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Kathua News: सर्दी बढ़ते ही निचले इलाकों की ओर बढ़ने लगा गद्दी-बकरवाल परिवारों का कारवां
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
बिलावर। पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड का असर बढ़ने के साथ ही मौसमी पलायन का सिलसिला शुरू हो गया है। गद्दी, बकरवाल और गुज्जर समुदाय के परिवार अपने माल-मवेशियों के साथ अब पहाड़ों से निचले इलाकों की ओर लौटने लगे हैं। इन दिनों बिलावर उपमंडल से गुजरने वाली विभिन्न सड़कों पर सुबह और शाम के समय मवेशियों के साथ आगे बढ़ते परिवारों के कारवां दिखाई दे रहे हैं।
हर वर्ष की तरह इस बार भी सितंबर माह के अंतिम दिनों में पहाड़ी इलाकों में तापमान गिरने के बाद इन समुदायों ने निचले क्षेत्रों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। परिवार अपने साथ भेड़-बकरियों और अन्य मवेशियों को लेकर पैदल ही लंबा सफर तय कर रहे हैं। यह मौसमी पलायन केवल आवागमन नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही उनकी पारंपरिक जीवनशैली और पशुपालन से जुड़ी व्यवस्था का हिस्सा है। गद्दी समुदाय के बिशन दास, ओम प्रकाश और बिट्टू राम ने बताया कि इस वर्ष सितंबर में ही पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया। इसके चलते उन्होंने समय रहते माल-मवेशियों के साथ निचले इलाकों की ओर निकलना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि बिलावर उपमंडल से होकर पैदल रास्ते से कठुआ पहुंचने में उन्हें अभी करीब एक सप्ताह और लग सकता है।उन्होंने बताया कि सर्दियों के करीब छह महीने निचले इलाकों में बिताने के बाद मौसम अनुकूल होने पर वह दोबारा पहाड़ी क्षेत्रों की ओर लौटते हैं। उनके अनुसार, इस बार भी सर्दियों के बाद बनी तहसील के सरथल क्षेत्र की ओर जाने की तैयारी रहेगी, जहां अगले चरण में माल-मवेशियों के साथ समय बिताया जाएगा।
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बिलावर। पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड का असर बढ़ने के साथ ही मौसमी पलायन का सिलसिला शुरू हो गया है। गद्दी, बकरवाल और गुज्जर समुदाय के परिवार अपने माल-मवेशियों के साथ अब पहाड़ों से निचले इलाकों की ओर लौटने लगे हैं। इन दिनों बिलावर उपमंडल से गुजरने वाली विभिन्न सड़कों पर सुबह और शाम के समय मवेशियों के साथ आगे बढ़ते परिवारों के कारवां दिखाई दे रहे हैं।
हर वर्ष की तरह इस बार भी सितंबर माह के अंतिम दिनों में पहाड़ी इलाकों में तापमान गिरने के बाद इन समुदायों ने निचले क्षेत्रों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। परिवार अपने साथ भेड़-बकरियों और अन्य मवेशियों को लेकर पैदल ही लंबा सफर तय कर रहे हैं। यह मौसमी पलायन केवल आवागमन नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही उनकी पारंपरिक जीवनशैली और पशुपालन से जुड़ी व्यवस्था का हिस्सा है। गद्दी समुदाय के बिशन दास, ओम प्रकाश और बिट्टू राम ने बताया कि इस वर्ष सितंबर में ही पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया। इसके चलते उन्होंने समय रहते माल-मवेशियों के साथ निचले इलाकों की ओर निकलना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि बिलावर उपमंडल से होकर पैदल रास्ते से कठुआ पहुंचने में उन्हें अभी करीब एक सप्ताह और लग सकता है।उन्होंने बताया कि सर्दियों के करीब छह महीने निचले इलाकों में बिताने के बाद मौसम अनुकूल होने पर वह दोबारा पहाड़ी क्षेत्रों की ओर लौटते हैं। उनके अनुसार, इस बार भी सर्दियों के बाद बनी तहसील के सरथल क्षेत्र की ओर जाने की तैयारी रहेगी, जहां अगले चरण में माल-मवेशियों के साथ समय बिताया जाएगा।
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