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पहली बारिश के बाद पहाड़ों ने ओढ़ी धूंध की चादर, बर्फबारी से बचने की बढ़ी चिंता
Kathua
Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
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कठुआ/बनी। जिले के दूरदराज के पहाड़ी इलाके रविवार को जाड़े की चपेट में चले गए। मौसम के करवट बदलने बदलने के साथ बादल भी बरसने को मजबूर हो गए। इसके साथ ही सर्दियों की औपचारिक शुरूआत भी हो गई।
मौसम की पहली बारिश ने रविवार को लोगों को गर्म कपड़ों की खरीददारी करने के लिए मजबूर कर दिया। बनी और आसपास के इलाकों में दिनभर रूक-रूक कर बारिश हुई। इससे लोगों को सर्दी की दस्तक का भी बखूबी एहसास हो गया। दिनभर बादलों की लुकाछिपी भी जारी रही। पहाड़ी इलाकों में हुई बारिश से निचले इलाकों में भी सर्दी महसूस होने लगी है। बारिश के बाद जिले के पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी की संभावना भी बढ़ गई है। हालांकि प्रशासन ने पहले से सर्दियों की तैयारियों को लेकर कमर कस ली है, वहीं ग्रामीण भी अपने स्तर से प्रयास करने में जुट गए हैं। बर्फबारी होने की संभावना से क्षेत्रवासियों की चिंता भी बढ़ गई है।
उल्लेखनीय है कि बनी और मल्हार के अधिकतर हिस्से बर्फबारी के बाद जिले से कटे रहते हैं। कई बार तो इन इलाकों का संपर्क लंबे समय तक कटा रहता है। इसी वर्ष की शुरूआत में महानपुर और कंडी इलाकों में भी बर्फबारी दर्ज की गई थी, जिसके चलते इन इलाकों के ग्रामीणों ने सर्दी से बचने की तैयारियां शुरू कर दी है। जिले के पहाड़ी इलाकों के व्यापारियों ने मौसम की करवट को भांपते हुए अभी से चीजों का भंडारण करना शुरू कर दिया है। इन इलाकों के लोग अपने आसपास के गांव की दुकानों पर ही सर्दियों में निर्भर रहते हैं। वहीं चिकित्सा सुविधा को लेकर भी इन इलाकों के लोगों को नीम हकीमों के सहारे रहना पड़ता है।
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मौसम की पहली बारिश ने रविवार को लोगों को गर्म कपड़ों की खरीददारी करने के लिए मजबूर कर दिया। बनी और आसपास के इलाकों में दिनभर रूक-रूक कर बारिश हुई। इससे लोगों को सर्दी की दस्तक का भी बखूबी एहसास हो गया। दिनभर बादलों की लुकाछिपी भी जारी रही। पहाड़ी इलाकों में हुई बारिश से निचले इलाकों में भी सर्दी महसूस होने लगी है। बारिश के बाद जिले के पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी की संभावना भी बढ़ गई है। हालांकि प्रशासन ने पहले से सर्दियों की तैयारियों को लेकर कमर कस ली है, वहीं ग्रामीण भी अपने स्तर से प्रयास करने में जुट गए हैं। बर्फबारी होने की संभावना से क्षेत्रवासियों की चिंता भी बढ़ गई है।
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उल्लेखनीय है कि बनी और मल्हार के अधिकतर हिस्से बर्फबारी के बाद जिले से कटे रहते हैं। कई बार तो इन इलाकों का संपर्क लंबे समय तक कटा रहता है। इसी वर्ष की शुरूआत में महानपुर और कंडी इलाकों में भी बर्फबारी दर्ज की गई थी, जिसके चलते इन इलाकों के ग्रामीणों ने सर्दी से बचने की तैयारियां शुरू कर दी है। जिले के पहाड़ी इलाकों के व्यापारियों ने मौसम की करवट को भांपते हुए अभी से चीजों का भंडारण करना शुरू कर दिया है। इन इलाकों के लोग अपने आसपास के गांव की दुकानों पर ही सर्दियों में निर्भर रहते हैं। वहीं चिकित्सा सुविधा को लेकर भी इन इलाकों के लोगों को नीम हकीमों के सहारे रहना पड़ता है।
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