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जम्मू-कश्मीर: महबूबा के करीबी पारा की जमानत रद्द करने के खिलाफ सरकार से मांगा जवाब

Thu, 30 Sep 2021 01:16 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Thu, 30 Sep 2021 01:16 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने तीस दिन के अंदर सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के करीबी माने जाने वाले पारा की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।

 

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Jammu and Kashmir: Seek response from government against cancellation of bail of Para, a close member to Mehbooba
एनआईए - फोटो : file photo

विस्तार

जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने सरकार को नोटिस जारी कर पीडीपी के युवा नेता वहीद उर रहमान पारा द्वारा जमानत अर्जी खारिज किए जाने के खिलाफ दायर माफी याचिका में देरी पर 30 दिनों के अंदर जवाब दाखिल करने को कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 29 अक्तूबर को होगी। मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायमूर्ति विनोद चटर्जी कौल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि एनआईए अधिनियम के तहत जमानत आवेदन की अस्वीकृति के खिलाफ एक अपील क जा सकती है। यह 33 दिनों की देरी से की गई है।

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अदालत ने वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता बीए डार से एक माह के भीतर सरकार का पक्ष पेश करने के लिए कहा है। पारा ने एनआईए अदालत द्वारा 20 जुलाई 2021 को जमानत के लिए उसकी याचिका को खारिज करने के फैसले को रद्द करने के लिए निर्देश मांगा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के करीबी माने जाने वाले पारा की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।
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अदालत ने 33 वर्षीय पारा के खिलाफ प्रथम दृष्टया आतंकवाद के आरोपों को जमानत से इनकार करने का कारण बताया था। अदालत ने पहले पारा के खिलाफ पुलिस चार्जशीट के आधार पर आतंकवाद के आरोप तय किए थे, जिसमें दावा किया गया था कि वह पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों के लिए जम्म-कश्मीर में बहुउपयोगी खिलाड़ी था। वर्ष 2007 से एक पत्रकार के रूप में शुरू हुई उसकी सार्वजनिक जीवन की यात्रा, राजनेता के रूप धोखाधड़ी, छल और दोहरे व्यवहार की 13 साल की गाथा  थी।
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यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: जीएमसी में अनुबंध पैरा मेडिकल कर्मियों का प्रदर्शन, देर रात तक अस्पताल परिसर में नारेबाजी

एनआईए ने इस साल मार्च में जम्मू-कश्मीर पुलिस के दागी अधिकारी दविंदर सिंह और हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों के बीच कथित साठगांठ के मामले में उसके खिलाफ एक पूरक आरोप पत्र अदालत में दायर किया था। इसमें दावा किया गया था कि जांच से पता चला है कि आरोपी पारा हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों के लिए धन जुटाने और स्थानांतरित करने की साजिश का हिस्सा था और जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक-अलगाववादी-आतंकवादी गठजोड़ को बनाए रखने में भी एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी था।

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