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जिंदगी जलता हुआ दीप ही तो है...
Kathua
Updated Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
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कठुआ। रोशनी के त्योहार दीपावली के उत्साह और उमंगों को मुशायरे की महफिल में खुलकर ब्यां किया गया। किसी ने कलाम पढ़ते हुए दीवाली का स्वागत किया, तो किसी ने त्योहार के बीच वियोग की भावना को अल्फाज दिए।
सबरस साहित्य संगम कठुआ द्वारा दीपावली के अवसर पर आयोजित बहुभाषीय मुशायरे में हिंदी, उर्दू और डोगरी भाषाओं में रचनाएं प्रस्तुत की गईं। मुशायरे का आयोजन संस्था अध्यक्ष मनोहर सिंह की अध्यक्षता में किया गया। अध्यक्षता करते हुए मनोहर सिंह ने दीपावली के उत्साह को व्यक्त किया। ए दिलबर, दिलनवाज मेरे ए दिलनशीं दिलदार, देख हसरतें लेकर आया दीवाली का त्योहार से वाहवाही लूटी। इसी तरह से टी आर सुंबड़िया ने दीप जलाएं कैसे मिलकर, अपनों ने मिलना छोड़ दिया, पल दो पल इस दिल से खेले, पल दो पल में तोड़ दिया से दाद बटोरी।
खजूरिया सिंह ठाकुर ने डोगरी की पंक्ति मैं अर्ज करों अत्थ जोड़ी, प्रभू आओ सिंहासन छोड़ी से करूणा का भाव जगाया। धर्मवीर ने जिंदगी जलता हआ दी ही तो है, दुनिया जिसे कहती है दूर वो नसीब ही तो है प्रस्तुत की। दीपावली की जगमगाती रात का जिक्र छेड़ते हुए डा. गुरू प्रसाद शर्मा ने कहा कि दीपों की जगमग जब पावन रात आती है, सब भूल जाता हूं, बस तेरी याद आती है। रेणू पाधा की पंक्ति के मनातियां दयालियां मड़ो के मनातियां दयालियां, सोम अकेला की पंक्ति बड़ी मुद्दत के बाद तेरा पैगाम आया है, डी के लक्की की पंक्ति जीवन में कहां खुशहाली है, बेशक दीवाली है और कुंती कुमार ने देखना अपने घर को रौशन, जो बुझे चिराग जलाएगा से समां बांध दिया।
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सबरस साहित्य संगम कठुआ द्वारा दीपावली के अवसर पर आयोजित बहुभाषीय मुशायरे में हिंदी, उर्दू और डोगरी भाषाओं में रचनाएं प्रस्तुत की गईं। मुशायरे का आयोजन संस्था अध्यक्ष मनोहर सिंह की अध्यक्षता में किया गया। अध्यक्षता करते हुए मनोहर सिंह ने दीपावली के उत्साह को व्यक्त किया। ए दिलबर, दिलनवाज मेरे ए दिलनशीं दिलदार, देख हसरतें लेकर आया दीवाली का त्योहार से वाहवाही लूटी। इसी तरह से टी आर सुंबड़िया ने दीप जलाएं कैसे मिलकर, अपनों ने मिलना छोड़ दिया, पल दो पल इस दिल से खेले, पल दो पल में तोड़ दिया से दाद बटोरी।
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खजूरिया सिंह ठाकुर ने डोगरी की पंक्ति मैं अर्ज करों अत्थ जोड़ी, प्रभू आओ सिंहासन छोड़ी से करूणा का भाव जगाया। धर्मवीर ने जिंदगी जलता हआ दी ही तो है, दुनिया जिसे कहती है दूर वो नसीब ही तो है प्रस्तुत की। दीपावली की जगमगाती रात का जिक्र छेड़ते हुए डा. गुरू प्रसाद शर्मा ने कहा कि दीपों की जगमग जब पावन रात आती है, सब भूल जाता हूं, बस तेरी याद आती है। रेणू पाधा की पंक्ति के मनातियां दयालियां मड़ो के मनातियां दयालियां, सोम अकेला की पंक्ति बड़ी मुद्दत के बाद तेरा पैगाम आया है, डी के लक्की की पंक्ति जीवन में कहां खुशहाली है, बेशक दीवाली है और कुंती कुमार ने देखना अपने घर को रौशन, जो बुझे चिराग जलाएगा से समां बांध दिया।
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