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सुरुइंसर में पर्यटक जल्द ले सकेंगे बोटिंग का लुत्फ
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कठुआ। जम्मू से लगभग 50 किलोमीटर दूर पौराणिक महत्व के साथ-साथ पर्यटन की असीम संभावनाएं समेटे सुरुइंसर झील में जल्द पर्यटक बोटिंग का लुत्फ उठा सकेंगे। तीन दशक बाद वन्यजीव विभाग से सशर्त झील में बोट्स उतारने की अनुमति के बाद यह संभव हो पाया है। पर्यटन विभाग अब तीन पैडल और तीन रोइंग बोट्स को झील में उतार सकेगा।
वन्यजीव विभाग की ओर से 31 मार्च, 2021 तक यह अनुमति दी गई है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही विभाग इस संबंध में टेंडर जारी करेगा। इससे जहां राजस्व में इजाफा होगा, वहीं झील और कुदरती नजारों से भी पर्यटक वाकिफ हो पाएंगे। हालांकि इस दौरान पर्यटकों और विभाग को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि वन्यजीवों को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे और जम्मू कश्मीर वन्यजीव संरक्षण नियमों का भी पालन हो। पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे इसके लिए यह भी शर्त रखी गई कि किसी भी तरह का बायो डिग्रेडेबल वेस्ट भी झील या आसपास न फेंका जाए। बोटिंग गतिविधियों को पक्षियों के प्रजनन क्षेत्र से दूर रखने की हिदायत भी दी गई है। यह सब इसलिए भी जरूरी है चूंकि सुरुइंसर झील, रामसर वेटलैंड का हिस्सा है, जो अंतरराष्ट्रीय महत्व का है और हर साल इस वेटलैंड में कई तरह के पक्षी प्रजनन के लिए पहुंचते रहे हैं।
घने जंगलों के बीच कुदरती नजारों और शांत वातावरण के लिए जानी जाने वाली इस झील को पर्यटक वादी की डल की तरह ही पहचानते हैं। कश्मीर में अक्सर खराब रहने वाले हालात के बीच पर्यटन विभाग की यह पहल जम्मू संभाग की इन झीलों में पर्यटकों को आकर्षित करेगी।
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सुरुइंसर और मानसर झील को जुड़वा झीलें माना जाता है, जिसके मध्य सुरुइंसर-मानसर वन्यजीव अभयारण्य मौजूद है। महाभारत कालीन कई मंदिरों के साथ यह स्थल सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। सुरुइंसर झील वर्षा जल पर निर्भर है और इसका कोई स्थायी बहाव नहीं है। ऐसा माना जाता है कि कुछ वर्ष पूर्व तक सालाना एक से दो लाख पर्यटक यहां पहुंचते रहे हैं। वहीं लगभग दस लाख पर्यटक सुरिंसर और मानसर झीलों को देखने के लिए गत वर्ष पहुंचे थे। पर्यटन विभाग जम्मू ने वन्यजीव विभाग और सुरिंसर मानसर विकास प्राधिकरण के सहयोग से इस वर्ष जून माह में ईको टूरिज्म पर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कार्यक्रम भी आयोजित किया था। जिसमें यहां की संस्कृति और खान पान से रूबरू भी करवाया गया।
वन्यजीव विभाग ने सुरुइंसर झील में बोट़्स उतारने की अनुमति दे दी है, जिससे पर्यटकों की सुविधाओं में इजाफा होगा। प्राकृतिक सौंदर्य से संपन्न और शांत वातावरण में सुविधाएं बढ़ने से पर्यटकों का आकर्षित किया जा सकेगा। इसके लिए लगातार प्रयास जारी हैं।
-नागेंद्र सिंह जम्वाल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मानसर-सुरुइंसर विकास प्राधिकरण
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वन्यजीव विभाग की ओर से 31 मार्च, 2021 तक यह अनुमति दी गई है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही विभाग इस संबंध में टेंडर जारी करेगा। इससे जहां राजस्व में इजाफा होगा, वहीं झील और कुदरती नजारों से भी पर्यटक वाकिफ हो पाएंगे। हालांकि इस दौरान पर्यटकों और विभाग को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि वन्यजीवों को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे और जम्मू कश्मीर वन्यजीव संरक्षण नियमों का भी पालन हो। पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे इसके लिए यह भी शर्त रखी गई कि किसी भी तरह का बायो डिग्रेडेबल वेस्ट भी झील या आसपास न फेंका जाए। बोटिंग गतिविधियों को पक्षियों के प्रजनन क्षेत्र से दूर रखने की हिदायत भी दी गई है। यह सब इसलिए भी जरूरी है चूंकि सुरुइंसर झील, रामसर वेटलैंड का हिस्सा है, जो अंतरराष्ट्रीय महत्व का है और हर साल इस वेटलैंड में कई तरह के पक्षी प्रजनन के लिए पहुंचते रहे हैं।
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घने जंगलों के बीच कुदरती नजारों और शांत वातावरण के लिए जानी जाने वाली इस झील को पर्यटक वादी की डल की तरह ही पहचानते हैं। कश्मीर में अक्सर खराब रहने वाले हालात के बीच पर्यटन विभाग की यह पहल जम्मू संभाग की इन झीलों में पर्यटकों को आकर्षित करेगी।
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सुरुइंसर और मानसर झील को जुड़वा झीलें माना जाता है, जिसके मध्य सुरुइंसर-मानसर वन्यजीव अभयारण्य मौजूद है। महाभारत कालीन कई मंदिरों के साथ यह स्थल सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। सुरुइंसर झील वर्षा जल पर निर्भर है और इसका कोई स्थायी बहाव नहीं है। ऐसा माना जाता है कि कुछ वर्ष पूर्व तक सालाना एक से दो लाख पर्यटक यहां पहुंचते रहे हैं। वहीं लगभग दस लाख पर्यटक सुरिंसर और मानसर झीलों को देखने के लिए गत वर्ष पहुंचे थे। पर्यटन विभाग जम्मू ने वन्यजीव विभाग और सुरिंसर मानसर विकास प्राधिकरण के सहयोग से इस वर्ष जून माह में ईको टूरिज्म पर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कार्यक्रम भी आयोजित किया था। जिसमें यहां की संस्कृति और खान पान से रूबरू भी करवाया गया।
वन्यजीव विभाग ने सुरुइंसर झील में बोट़्स उतारने की अनुमति दे दी है, जिससे पर्यटकों की सुविधाओं में इजाफा होगा। प्राकृतिक सौंदर्य से संपन्न और शांत वातावरण में सुविधाएं बढ़ने से पर्यटकों का आकर्षित किया जा सकेगा। इसके लिए लगातार प्रयास जारी हैं।
-नागेंद्र सिंह जम्वाल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मानसर-सुरुइंसर विकास प्राधिकरण