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प्रशासनिक कमेटी घोषित, फसल नुकसान का करेगी मूल्यांकन

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Administrative committee declared, will evaluate crop loss
कठुआ। जिले में गत 23 और 24 अक्तूबर को हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि के बाद फसलों को हुए नुकसान का आंकलन करने के लिए प्रशासन ने मूल्यांकन कमेटी की घोषणा कर दी है। किसान लगातार मुआवजा देने की मांग कर रहे थे। जिले के विभिन्न तहसीलों के लिए अलग-अलग गठित इस टीम में तहसीलदार को चेयरमैन के साथ सबडिवीजन एग्रीकल्चर अधिकारी व हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट अधिकारी को सदस्य बनाया गया है। ताकि वह अपने-अपने इलाके में हुए नुकसान का आकलन कर इसकी रिपोर्ट तैयार कर सकें।
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डीसी राहुल यादव की ओर से जारी आदेश में विभिन्न तहसीलों के लिए गठित की गई इन टीमों के कामकाज की देखरेख करने का जिम्मा एडीसी, एसडीएम, एसीआर, चीफ एग्रीकल्चर ऑफिसर और चीफ हॉर्टिकल्चर ऑफिसर को सौंपा गया है। जोकि इन कमेटियों के कामकाज की देखरेख करेंगे। इस बारे में राष्ट्रीय किसान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शिवदेव सिंह का कहना है कि दो दिन तक हुई बारिश से जिले के निचले क्षेत्रों में धान की फसल को नुकसान हुआ है। वहीं कंडी और पहाड़ी क्षेत्रों में किसानों की ओर से लगाई गई तोरी (सरसों) पूरी तरह से खत्म हो गई है। बारिश के कारण अब निचले क्षेत्रों में बढ़ी नमी के कारण समय से किसान गेहूं की फसल भी नहीं लगा सकेंगे। क्योंकि निचले क्षेत्रों में जल स्तर ऊंचा होने के कारण खेतों में जमा पानी 20 से 25 दिन तक नहीं सूखता है। ऐसे में खेतों में पड़ा धान तो खराब होगा ही होगा साथ ही गेहूं की बुवाई भी समय से नहीं हो पाएगी। मौसम के अचानक बिगड़े मिजाज का सबसे ज्यादा नुकसान जिला के निचले क्षेत्रों में जिनमें हीरानगर मढीन और कठुआ में हुआ है। बारिश के कारण धान की फसल को जो नुकसान हुआ है उससे अब स्थिति यह बन चुकी है कि किसान अगर इस धान को काटना भी चाहे तो वह उसके लिए मशीनों का सहारा नहीं ले सकता। क्योंकि खेतों में धान पूरी तरह से बिछ गया है। जिसे अब हाथ से काटना और उसके बाद सुखाना किसान की मजबूरी बन गया है। ऐसे हालात में फसल को हुआ नुकसान साथ-साथ अब समेटने के लिए किया जाने वाला दोगुना खर्च उसे सौ प्रतिशत नुकसान की ओर ले जा रहा है। निचले क्षेत्रों में जो कि जिला के सबसे ज्यादा फसल उत्पादन का केंद्र है। वहां गेहूं की बुवाई भी समय से नहीं हो पाएगी। अगर बुवाई समय से नहीं हुई तो बेहतर उत्पादन की उम्मीद भी बेमानी है।
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आपको बता दे की 2 दिनों तक हुई बारिश और ओलावृष्टि के बाद जिला भर से किसानों ने सरकार से उनकी फसल में हुए नुकसान का मुआवजा दिए जाने की गुहार लगा रहे थे।
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