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जमींदोज होने के कगार पर पहुंचा आखिरी मंदिर
Kathua
Updated Fri, 08 Aug 2014 05:30 AM IST
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महानपुर (ब्यूरो)। कसबे से सटे वनखंडी पर्वत में लगातार हो रहा भूस्खलन दहशत का सबब बन गया है। बिहानी दरिया से सटा वनखंडी पर्वत का बड़ा हिस्सा बीते दिन बारिश के बाद जोरदार आवाज के साथ भरभरा कर दरिया में समा गया था। इसके दूसरे दिन भी स्थानीय ग्रामीणों में दहशत का माहौल रहा।
वनखंडी पर्वत पर स्थित प्राचीन मंदिर की खाई से दूरी अब महज दस फुट तक की रह गई है। वहीं मंदिर के पुजारी का निवास स्थान पांच फुट दूरी पर है जो किसी भी समय पहाड़ के साथ जमींदोज हो सकता है। गुरुवार को स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में बिहानी पुल के नजदीक पहुंचे और दरिया के एक छोर से धंसे पहाड़ को देखते रहे। बिहानी दरिया में पानी का स्तर और बहाव अधिक होने की वजह से ग्रामीण वनखंडी पर्वत के नजदीक नहीं पहुंच पाए। स्थानीय सरपंच सुरजीत सिंह और सरपंच राजिंदर सिंह ने कहा कि बीते वर्ष वनखंडी पर्वत धंसने की वजह से तीन मंदिर दरिया में समा गए थे। अब केवल प्राचीन मंदिर का एक ही ढांचा बचा है जो किसी भी समय भू स्खलन का शिकार हो सकता है। ऐसे में सरकार को मदद के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि माता वनखंडी पर्वत से लोगों की आस्था जुड़ी है लेकिन न तो भू स्खलन को रोकने के लिए कोई व्यवस्था की जा रही है और न ही नए सिरे से मंदिर निर्माण में किसी तरह की सहायता की जा रही है।
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वनखंडी पर्वत पर स्थित प्राचीन मंदिर की खाई से दूरी अब महज दस फुट तक की रह गई है। वहीं मंदिर के पुजारी का निवास स्थान पांच फुट दूरी पर है जो किसी भी समय पहाड़ के साथ जमींदोज हो सकता है। गुरुवार को स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में बिहानी पुल के नजदीक पहुंचे और दरिया के एक छोर से धंसे पहाड़ को देखते रहे। बिहानी दरिया में पानी का स्तर और बहाव अधिक होने की वजह से ग्रामीण वनखंडी पर्वत के नजदीक नहीं पहुंच पाए। स्थानीय सरपंच सुरजीत सिंह और सरपंच राजिंदर सिंह ने कहा कि बीते वर्ष वनखंडी पर्वत धंसने की वजह से तीन मंदिर दरिया में समा गए थे। अब केवल प्राचीन मंदिर का एक ही ढांचा बचा है जो किसी भी समय भू स्खलन का शिकार हो सकता है। ऐसे में सरकार को मदद के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि माता वनखंडी पर्वत से लोगों की आस्था जुड़ी है लेकिन न तो भू स्खलन को रोकने के लिए कोई व्यवस्था की जा रही है और न ही नए सिरे से मंदिर निर्माण में किसी तरह की सहायता की जा रही है।
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