईवे पर दौड़ती लंबे रूट की बसों को रुकने का इशारा करते हैं, लेकिन बस चालक अपनी मर्जी से ही बसों को रोकते हैं।
कठुआ के लोगों को रोडवेज की सुविधा देने के लिए सरकार ने कभी भी गंभीरता नहीं दिखाई, जिसके कारण लोग निजी ट्रांसपोर्ट पर ही आश्रित हैं। कोरोना से पहले पंजाब रोडवेज की कुछ बसें चलती थीं, जो वाया नरोट जयमल सिंह कठुआ आती थीं और कुछ वारा लखनपुर कठुआ आती थीं, लेकिन कोरोना के बाद से वे सेवाएं भी बंद हो गई हैं। अब लोग सिर्फ निजी वाहनों पर ही आश्रित हैं।
-प्रभुदयाल शर्मा, स्थानीय निवासी
कठुआ में सरकारी बस सेवा का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। पहले पठानकोट के लिए इक्का-दुक्का बस सेवाएं थीं, वह भी पिछले कई सालों से बंद पड़ी हुई हैं। लोगों को आवागमन की सुविधा देने के नाम पर सिर्फ निजी ट्रांसपोर्टरों के हवाले छोड़ दिया गया है।
-मक्खन लाल, शहरवासी
-जम्मू-कश्मीर रोड ट्रांसपोर्ट के नक्शे में ही कठुआ जिला शायद शामिल नहीं किया गया है। इसके कारण न तो कठुआ से जम्मू की ओर जाने के लिए कोई बस सेवा उपलब्ध है और न ही पठानकोट से लिए। ऐसे में लोगों के पास निजी बस सेवा के सिवाय कोई और चारा ही नहीं बचता।
-सुनील कुमार, स्थानीय निवासी
लोगों की मांग पर किया जाएगा विचार : मैनेजर
जम्मू-कश्मीर स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट के मैनेजर (पैसेंजर सर्विस) अनुपम गंडौत्रा का कहना है कि फिलहाल कठुआ से कोई सरकारी बस सर्विस नहीं है। अगर लोगों की मांग है तो वे एक मांगपत्र जम्मू-कश्मीर स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट के जनरल मैनेजर को दे सकते हैं। फिर उस पर संभावनाएं तलाशी जाएंगी ताकि लोगों को राहत मिल सके।
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हैरान की बात तो यह है कि शाम ढलने के बाद जिला मुख्यालय बस सेवा से वंचित हो जाता है। उसके बाद यहां से किसी भी स्थानीय या बाहरी स्टेशन के लिए सरकारी या फिर प्राइवेट बस सेवा यात्रियों को नहीं मिलती है, जबकि निजी ऑपरेटरों की 300 बसें रोजाना विभिन्न रूटों पर चल रही हैं। इसके चलते जम्मू और पठानकोट जाने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। वहीं, रेलवे स्टेशन का फायदा भी शहरवासियों को अधिक नहीं मिल पाता है। पठानकोट या जम्मू जाने वाले लोगों को पहले सात किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय कर रेलवे स्टेशन जाना पड़ता है। अधिकतर लोग लंबी दूरी की यात्रा के लिए ही रेल सेवा का इस्तेमाल करते हैं।
निजी बस ऑपरेटरों के हवाले है कठुआ-जम्मू रूट
शहर के लोग जम्मू या पठानकोट जाने के लिए पूरी तरह निजी बसों पर निर्भर हैं। यहां से जम्मू सहित अन्य रूटों पर 300 के करीब बसें चलती हैं। सरकारी बस सेवा न होने के कारण इन निजी बसों में सफर करना जिलावासियों की मजबूरी बन गई है। बता दें कि पहले कठुआ से इंटर स्टेट रूट पठानकोट और अमृतसर के लिए बसें चलती थीं लेकिन कोरोना के बाद से ये भी बंद हो गईं। इसके बाद से शहरवासियों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं।
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2021 में मिली 800 बसों में से एक भी कठुआ को नहीं मिली
2021 में जम्मू-कश्मीर में 800 नई सरकारी बसें खरीदी गईं। इन्हें विभिन्न शहरों, जिलों, कस्बों व ग्रामीण क्षेत्र के अलावा अंतरराज्यीय रूट पर दौड़ाना भी शुरू कर दिया, लेकिन कठुआ जिले को एक भी सरकारी बस नहीं मिली। हालात यह है कि कोरोना काल से पहले जो एक दो जम्मू कश्मीर पथ परिवहन निगम की सरकारी बसें पठानकोट के लिए रोजाना चलती थीं, वे भी बंद कर दी गईं, जबकि प्रतिदिन जिला कठुआ से हजारों यात्री इंटर स्टेट रूट पर सफर करते हैं।
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इंटर स्टेट बस स्टॉप बना शोपीस
कई सालों से बार-बार मांग करने पर भी जिला मुख्यालय पर आज तक इंटर स्टेट बस स्टॉप शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि वर्ष 2004 से इंटर स्टेट बस स्टॉप बनाने की प्रक्रिया चल रही है, जिसे पूरा कर लिया गया है लेकिन परिवहन विभाग और नगर परिषद में बेहतर समन्वय न होने के कारण अभी तक यह बस स्टॉप शुरू नहीं हो पाया। इसके कारण कठुआ जिले के लोग बाहरी राज्यों में जाने के लिए आज भी हाईवे पर दौड़ती लंबे रूट की बसों को रुकने का इशारा करते हैं, लेकिन बस चालक अपनी मर्जी से ही बसों को रोकते हैं।
कठुआ के लोगों को रोडवेज की सुविधा देने के लिए सरकार ने कभी भी गंभीरता नहीं दिखाई, जिसके कारण लोग निजी ट्रांसपोर्ट पर ही आश्रित हैं। कोरोना से पहले पंजाब रोडवेज की कुछ बसें चलती थीं, जो वाया नरोट जयमल सिंह कठुआ आती थीं और कुछ वारा लखनपुर कठुआ आती थीं, लेकिन कोरोना के बाद से वे सेवाएं भी बंद हो गई हैं। अब लोग सिर्फ निजी वाहनों पर ही आश्रित हैं।
-प्रभुदयाल शर्मा, स्थानीय निवासी
कठुआ में सरकारी बस सेवा का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। पहले पठानकोट के लिए इक्का-दुक्का बस सेवाएं थीं, वह भी पिछले कई सालों से बंद पड़ी हुई हैं। लोगों को आवागमन की सुविधा देने के नाम पर सिर्फ निजी ट्रांसपोर्टरों के हवाले छोड़ दिया गया है।
-मक्खन लाल, शहरवासी
-जम्मू-कश्मीर रोड ट्रांसपोर्ट के नक्शे में ही कठुआ जिला शायद शामिल नहीं किया गया है। इसके कारण न तो कठुआ से जम्मू की ओर जाने के लिए कोई बस सेवा उपलब्ध है और न ही पठानकोट से लिए। ऐसे में लोगों के पास निजी बस सेवा के सिवाय कोई और चारा ही नहीं बचता।
-सुनील कुमार, स्थानीय निवासी
लोगों की मांग पर किया जाएगा विचार : मैनेजर
जम्मू-कश्मीर स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट के मैनेजर (पैसेंजर सर्विस) अनुपम गंडौत्रा का कहना है कि फिलहाल कठुआ से कोई सरकारी बस सर्विस नहीं है। अगर लोगों की मांग है तो वे एक मांगपत्र जम्मू-कश्मीर स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट के जनरल मैनेजर को दे सकते हैं। फिर उस पर संभावनाएं तलाशी जाएंगी ताकि लोगों को राहत मिल सके।