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जम्मू-कश्मीर: कोविड प्रभावित बच्चों की देखभाल के लिए जिलास्तर पर बनेगी टॉस्क फोर्स
Tue, 08 Jun 2021 08:15 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Tue, 08 Jun 2021 08:15 PM IST
सार
परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य को खोने वाले परिवारों की भी करेगी शिनाख्त। उपायुक्तों के पास होगी बैठक कराने की जिम्मेदारी, 15 दिन में सरकार को देंगे रिपोर्ट।
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lockdown in Jammu Kashmir
- फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर में कोरोना के कारण माता या पिता या दोनों को खोने वाले बच्चों की देखभाल और सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने के लिए जिला स्तर पर टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। टास्क फोर्स ऐसे बच्चों को चिन्हित कर उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाएगी। टास्क फोर्स उन परिवारों की भी शिनाख्त करेगी जिनके परिवार का एक मात्र कमाने वाले सदस्य का कोरोना महामारी में निधन हो गया।
प्रदेश सरकार ने ऐसे बच्चों के लिए छात्रवृत्ति और परिवारों के लिए पेंशन की घोषणा की है। इन बच्चों के संबंध में सभी जानकारी बाल कल्याण कमेटी के समक्ष पेश की जाएगी। यह कमेटी उनके पुनर्वास और अन्य भविष्य कल्याण संबंधी मुद्दों पर फैसला लेगी। ऐसे बच्चों की मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग भी की जाएगी।
इस काउंसलिंग में कोविड प्रभावित बच्चे के अलावा उनके अभिभावक भी शामिल होंगे। जिला स्तर पर इन बच्चों को पंजीकृत किया जाएगा। उपायुक्तों के पास इस बात की जिम्मेदारी होगी कि वह टास्क फोर्स की बैठक करवा कर प्रत्येक 15 दिन बाद सरकार को स्टेट्स रिपोर्ट भी सौंपे।
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यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर में कोरोना: अब कोरोना पीड़ितों को भी ठगी का शिकार बना रहे जालसाज
जिला मजिस्ट्रेट होंगे चेयरमैन
इस टास्क फोर्स में जिला मजिस्ट्रेट को चेयरमैन बनाने के अलावा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, अतिरिक्त एसपी, जिला समाज कल्याण अधिकारी सदस्य जिला बाल सुरक्षा अधिकारी सदस्य सचिव, चेयरपर्सन बाल कल्याण कमेटी या कमेटी का अन्य कोई सदस्य और जिला मजिस्ट्रेट की ओर से बाल देखभाल संस्थान को चलाने वाले किसी एनजीओ को सदस्य के तौर पर नामित किया जाएगा।
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प्रदेश सरकार ने ऐसे बच्चों के लिए छात्रवृत्ति और परिवारों के लिए पेंशन की घोषणा की है। इन बच्चों के संबंध में सभी जानकारी बाल कल्याण कमेटी के समक्ष पेश की जाएगी। यह कमेटी उनके पुनर्वास और अन्य भविष्य कल्याण संबंधी मुद्दों पर फैसला लेगी। ऐसे बच्चों की मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग भी की जाएगी।
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इस काउंसलिंग में कोविड प्रभावित बच्चे के अलावा उनके अभिभावक भी शामिल होंगे। जिला स्तर पर इन बच्चों को पंजीकृत किया जाएगा। उपायुक्तों के पास इस बात की जिम्मेदारी होगी कि वह टास्क फोर्स की बैठक करवा कर प्रत्येक 15 दिन बाद सरकार को स्टेट्स रिपोर्ट भी सौंपे।
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जिला मजिस्ट्रेट होंगे चेयरमैन
इस टास्क फोर्स में जिला मजिस्ट्रेट को चेयरमैन बनाने के अलावा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, अतिरिक्त एसपी, जिला समाज कल्याण अधिकारी सदस्य जिला बाल सुरक्षा अधिकारी सदस्य सचिव, चेयरपर्सन बाल कल्याण कमेटी या कमेटी का अन्य कोई सदस्य और जिला मजिस्ट्रेट की ओर से बाल देखभाल संस्थान को चलाने वाले किसी एनजीओ को सदस्य के तौर पर नामित किया जाएगा।