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Kathua News: कॉलेज में प्रोफेसरों की कमी के विरोध में एबीवीपी का प्रदर्शन

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ABVP protests against shortage of professors in college
अ​भाविप सदस्य रोष जताते हुए संवाद
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की राजकीय डिग्री कॉलेज कठुआ इकाई ने प्रोफेसरों की कमी को लेकर बुधवार को जोरदार प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों ने निदेशक कॉलेज की आलोचना करते हुए मांग की है कि जल्द से जल्द कॉलेज में शैक्षणिक व्यवस्था के तहत संविदा लेक्चरर की तैनाती की मांग की है। विद्यार्थियों ने कहा कि संविदा लेक्चरर की नियुक्ति को लेकर हो रही देरी के लिए सिर्फ और सिर्फ निदेशक कॉलेज जिम्मेदार हैं।
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प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए इकाई अध्यक्ष राहुल ठाकुर और सचिव मानवी ने बताया कि एक अगस्त से प्रथम सेमेस्टर की कक्षाएं शुरू की गई थीं, लेकिन प्रोफेसरों की भारी कमी के चलते विद्यार्थियों की सभी विषयों की कक्षाएं नहीं लग रही हैं। इसके चलते विद्यार्थियों में रोष है। उन्होंने बताया कि वहीं दूसरी तरफ जम्मू विश्वविद्यालय ने तीन महीने पहले ही कैलेंडर के मुताबिक दिसंबर में होने वाली परीक्षाओं तिथि जारी कर दी है।
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उनका आरोप है कि अभी तक पूरे विषयों की कक्षाएं ही शुरू नहीं हो पाई हैं तो विद्यार्थी प्रथम सेमेस्टर की अंतिम परीक्षा कैसे दे पाएंगे। राहुल ठाकुर ने बताया कि इसको लेकर उनकी संस्था पहले ही कॉलेज प्रशासन को अवगत करवा चुकी है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द प्रोफेसरों की नियुक्ति नहीं हुई तो आने वाले दिनों में एबीवीपी सड़क पर उतरकर निदेशक कॉलेज के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करेगी। भूमिका जसरोटिया के कहा कि उच्च शिक्षा विभाग जानबूझकर जम्मू-कश्मीर के डिग्री कॉलेजों में फैकल्टी की भारी कमी पैदा कर रहा है, जिससे विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में पड़ गया है। कॉलेज में प्रोफेसरों की कमी को उजागर करते हुए बताया कि इतिहास विषय में तीन प्रोफेसरों की नियुक्ति के खिलाफ मात्र एक प्रोफेसर उपलब्ध है। जबकि प्राणि शास्त्र के चार प्रोफेसरों के मुकाबले एक ही उपलब्ध हैं। लगभग यही हाल राजनीति और अर्थशास्त्र विषयों का है जहां एक-एक प्रोफेसर से काम चलाया जा रहा है। उनका आरोप है कि यह समस्या सिर्फ कठुआ तक सीमित नहीं है। पिछले वर्ष पूरे जम्मू-कश्मीर में लगभग तीन हजार संविदा लेक्चर की तैनाती की गई। जबकि इस वर्ष केवल 1700 की नियुक्ति करने की विभाग की योजना है। उन्होंने यह भी मांग की है कि उच्च शिक्षा विभाग सभी विषयों के स्थायी प्रोफेसरों की नियुक्ति करे।
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