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प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित किए किसान
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कठुआ। कृषि विज्ञान केंद्र कठुआ में मंगलवार को प्राकृतिक खेती के किसानों को फायदे बताने के लिए किसान भागीदारी प्राथमिकता हमारी अभियान के तहत मेला लगाया गया। इसमें आजादी के अमृत महोत्सव के तहत कार्यक्रम करवाए गए। प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें किसानों ने अपने उत्पादों को प्रदर्शित किया। इसमें स्वयं सहायता समूहों की ओर से लगाया गया स्टॉल आकर्षण का केंद्र बना। सरकार की विभिन्न योजनाओं और कृषि आधारित उपकरणों सहित बीज आदि भी किसानों को स्टॉल पर उपलब्ध करवाए गए।
जिले के विभिन्न इलाकों से वहां की विशेषताओं के अनुसार स्थानीय महिला समूहों द्वारा बनाए गए उत्पाद प्रदर्शित किए गए। अचार, च्यू का जूस, देसी घी, मसाले, मुरब्बा, मल्टीग्रेन आटा, सेवियां, पापड़ आदि के स्टॉल लगाए गए। प्रगतिशील किसानों और खेतीहर महिलाओं को पुरस्कृत किया गया। साथ ही कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों में मशरूम और समूह कृषि व्यवसायी के तहत प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए, जिन्होंने केवीके-कठुआ में एक महीने का कौशल हासिल किया था। समारोह में डीडीसी अध्यक्ष महान सिंह मुख्य अतिथि रहे, उपाध्यक्ष रघुनंदन सिंह बबलू विशेष अतिथि रहे। डीडीसी सदस्य और सरपंच, पंचों ने भी मेले में शिरकत की। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विशाल महाजन ने किसानों को मेले के आयोजन के संबंध में जानकारी दी। बताया कि मेले के दौरान प्रदर्शनी में कृषि, भेड़ पालन, बागवानी, उद्यानिकी, पशुपालन आदि विभागों ने अपने स्टॉल लगाए। इफ्को और बीजीएस मसालों जैसी निजी एजेंसियां भी इसमें शामिल हुईं। स्वयं सहायता समूह के सदस्यों और कृषि उत्पादों से जुड़ी महिलाओं की भागीदारी भी अधिक रही। मेले में तीन सौ से अधिक किसानों ने भाग लिया। भाजपा जिला अध्यक्ष गोपाल महाजन भी इस मौके पर मौजूद रहे।
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रसायनमुक्त है प्राकृतिक खेती; जीवामृत
घन जीवामृत से बनी खाद होती है प्रयोग
पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. अनामिका जमवाल ने कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती के तहत अपनाए गए पर्यावरण के अनुकूल संयंत्र संरक्षण उपायों के बारे में भी जानकारी दी। बताया कि प्राकृतिक खेती रसायनमुक्त होती है। इसमें जीवामृत, घन जीवामृत से तैयार खादों का प्रयोग किया जाता है। इससे आच्छादन, वापसा और सह फसलें उगाई जाती हैं। एग्रोनॉमी वैज्ञानिक डॉ. विशाल शर्मा ने किसानों को प्राकृतिक खेती पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। कृषि-मौसम विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. आशु शर्मा ने मुख्य रूप से जिले के बारिश वाले क्षेत्रों और मानव स्वास्थ्य के लिए उनके लाभों के बारे में चर्चा की। डॉ. बृजेश अरावत ने किसानों को लाभकारी योजनाओं के बारे में बताया। प्रगतिशील और पुरस्कार विजेता किसान संजय कुमार और सोहन सिंह ने क्षेत्र में उगाई जा सकने वाली नकदी फसलों पर तकनीकी इनपुट और तकनीकी जानकारी प्रदान करने में केवीके-कठुआ के प्रयासों की सराहना की।
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जिले के विभिन्न इलाकों से वहां की विशेषताओं के अनुसार स्थानीय महिला समूहों द्वारा बनाए गए उत्पाद प्रदर्शित किए गए। अचार, च्यू का जूस, देसी घी, मसाले, मुरब्बा, मल्टीग्रेन आटा, सेवियां, पापड़ आदि के स्टॉल लगाए गए। प्रगतिशील किसानों और खेतीहर महिलाओं को पुरस्कृत किया गया। साथ ही कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों में मशरूम और समूह कृषि व्यवसायी के तहत प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए, जिन्होंने केवीके-कठुआ में एक महीने का कौशल हासिल किया था। समारोह में डीडीसी अध्यक्ष महान सिंह मुख्य अतिथि रहे, उपाध्यक्ष रघुनंदन सिंह बबलू विशेष अतिथि रहे। डीडीसी सदस्य और सरपंच, पंचों ने भी मेले में शिरकत की। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विशाल महाजन ने किसानों को मेले के आयोजन के संबंध में जानकारी दी। बताया कि मेले के दौरान प्रदर्शनी में कृषि, भेड़ पालन, बागवानी, उद्यानिकी, पशुपालन आदि विभागों ने अपने स्टॉल लगाए। इफ्को और बीजीएस मसालों जैसी निजी एजेंसियां भी इसमें शामिल हुईं। स्वयं सहायता समूह के सदस्यों और कृषि उत्पादों से जुड़ी महिलाओं की भागीदारी भी अधिक रही। मेले में तीन सौ से अधिक किसानों ने भाग लिया। भाजपा जिला अध्यक्ष गोपाल महाजन भी इस मौके पर मौजूद रहे।
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रसायनमुक्त है प्राकृतिक खेती; जीवामृत
घन जीवामृत से बनी खाद होती है प्रयोग
पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. अनामिका जमवाल ने कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती के तहत अपनाए गए पर्यावरण के अनुकूल संयंत्र संरक्षण उपायों के बारे में भी जानकारी दी। बताया कि प्राकृतिक खेती रसायनमुक्त होती है। इसमें जीवामृत, घन जीवामृत से तैयार खादों का प्रयोग किया जाता है। इससे आच्छादन, वापसा और सह फसलें उगाई जाती हैं। एग्रोनॉमी वैज्ञानिक डॉ. विशाल शर्मा ने किसानों को प्राकृतिक खेती पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। कृषि-मौसम विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. आशु शर्मा ने मुख्य रूप से जिले के बारिश वाले क्षेत्रों और मानव स्वास्थ्य के लिए उनके लाभों के बारे में चर्चा की। डॉ. बृजेश अरावत ने किसानों को लाभकारी योजनाओं के बारे में बताया। प्रगतिशील और पुरस्कार विजेता किसान संजय कुमार और सोहन सिंह ने क्षेत्र में उगाई जा सकने वाली नकदी फसलों पर तकनीकी इनपुट और तकनीकी जानकारी प्रदान करने में केवीके-कठुआ के प्रयासों की सराहना की।
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