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Kathua News: अब बाढ़ आने पर बजेगा अलार्म
Wed, 25 Jun 2025 12:38 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
Updated Wed, 25 Jun 2025 12:38 AM IST
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उज्ज दरिया में नेशनल हाईवे राजबाग पुल पर स्थापित अर्ली वार्निंग सिस्टम। संवाद
- फोटो : kathua
12.60 लाख रुपये की लागत राजबाग और पंजतीर्थी में स्थापित किया अर्ली वार्निंग सिस्टम
खास खबर
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। उज्ज दरिया में संभावित बाढ़ से जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राजबाग और पंजतीर्थी क्षेत्रों में अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं। बाढ़ की स्थिति से समय रहते निपटने में मददगार यह सिस्टम 12.60 लाख रुपये की लागत से लगाया गया है।
प्रत्येक सिस्टम की कीमत 6.30 लाख रुपये है। इन्हें बिलावर के पंजतीर्थी और कठुआ के राजबाग में स्थापित किया गया है। ये सिस्टम पूरी तरह स्वचालित हैं और हर घंटे अपडेट देकर बाढ़ से जुड़ी जानकारियां अधिकारियों को भेजते हैं। इनमें डॉप्लर सेंसर के जरिए जल प्रवाह की गति (विलोसिटी), रडार और रेनफॉल टावर की सहायता से जल स्तर और वर्षा की स्थिति का मूल्यांकन होता है।
बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार इस प्रणाली की एक खासियत यह है कि यह एप से रियल-टाइम डाटा देखने की सुविधा देता है। उपयोगकर्ता एप पर देख सकते हैं कि दरिया में पानी बहाव कितना हो रहा है, कितनी वर्षा हो चुकी है और जलस्तर किस स्थिति में है। इस अर्ली वार्निंग सिस्टम का सेंसर, नियंत्रण अधिकारियों एसएमएस के माध्यम से अलर्ट प्राप्त भेजता है, जिसके आधार पर आपातकालीन नियंत्रण केंद्र अन्य संबंधित विभागों को फौरन सूचित करने का प्रावधान है।
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नेशनल हाईवे स्थित राजबाग पुल तक पानी पहुंचने में तीन घंटे का रहता है समय
उज्ज बैराज पर एक सायरन भी स्थापित किया गया है, जो बिलावर से बारिश और संभावित बाढ़ के अलर्ट मिलने पर बजता है। बिलावर में बारिश और उज्ज दरिया में जलस्तर बढ़ने की स्टाफ की ओर से जानकारी मिलने के बाद नेशनल हाईवे स्थित राजबाग पुल तक पानी पहुंचने में लगभग तीन घंटे का समय रहता है। इस दौरान छब्बे चक, तंगदेवपुर, सलालपुर और कोट पुन्नू जैसे क्षेत्रों में बाढ़ अलर्ट जारी कर स्थानीय निवासियों को सतर्क किया जाता है।
................
कोट
फिलहाल यह व्यवस्था उज्ज दरिया क्षेत्र में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाई जा रही है। यदि यह परीक्षण सफल रहता है, तो अगले वर्ष जखोल, तरनाह और सहार जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी इसे लागू करने की योजना है।
सुनील सिंह, सहायक कार्यकारी अभियंता
बाढ़ नियंत्रण विभाग, कठुआ
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। उज्ज दरिया में संभावित बाढ़ से जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राजबाग और पंजतीर्थी क्षेत्रों में अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किए गए हैं। बाढ़ की स्थिति से समय रहते निपटने में मददगार यह सिस्टम 12.60 लाख रुपये की लागत से लगाया गया है।
प्रत्येक सिस्टम की कीमत 6.30 लाख रुपये है। इन्हें बिलावर के पंजतीर्थी और कठुआ के राजबाग में स्थापित किया गया है। ये सिस्टम पूरी तरह स्वचालित हैं और हर घंटे अपडेट देकर बाढ़ से जुड़ी जानकारियां अधिकारियों को भेजते हैं। इनमें डॉप्लर सेंसर के जरिए जल प्रवाह की गति (विलोसिटी), रडार और रेनफॉल टावर की सहायता से जल स्तर और वर्षा की स्थिति का मूल्यांकन होता है।
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बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार इस प्रणाली की एक खासियत यह है कि यह एप से रियल-टाइम डाटा देखने की सुविधा देता है। उपयोगकर्ता एप पर देख सकते हैं कि दरिया में पानी बहाव कितना हो रहा है, कितनी वर्षा हो चुकी है और जलस्तर किस स्थिति में है। इस अर्ली वार्निंग सिस्टम का सेंसर, नियंत्रण अधिकारियों एसएमएस के माध्यम से अलर्ट प्राप्त भेजता है, जिसके आधार पर आपातकालीन नियंत्रण केंद्र अन्य संबंधित विभागों को फौरन सूचित करने का प्रावधान है।
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नेशनल हाईवे स्थित राजबाग पुल तक पानी पहुंचने में तीन घंटे का रहता है समय
उज्ज बैराज पर एक सायरन भी स्थापित किया गया है, जो बिलावर से बारिश और संभावित बाढ़ के अलर्ट मिलने पर बजता है। बिलावर में बारिश और उज्ज दरिया में जलस्तर बढ़ने की स्टाफ की ओर से जानकारी मिलने के बाद नेशनल हाईवे स्थित राजबाग पुल तक पानी पहुंचने में लगभग तीन घंटे का समय रहता है। इस दौरान छब्बे चक, तंगदेवपुर, सलालपुर और कोट पुन्नू जैसे क्षेत्रों में बाढ़ अलर्ट जारी कर स्थानीय निवासियों को सतर्क किया जाता है।
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कोट
फिलहाल यह व्यवस्था उज्ज दरिया क्षेत्र में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाई जा रही है। यदि यह परीक्षण सफल रहता है, तो अगले वर्ष जखोल, तरनाह और सहार जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी इसे लागू करने की योजना है।
सुनील सिंह, सहायक कार्यकारी अभियंता
बाढ़ नियंत्रण विभाग, कठुआ