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कथा से मिलेगा सत्य का मार्ग : गायत्री
Sun, 08 Jun 2025 02:09 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Sun, 08 Jun 2025 02:09 AM IST
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कठुआ में बसोहली के सन्ननघाट में श्रीमद्भागवत कथा आयोजित की जा रही है।
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कठुआ। बसोहली के सन्ननघाट में श्रीमद्भागवत कथा आयोजित की जा रही है।
इसके तीसरे दिन शनिवार को सुप्रसिद्ध कथावाचक गायत्री दीदी ने भगवान कृष्ण के जन्म उत्सव की दिव्य कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि कथा सुनने वालों को सत्य का मार्ग मिल सकता है।
इस दौरान भगवान कृष्ण के जन्म से जुड़ी विभिन्न प्रसंग सुनाए गए, जिनमें देवकी और वसुदेव के कष्ट, कंस की क्रूरता, और भगवान के दिव्य अवतरण का उल्लेख शामिल था।
कथावाचक ने बताया कि पूर्वजों को तृप्त करने और देवताओं की कृपा पाने के लिए कथाओं का आयोजन होता है। कथा से हमारा जीवन सुधरता है क्योंकि कथा के प्रभाव से हमें जीवन जीने की कला और विज्ञान का ज्ञान होता है। कथा के प्रभाव से हमारा समाज भी जुड़ता है।
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हमें कथा में कुछ पाने की लालसा के बजाय शुद्ध अंत:करण से कथा सुननी चाहिए। गायत्री ने कहा कि कलियुग के प्रभाव के कारण अधिकतर लोग भोग को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे समय में कथा सुनना ही हमें सत की ओर ले जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जहां भी श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन होता है, वहां भगवत का आगमन अवश्य होता है लेकिन इसके लिए कथाव्यास का सात्विक होना और श्रोता का शुद्ध मन जरूरी है।
कथा के दौरान भगवान शब्द के रूप में प्रकट होते हैं। वही शब्द जब हमारे हृदय में विराजमान होते हैं तो वह नारायण को प्रकट कर देते हैं। इसलिए कथा सुनने वाले सभी लोग भाग्यशाली होते हैं।
कृष्ण जन्मोत्सव का उत्साह बढ़ाते हुए भजन-कीर्तन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्ति संगीत पर झूमकर भगवान की महिमा का गुणगान किया।
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इसके तीसरे दिन शनिवार को सुप्रसिद्ध कथावाचक गायत्री दीदी ने भगवान कृष्ण के जन्म उत्सव की दिव्य कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि कथा सुनने वालों को सत्य का मार्ग मिल सकता है।
इस दौरान भगवान कृष्ण के जन्म से जुड़ी विभिन्न प्रसंग सुनाए गए, जिनमें देवकी और वसुदेव के कष्ट, कंस की क्रूरता, और भगवान के दिव्य अवतरण का उल्लेख शामिल था।
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कथावाचक ने बताया कि पूर्वजों को तृप्त करने और देवताओं की कृपा पाने के लिए कथाओं का आयोजन होता है। कथा से हमारा जीवन सुधरता है क्योंकि कथा के प्रभाव से हमें जीवन जीने की कला और विज्ञान का ज्ञान होता है। कथा के प्रभाव से हमारा समाज भी जुड़ता है।
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हमें कथा में कुछ पाने की लालसा के बजाय शुद्ध अंत:करण से कथा सुननी चाहिए। गायत्री ने कहा कि कलियुग के प्रभाव के कारण अधिकतर लोग भोग को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे समय में कथा सुनना ही हमें सत की ओर ले जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जहां भी श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन होता है, वहां भगवत का आगमन अवश्य होता है लेकिन इसके लिए कथाव्यास का सात्विक होना और श्रोता का शुद्ध मन जरूरी है।
कथा के दौरान भगवान शब्द के रूप में प्रकट होते हैं। वही शब्द जब हमारे हृदय में विराजमान होते हैं तो वह नारायण को प्रकट कर देते हैं। इसलिए कथा सुनने वाले सभी लोग भाग्यशाली होते हैं।
कृष्ण जन्मोत्सव का उत्साह बढ़ाते हुए भजन-कीर्तन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्ति संगीत पर झूमकर भगवान की महिमा का गुणगान किया।