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मुलाजिम दबाव बनाने को तैयार
Kathua
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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कठुआ। लंबित मांगों को लेकर मुलाजिमों ने फिर से विरोध के स्वर मुखर करने की तैयारी कर ली है। इंप्लाई ज्वाइंट कंसलटेटिव कमेटी के बैनर तले मुलाजिमों ने कठुआ जिले में छब्बीस नवंबर को एक दिवसीय हड़ताल का निर्णय लिया है। इस बार जोरदार विरोध दर्ज करने की योजना है।
ईजेसीसी पदाधिकारियों के अनुसार सरकार ने मुलाजिमों के साथ वेतन विसंगतियों समेत अन्य महत्वपूर्ण मांगों को लेकर लिखित में समझौता किया है, जिसे अमल में लाने के लिए सरकार लगातार उदासीनता जता रही है। ईजेसीसी के जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह और महासचिव मोहम्मद सादिक ने बताया कि ईजेसीसी ने सरकार पर फिर से दबाव बनाने के लिए अलग अलग जिला मुख्यालयों के लिए शेड्यूल जारी किया है। जिला स्तर की इकाईयों को अलग अलग तारीखें दी गई हैं। इसके तहत कठुआ जिला इकाई को छब्बीस नवंबर को एक दिवसीय हड़ताल करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की मंशा साफ नहीं लग रही है। ईजेसीसी के शीर्ष नेताओं के साथ सरकारी नुमाइंदों ने बाकायदा बैठक में लिखित समझौता किया जिस पर अमल करने की मियाद भी तय की गई। हैरत की बात है कि सरकार ने लिखित समझौते पर अमल करने के लिए अभी तक कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया है जबकि मियाद खत्म हुए महीनों गुजर गए हैं। ईजेसीसी पदाधिकारियों ने कहा कि मुलाजिम अपने हक हकूक से समझौता नहीं कर सकते। सरकार ने यदि उनकी मांगाें को पूरा करने का समझौते के अनुसार ईमानदारी से प्रयास नहीं किया तो मुलाजिमों को हड़ताल जैसे कदम उठाने को मजबूर होना पड़ेगा।
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ईजेसीसी पदाधिकारियों के अनुसार सरकार ने मुलाजिमों के साथ वेतन विसंगतियों समेत अन्य महत्वपूर्ण मांगों को लेकर लिखित में समझौता किया है, जिसे अमल में लाने के लिए सरकार लगातार उदासीनता जता रही है। ईजेसीसी के जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह और महासचिव मोहम्मद सादिक ने बताया कि ईजेसीसी ने सरकार पर फिर से दबाव बनाने के लिए अलग अलग जिला मुख्यालयों के लिए शेड्यूल जारी किया है। जिला स्तर की इकाईयों को अलग अलग तारीखें दी गई हैं। इसके तहत कठुआ जिला इकाई को छब्बीस नवंबर को एक दिवसीय हड़ताल करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की मंशा साफ नहीं लग रही है। ईजेसीसी के शीर्ष नेताओं के साथ सरकारी नुमाइंदों ने बाकायदा बैठक में लिखित समझौता किया जिस पर अमल करने की मियाद भी तय की गई। हैरत की बात है कि सरकार ने लिखित समझौते पर अमल करने के लिए अभी तक कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया है जबकि मियाद खत्म हुए महीनों गुजर गए हैं। ईजेसीसी पदाधिकारियों ने कहा कि मुलाजिम अपने हक हकूक से समझौता नहीं कर सकते। सरकार ने यदि उनकी मांगाें को पूरा करने का समझौते के अनुसार ईमानदारी से प्रयास नहीं किया तो मुलाजिमों को हड़ताल जैसे कदम उठाने को मजबूर होना पड़ेगा।
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