कठुआ। 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश में आपातकाल लगाए जाने के विरोध में भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा काला दिवस मनाया गया। शनिवार को शहर के मुखर्जी चौक स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मारक स्थल पर जमा हुए दर्जनों कार्यकर्ताओं ने काली पट्टी बांधकर कांग्रेस के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए देश में आपातकाल लगाए जाने को लोकतंत्र की हत्या करार दिया।
इस दौरान भाजपा जिला प्रधान गोपाल महाजन ने कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के इतिहास में आपातकाल एक काला अध्याय है। इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री ने देश में अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए इसका उपयोग किया। इस दौरान आपातकाल का विरोध करने वाले विपक्ष को कुचलने के लिए जिस तरह से सरकारी मशीनरी उपयोग किया गया वह बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर द्वारा रचित संविधान का भी अपमान था। वहीं भाजपा के पूर्व जिला प्रधान प्रेम नाथ डोगरा ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के इस काले इतिहास को याद रखना तो नहीं चाहिए, लेकिन इतिहास ही वह माध्यम है जिससे प्रेरणा लेकर वर्तमान और भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है। वहीं राहुल देव शर्मा ने कहा कि आज से 43 साल पहले देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया था। 25 जून 1975 की आधी रात को आपातकाल लागू किया गया जो कि 21 मार्च 1977 तक लागू रहा। इस अवधि के दौरान सभी नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। अभिव्यक्ति का अधिकार ही नहीं, लोगों के पास जीवन का अधिकार भी नहीं रह गया था। इस दौरान लोकतंत्र के चौथे स्तंभ प्रेस पर भी सेंसर लगाया गया। जिसने आजाद देश के नागरिकों को गुलामों की तरह जीने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार द्वारा देश और समाज के उत्थान के लिए किए जाने वाले फैसलों का जनता के बीच उन्हें जनविरोधी करार देने वाली कांग्रेस को अपने पूर्व के इतिहास को याद करने की जरूरत है।