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Kathua News: 110 कर्मचारियों की छंटनी के विरोध में फूटा गुस्सा
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मशीनरी हटाने के प्रयास पर धरने पर बैठे कर्मियों ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। गोविंदसर स्थित औद्योगिक इकाई को बंद किए जाने और 110 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने के फैसले के खिलाफ जारी धरना-प्रदर्शन मंगलवार को उस समय और उग्र हो गया, जब कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि प्रबंधन उनकी मांगों का समाधान किए बिना इकाई से मशीनरी हटा रहा है। इससे नाराज कर्मचारियों ने इकाई के मुख्यद्वार के बाहर जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रबंधन के खिलाफ अपना रोष जताया और आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी।
पिछले 15 दिनों से धरने पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि वर्ष 2017 से संचालित इस इकाई को प्रबंधन ने जानबूझकर घाटे में दिखाकर बंद कर दिया है। प्रदर्शनकारी कर्मचारी अमरीक सिंह ने बताया कि एक ही दिन में 110 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया, जिससे उनके परिवार के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को सेवा अवधि के प्रत्येक वर्ष के बदले एक माह का वेतन देकर मामले को समाप्त करने का प्रयास किया गया, लेकिन यह उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भीषण गर्मी के बावजूद कर्मचारी लगातार धरने पर बैठे हैं, लेकिन अब तक प्रबंधन का कोई वरिष्ठ अधिकारी उनकी समस्याएं सुनने या समाधान निकालने के लिए आगे नहीं आया। इसके उलट अब इकाई में स्थापित मशीनरी को भी हटाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि कर्मचारियों के हितों के खिलाफ उठाए जा रहे इस कदम को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए अब दिन-रात धरना लगातार जारी रखा जाएगा। यदि एक सप्ताह के भीतर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो कर्मचारी अपने परिवारों को भी आंदोलन में शामिल करेंगे।
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प्रदर्शनकारी सुमित कुमार ने कहा कि उत्पादन के मामले में इकाई कभी पीछे नहीं रही। यदि कंपनी को नुकसान हुआ है तो उसके लिए प्रबंधन की नीतियां जिम्मेदार हैं, न कि कर्मचारी। उन्होंने बताया कि प्रभावित कर्मचारियों ने श्रम आयुक्त के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद श्रम आयुक्त ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद प्रबंधन मनमाने ढंग से कार्रवाई कर रहा है। कर्मचारियों ने मांग की कि यदि उनकी सेवाएं बहाल करना संभव नहीं है तो उन्हें ऐसा पर्याप्त मुआवजा दिया जाए, जिससे वे अपने परिवारों के भरण-पोषण के लिए कोई वैकल्पिक रोजगार शुरू कर सकें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। गोविंदसर स्थित औद्योगिक इकाई को बंद किए जाने और 110 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने के फैसले के खिलाफ जारी धरना-प्रदर्शन मंगलवार को उस समय और उग्र हो गया, जब कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि प्रबंधन उनकी मांगों का समाधान किए बिना इकाई से मशीनरी हटा रहा है। इससे नाराज कर्मचारियों ने इकाई के मुख्यद्वार के बाहर जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रबंधन के खिलाफ अपना रोष जताया और आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी।
पिछले 15 दिनों से धरने पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि वर्ष 2017 से संचालित इस इकाई को प्रबंधन ने जानबूझकर घाटे में दिखाकर बंद कर दिया है। प्रदर्शनकारी कर्मचारी अमरीक सिंह ने बताया कि एक ही दिन में 110 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया, जिससे उनके परिवार के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को सेवा अवधि के प्रत्येक वर्ष के बदले एक माह का वेतन देकर मामले को समाप्त करने का प्रयास किया गया, लेकिन यह उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि भीषण गर्मी के बावजूद कर्मचारी लगातार धरने पर बैठे हैं, लेकिन अब तक प्रबंधन का कोई वरिष्ठ अधिकारी उनकी समस्याएं सुनने या समाधान निकालने के लिए आगे नहीं आया। इसके उलट अब इकाई में स्थापित मशीनरी को भी हटाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि कर्मचारियों के हितों के खिलाफ उठाए जा रहे इस कदम को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए अब दिन-रात धरना लगातार जारी रखा जाएगा। यदि एक सप्ताह के भीतर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो कर्मचारी अपने परिवारों को भी आंदोलन में शामिल करेंगे।
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प्रदर्शनकारी सुमित कुमार ने कहा कि उत्पादन के मामले में इकाई कभी पीछे नहीं रही। यदि कंपनी को नुकसान हुआ है तो उसके लिए प्रबंधन की नीतियां जिम्मेदार हैं, न कि कर्मचारी। उन्होंने बताया कि प्रभावित कर्मचारियों ने श्रम आयुक्त के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद श्रम आयुक्त ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद प्रबंधन मनमाने ढंग से कार्रवाई कर रहा है। कर्मचारियों ने मांग की कि यदि उनकी सेवाएं बहाल करना संभव नहीं है तो उन्हें ऐसा पर्याप्त मुआवजा दिया जाए, जिससे वे अपने परिवारों के भरण-पोषण के लिए कोई वैकल्पिक रोजगार शुरू कर सकें।