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धान खरीद केंद्र की कार्यप्रणाली को लेकर भड़के किसान
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कठुआ। धान खरीद केंद्र में तैनात कर्मचारियों द्वारा शरीद में अपनाई जा रही नीति के खिलाफ किसान वर्ग में रोष बढ़ता जा रहा है। शनिवार को कठुआ के भजवाल स्थित खरीद केंद्र पर किसानों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रशासन से समस्या का समाधान किए जाने की मांग की।
प्रदर्शन में शामिल किसान जय सिंह, विशु अंडोत्रा, सनी अंडोत्रा आदि ने कहा कि भले ही किसानों की फसल का उन्हें बेहतर मूल्य उपलब्ध कराए जाने के नाम पर खरीद केंद्र खोले गए हैं, लेकिन यहां किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। खरीद केंद्रों में तैनात कर्मचारी भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। वहीं, इन खरीद केंद्रों में ऐसी व्यवस्था भी नहीं है कि किसान यहां अपनी फसल पहुंचाने के बाद निश्चिंत हो जाएं। उन्होंने कहा कि खरीद केंद्र पर पिछले 10 दिनों से किसान अपना धान लेकर आए हैं, लेकिन अभी तक धान की तौल नहीं हो पा रही है। ऐसे में उन्हें अपनी फसल का मूल्य कब मिलेगा इसका पता नहीं है।
त्योहारों के सीजन में हर किसान को पैसों की जरूरत है। वहीं, किसानों को अब गेहूं की फसल के लिए भी तैयारी करनी है। अगर उनकी फसल समय से नहीं बिकी तो यह आवश्यक कार्य कैसे होंगे। किसानों ने खरीद केंद्र पर तैनात कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि यहां तैनात कर्मचारी अपनी मर्जी से लोगों की फसल तौल रहे हैं। हालात यह हैं कि पड़ोसी राज्य से अपना धान लेकर आने वाला किसान मात्र 24 घंटों में अपनी फसल की तौल करवा कर वापस चला जाता है, लेकिन स्थानीय किसान को खुले आसमान में अपनी फसल की रखवाली करने के लिए दिन रात खड़ा होना पड़ता है। इस तरह की स्थिति में अगर कहीं बरसात हो जाती है तो उनकी पूरी फसल चौपट हो सकती है। यहां पर न तो फसल को ढके जाने के लिए उचित व्यवस्था है और न ही जल्द तौले जाने के लिए कोई प्रावधान है। ऐसे में किसान वर्ग का परेशान होना लाजमी है, लिहाजा प्रशासन को यह देखना चाहिए खरीद केंद्रों में किन व्यवस्थाओं की जरूरत है और उसे जल्द पूरा किया जाना चाहिए ताकि किसानों का नुकसान होने से बचाया जा सके। अगर ऐसा न हुआ तो इसके खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।
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प्रदर्शन में शामिल किसान जय सिंह, विशु अंडोत्रा, सनी अंडोत्रा आदि ने कहा कि भले ही किसानों की फसल का उन्हें बेहतर मूल्य उपलब्ध कराए जाने के नाम पर खरीद केंद्र खोले गए हैं, लेकिन यहां किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। खरीद केंद्रों में तैनात कर्मचारी भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। वहीं, इन खरीद केंद्रों में ऐसी व्यवस्था भी नहीं है कि किसान यहां अपनी फसल पहुंचाने के बाद निश्चिंत हो जाएं। उन्होंने कहा कि खरीद केंद्र पर पिछले 10 दिनों से किसान अपना धान लेकर आए हैं, लेकिन अभी तक धान की तौल नहीं हो पा रही है। ऐसे में उन्हें अपनी फसल का मूल्य कब मिलेगा इसका पता नहीं है।
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त्योहारों के सीजन में हर किसान को पैसों की जरूरत है। वहीं, किसानों को अब गेहूं की फसल के लिए भी तैयारी करनी है। अगर उनकी फसल समय से नहीं बिकी तो यह आवश्यक कार्य कैसे होंगे। किसानों ने खरीद केंद्र पर तैनात कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि यहां तैनात कर्मचारी अपनी मर्जी से लोगों की फसल तौल रहे हैं। हालात यह हैं कि पड़ोसी राज्य से अपना धान लेकर आने वाला किसान मात्र 24 घंटों में अपनी फसल की तौल करवा कर वापस चला जाता है, लेकिन स्थानीय किसान को खुले आसमान में अपनी फसल की रखवाली करने के लिए दिन रात खड़ा होना पड़ता है। इस तरह की स्थिति में अगर कहीं बरसात हो जाती है तो उनकी पूरी फसल चौपट हो सकती है। यहां पर न तो फसल को ढके जाने के लिए उचित व्यवस्था है और न ही जल्द तौले जाने के लिए कोई प्रावधान है। ऐसे में किसान वर्ग का परेशान होना लाजमी है, लिहाजा प्रशासन को यह देखना चाहिए खरीद केंद्रों में किन व्यवस्थाओं की जरूरत है और उसे जल्द पूरा किया जाना चाहिए ताकि किसानों का नुकसान होने से बचाया जा सके। अगर ऐसा न हुआ तो इसके खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।
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