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साल भर चलता रहा हड़ताल का सिलसिला
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कठुआ। जिले में वर्ष 2018 कर्मचारी वर्ग के लिए हड़ताल का वर्ष रहा। विभिन्न मांगों के लिए विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने साल भर में हड़ताल की। कुछ विभागों के कर्मचारियों की कुछ मांगें पूरी हुईं, लेकिन ज्यादातर कर्मचारियों की मांगों पर सरकार ने ध्यान ही नहीं दिया। सरकार खामोश रहने की रणनीति पर चली, हालांकि इसने कर्मचारियों को नाराज ही करने का काम किया। अब नए साल में कर्मचारी अपने आंदोलन के लिए नई रणनीति बना सकते हैं, ताकि वे सरकार पर लंबित मांगों को लेकर दबाव बना सकें।
साल की शुरुआत नेशनल हेल्थ मिशन के कर्मचारियों की हड़ताल के साथ हुई। दिसंबर महीने के पहले सप्ताह में शुरू की गई हड़ताल जनवरी महीने में भी जारी रही। कर्मचारियों ने डाक्टरों के जितना वेतन देने और अन्य मांगों को लेकर हड़ताल की। करीब दो महीने तक चली यह हड़ताल मांगें पूरी करने के आश्वासन के बाद खत्म हो गई। फरवरी महीने में पटवार एसोसिएशन ने भी अपनी चार दिवसीय हड़ताल की। उन्होंने नायब तहसीलदार की सीधी भर्ती बंद करने के साथ अन्य मांगों के लिए हड़ताल की। आशा वर्कर्स ने भी कुछ दिनों के लिए हड़ताल की और तहसील मुख्यालयों पर धरना दिया। वेतन विसंगतियों और स्थायी करने की मांग पर उन्होंने हड़ताल की। मार्च महीने में ठेकेदारों ने हड़ताल की ओर लोक निर्माण विभाग के कामकाज को करीब बाइस दिनों के लिए प्रभावित किया। बकाया राशि की मांग और सरकार द्वारा पैसे जारी न किए जाने के विरोध में उन्होंने हड़ताल के दौरान विभाग के दफ्तर में तालाबंदी भी की।
अप्रैल महीने में आंगनबाड़ी वर्कर्स ने बकाया वेतन और स्थायी करने की मांग पर हड़ताल शुरू की जो करीब चार महीनों तक जारी रही। हर दिन ड्रीम लैंड पार्क में उन्होंने धरना दिया और इस दौरान उन्होंने कई बार मंत्रियों का रास्ता भी रोका और जम्मू जाकर भी अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन किया। आश्वासन मिलने पर उन्होंने भी हड़ताल समाप्त किया। मई महीने में एक बार फिर पटवार एसोसिएशन ने हड़ताल की और अपनी पुरानी मांगों को पूरा करने के लिए मांग की। इसके बाद जून और जुलाई महीने में पीडीडी कर्मचारियों ने समय-समय पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। नीड बेस्ड कर्मचारियों के साथ ही दिहाड़ीदारों ने वेतन विसंगतियों को दूर करने और स्थायी करने की मांग की। अगस्त महीने में शिक्षक वर्ग की समस्याओं के लिए विभिन्न शिक्षक संगठनों ने समय समय पर प्रदर्शन किए। फीमेल मल्टी पर्पज हेल्थ वर्कर्स ने भी अपनी मांगों के लिए धरना प्रदर्शन किया और हड़ताल की। सीएमओ कार्यालय के बाहर उन्होंने करीब दो महीने तक अपनी मांगों के लिए हड़ताल की। आश्वासन के बाद उन्होंने अपनी हड़ताल वापस ली। सितंबर महीने में पीएचई सीपी वर्कर्स ने अपनी मांगों के लिए हड़ताल शुरू की जो अब भी जारी है। हालांकि करीब तीन महीने से ज्यादा वक्त बीत जाने के बाद भी उनको 53 महीने का बकाया वेतन नहीं मिला है।
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साल की शुरुआत नेशनल हेल्थ मिशन के कर्मचारियों की हड़ताल के साथ हुई। दिसंबर महीने के पहले सप्ताह में शुरू की गई हड़ताल जनवरी महीने में भी जारी रही। कर्मचारियों ने डाक्टरों के जितना वेतन देने और अन्य मांगों को लेकर हड़ताल की। करीब दो महीने तक चली यह हड़ताल मांगें पूरी करने के आश्वासन के बाद खत्म हो गई। फरवरी महीने में पटवार एसोसिएशन ने भी अपनी चार दिवसीय हड़ताल की। उन्होंने नायब तहसीलदार की सीधी भर्ती बंद करने के साथ अन्य मांगों के लिए हड़ताल की। आशा वर्कर्स ने भी कुछ दिनों के लिए हड़ताल की और तहसील मुख्यालयों पर धरना दिया। वेतन विसंगतियों और स्थायी करने की मांग पर उन्होंने हड़ताल की। मार्च महीने में ठेकेदारों ने हड़ताल की ओर लोक निर्माण विभाग के कामकाज को करीब बाइस दिनों के लिए प्रभावित किया। बकाया राशि की मांग और सरकार द्वारा पैसे जारी न किए जाने के विरोध में उन्होंने हड़ताल के दौरान विभाग के दफ्तर में तालाबंदी भी की।
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अप्रैल महीने में आंगनबाड़ी वर्कर्स ने बकाया वेतन और स्थायी करने की मांग पर हड़ताल शुरू की जो करीब चार महीनों तक जारी रही। हर दिन ड्रीम लैंड पार्क में उन्होंने धरना दिया और इस दौरान उन्होंने कई बार मंत्रियों का रास्ता भी रोका और जम्मू जाकर भी अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन किया। आश्वासन मिलने पर उन्होंने भी हड़ताल समाप्त किया। मई महीने में एक बार फिर पटवार एसोसिएशन ने हड़ताल की और अपनी पुरानी मांगों को पूरा करने के लिए मांग की। इसके बाद जून और जुलाई महीने में पीडीडी कर्मचारियों ने समय-समय पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। नीड बेस्ड कर्मचारियों के साथ ही दिहाड़ीदारों ने वेतन विसंगतियों को दूर करने और स्थायी करने की मांग की। अगस्त महीने में शिक्षक वर्ग की समस्याओं के लिए विभिन्न शिक्षक संगठनों ने समय समय पर प्रदर्शन किए। फीमेल मल्टी पर्पज हेल्थ वर्कर्स ने भी अपनी मांगों के लिए धरना प्रदर्शन किया और हड़ताल की। सीएमओ कार्यालय के बाहर उन्होंने करीब दो महीने तक अपनी मांगों के लिए हड़ताल की। आश्वासन के बाद उन्होंने अपनी हड़ताल वापस ली। सितंबर महीने में पीएचई सीपी वर्कर्स ने अपनी मांगों के लिए हड़ताल शुरू की जो अब भी जारी है। हालांकि करीब तीन महीने से ज्यादा वक्त बीत जाने के बाद भी उनको 53 महीने का बकाया वेतन नहीं मिला है।
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