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क्रॅशर संचालकों के साथ प्रशासनिक बैठक में जमकर हुआ हंगामा
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कठुआ। जिले के विभिन्न माइनिंग ब्लाक में क्रॅशरों को सील किए जाने के बाद शुक्रवार को जिला सचिवालय के सभागार में बैठक बुलाई गई। क्रॅशर संचालकों को विभिन्न विभागों की एनओसी और लाइसेंस पूरे करने के निर्देश देने के लिए बुलाई गई बैठक के दौरान जमकर हंगामा हुआ। हालांकि बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त को करनी थी, लेकिन बग्गन में कैंप के चलते वह नहीं पहुंच पाए।
इस दौरान पूर्व नगर परिषद कठुआ अध्यक्ष चौधरी राजिंद्र सिंह बब्बी ने माइनिंग विभाग को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि एक तो उनके क्रॅशर बिना नोटिस जारी किए बंद करा दिए गए। यदि दस्तावेजों की कमी थी तो इस संबंध में उन्हें बताया जाता और समय दिया जाता, लेकिन ऐसा करने की जगह क्रॅशर संचालकों को लाखों का नुकसान कर दिया गया। उन्होंने माइनिंग विभाग के जिला अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि रावी दरिया में रॉयल्टी की पर्ची भी नहीं काटी जा रही। ट्रैक्टर चालकों से अवैध वसूली की जा रही है और अधिकारी चुप्पी साधे हैं। कहा कि विभाग माइनिंग माफिया के साथ सांठ-गांठ कर चुका है और अधिकारी यही देखकर कार्रवाई नहीं करते हैं। चूंकि उन्हें मोटी रकम रिश्वत के रूप में मिल रही है। कहा कि जो भी लोग इस व्यवसाय से जुड़े रहे हैं यदि उन पर कार्रवाई करनी भी थी तो समय दिया जाता ताकि वो अपने दस्तावेजों को पूरा करते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उधर, माइनिंग विभाग और जिला औद्योगिक केंद्र के महाप्रबंधक उन्हें समझाते रहे, लेकिन राजिंद्र सिंह ने विभाग को आड़े हाथों लिया। अधिकारियों ने क्रॅशर संचालकों को कहा कि आने वाले कुछ दिनों में अपने दस्तावेजों को पूरा करें। जरूरी एनओसी और लाइसेंस हासिल करें जिसके बाद ही क्रॅशर चलाने की अनुमति जारी की जाएगी।
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इस दौरान पूर्व नगर परिषद कठुआ अध्यक्ष चौधरी राजिंद्र सिंह बब्बी ने माइनिंग विभाग को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि एक तो उनके क्रॅशर बिना नोटिस जारी किए बंद करा दिए गए। यदि दस्तावेजों की कमी थी तो इस संबंध में उन्हें बताया जाता और समय दिया जाता, लेकिन ऐसा करने की जगह क्रॅशर संचालकों को लाखों का नुकसान कर दिया गया। उन्होंने माइनिंग विभाग के जिला अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि रावी दरिया में रॉयल्टी की पर्ची भी नहीं काटी जा रही। ट्रैक्टर चालकों से अवैध वसूली की जा रही है और अधिकारी चुप्पी साधे हैं। कहा कि विभाग माइनिंग माफिया के साथ सांठ-गांठ कर चुका है और अधिकारी यही देखकर कार्रवाई नहीं करते हैं। चूंकि उन्हें मोटी रकम रिश्वत के रूप में मिल रही है। कहा कि जो भी लोग इस व्यवसाय से जुड़े रहे हैं यदि उन पर कार्रवाई करनी भी थी तो समय दिया जाता ताकि वो अपने दस्तावेजों को पूरा करते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उधर, माइनिंग विभाग और जिला औद्योगिक केंद्र के महाप्रबंधक उन्हें समझाते रहे, लेकिन राजिंद्र सिंह ने विभाग को आड़े हाथों लिया। अधिकारियों ने क्रॅशर संचालकों को कहा कि आने वाले कुछ दिनों में अपने दस्तावेजों को पूरा करें। जरूरी एनओसी और लाइसेंस हासिल करें जिसके बाद ही क्रॅशर चलाने की अनुमति जारी की जाएगी।
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