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Kathua News: चंगी की 15 महिलाएं मेहनत से लिख रहीं तकदीर

Tue, 07 Oct 2025 03:00 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ Updated Tue, 07 Oct 2025 03:00 AM IST
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15 women of Changi village are writing their destiny with hard work
स्वयं सहायता समूह वृंदा की सदस्य मसाले तैयार करते हुए । स्रोत : जागरूक पाठक
हर माह तैयार कर रही 450 किलो हल्दी, विभाग को 250 रुपये प्रति किलो की दर से बेचकर कमा रहीं मुनाफा
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कठुआ। भारत पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे गांव चंगी की 15 महिलाएं मेहनत से अपनी तकदीर लिख रही हैं। गोलाबारी से अक्सर प्रभावित रहने वाले इन इलाकों में महिलाओं ने स्वरोजगार की राह पकड़कर परिवार की जिम्मेदारी भी खुद संभाली है।
आत्मनिर्भरता से ग्रामीण क्षेत्र की 15 महिलाएं हर माह लगभग 450 किलो हल्दी तैयार कर रही हैं। विभाग को 250 रुपये प्रति किलो की दर से बेचकर प्रति महिला 7500 का मासिक आय अर्जित कर रही हैं। इसमें उनकी उत्पादन लागत मात्र 1500 से 2000 तक होती है। उन्होंने बताया कि उनके समूह के साथ जुड़ने वाली महिलाओं में कई महिलाएं ऐसी हैं जो ज्यादा शिक्षित न होने के कारण कोई अन्य काम भी नहीं कर पाती थी। मगर सरकारी स्तर से मिले मार्गदर्शन न केवल आर्थिक रूप से उन्हें सशक्त बना रही हैं बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नई उड़ान दे रही हैं।हीरानगर सब डिवीजन के चंगी गांव में वृंदा महिला स्वयं सहायता समूह के सदस्यों ने कृषि उत्पादन विभाग की सहायता से कृषि विभाग के कठुआ खेती ब्रांड के अधीन वे अपनी खेती, उत्पादन और प्रसंस्कृत हल्दी को बाजार तक पहुंचा रही हैं। साथ ही धनिया और लाल मिर्च का भी उत्पादन कर रही हैं।
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समूह की अध्यक्ष वीणा देवी ने बताया कि रोजगार की राह में उन्होंने बताया कि राह इतनी आसान नहीं थी। कृषि विभाग से मिले प्रशिक्षण ने न केवल उन्हें नई दिशा दिखाई है, बल्कि खेत से बाजार तक का सफर पूरा करने के लिए इन महिलाओं को विभाग ने प्रशिक्षण भी प्रदान किया है, जिससे वे उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन की तकनीकों में दक्ष हुईं। अब ये महिलाएं न केवल अपने घर का सहयोग कर रही हैं बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन रही हैं।
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कोट

कृषि विभाग का ''कठुआ खेती'' ब्रांड इस तरह के कामों में महिलाओं की मदद कर रहा है। इससे महिला सशक्तिकरण की चमकती मिसाल कठुआ खेती आज एक ब्रांड से कहीं अधिक महिला आत्मनिर्भरता और ग्रामीण विकास का प्रतीक बन चुका है। वृंदा महिला समूह की सफलता दिखाती है कि यदि अवसर और सहयोग मिले तो महिलाएं हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू सकती हैं।

पूजा अंदोत्रा, नोडल अधिकारी
महिला सहायता ग्रुप कृषि विभाग
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