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ईद उल मिलाद पर अमन की दुआ की
Updated Thu, 22 Nov 2018 01:23 AM IST
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कठुआ। बुधवार को पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्मोत्सव पर ईद मिलाद उन नबी का पर्व जिले भर में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर शहर में धार्मिक जुलूस निकाला गया, जो विभिन्न इलाकों से होता हुआ ईदगाह में पहुंच कर संपन्न हुआ। जुलूस में हजारों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल रहे। ईदगाह की मस्जिद में देश में अमन और भाईचारे की दुआ की गई। ईद मिलाद उल नबी को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए थे।
ईद-उल-मिलाद पर्व पर निकाले गए जुलूस में शामिल लोगों ने मोहम्मद साहब के जन्मदिन पर उनके दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। इस बीच जहां से भी जुलूस गुजरा वहां धार्मिक नारे लगाए गए। इस मौके पर अमन और भाईचारे के लिए दुआ की गई।
जुलूस के लिए सबसे पहले लोग शहीद भगत सिंह सिटी फारेस्ट पार्क में एकत्रित हुए। इसके बाद लोगों ने नबी को याद करते हुए कॉलेज मार्ग से शहीदी चौक, कैप्टन सुनील चौधरी चौक, अंबेडकर पुल और पुराने बस अड्डे से होते हुए जुलूस निकाला। यह जुलूस मस्जिद में पहुंचकर संपन्न हुआ।
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लोगों ने बताया कि मुस्लिम समुदाय के लोग इस दिन पैगंबर का जन्मदिन मनाते हैं और उनके संदेश के बारे में सबको बताया जाता है। जुलूस निकालने का मकसद नबी को याद करने के साथ लोगों में आपसी भाईचारे को बढ़ाने और शांति का संदेश देना भी है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से मानव जाति से इंसानियत और भाईचारा खत्म हो रहा है, उससे मानव जाति को खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में नबी की बातों को याद करते हुए सभी लोगों को धर्म का सम्मान करना चाहिए और प्यार मोहब्बत से रहना चाहिए।
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ईद-उल-मिलाद पर्व पर निकाले गए जुलूस में शामिल लोगों ने मोहम्मद साहब के जन्मदिन पर उनके दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। इस बीच जहां से भी जुलूस गुजरा वहां धार्मिक नारे लगाए गए। इस मौके पर अमन और भाईचारे के लिए दुआ की गई।
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जुलूस के लिए सबसे पहले लोग शहीद भगत सिंह सिटी फारेस्ट पार्क में एकत्रित हुए। इसके बाद लोगों ने नबी को याद करते हुए कॉलेज मार्ग से शहीदी चौक, कैप्टन सुनील चौधरी चौक, अंबेडकर पुल और पुराने बस अड्डे से होते हुए जुलूस निकाला। यह जुलूस मस्जिद में पहुंचकर संपन्न हुआ।
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लोगों ने बताया कि मुस्लिम समुदाय के लोग इस दिन पैगंबर का जन्मदिन मनाते हैं और उनके संदेश के बारे में सबको बताया जाता है। जुलूस निकालने का मकसद नबी को याद करने के साथ लोगों में आपसी भाईचारे को बढ़ाने और शांति का संदेश देना भी है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से मानव जाति से इंसानियत और भाईचारा खत्म हो रहा है, उससे मानव जाति को खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में नबी की बातों को याद करते हुए सभी लोगों को धर्म का सम्मान करना चाहिए और प्यार मोहब्बत से रहना चाहिए।