{"_id":"60d5cb61c613925762064735","slug":"jammu-and-kashmir-education-department-know-how-government-teachers-are-making-parents-aware-of-education","type":"story","status":"publish","title_hn":"जम्मू-कश्मीर शिक्षा विभाग: जानिए किस तरह से शिक्षा के प्रति अभिभावकों को जागरूक कर रहे हैं सरकारी शिक्षक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जम्मू-कश्मीर शिक्षा विभाग: जानिए किस तरह से शिक्षा के प्रति अभिभावकों को जागरूक कर रहे हैं सरकारी शिक्षक
Fri, 25 Jun 2021 05:56 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Fri, 25 Jun 2021 05:56 PM IST
सार
क्षेत्र में कैंप लगाकर और घर-घर जाकर चलाया जा रहा अभियान।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सरकारी स्कूल का एक शिक्षक न सिर्फ बच्चों को पढ़ाने, बल्कि समाज में शिक्षा का अलख जागने का काम कर रहा है। हाई स्कूल कटाल बाटल नगरोटा में तैनात शिक्षक सदाकत अली समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता फैला रहे हैं। उन्होंने अपने क्षेत्र में डोर टू डोर अभियान और कैंप लगाकर लोगों को शिक्षा के लिए प्रेरित करने का काम शुरू किया है।
विज्ञापन
सदाकत अली उन समुदाय के लोगों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनमें शिक्षा का स्तर काफी खराब है। ऐसे समुदायों में बच्चों का पढ़ाई के प्रति रुझान कम है। गरीबी और जानकारी के अभाव में अभिभावक बच्चों को बचपन से कृषि, पशुपालन सहित अन्य कार्यों में लगा देते है। फिर ये बच्चे कभी स्कूल नहीं पहुंच पाते।
विज्ञापन
सदाकत अली ने कहा कि वह अभिभावकों को शिक्षा के प्रति जागरूक करते हैं। इसके लिए घर-घर जाने के साथ-साथ विशेष कैंप भी लगाए जाते है, जहां पर बच्चों के अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के बारे में बताया जाता है। अभिभावकों से कहा जाता है कि अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में करवाएं। दंसाल जोन में जनजाति, देहाती खानाबद सहित अन्य समुदाय के बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें- अवाम के साथ सेना: दिव्यांगों के लिए आयोजित कार्यशाला का समापन, दिए गए ये उपकरण
उन्होंने कहा कि पहले से जानकारी का अभाव और ऊपर से लॉकडाउन के कारण बहुत से अभिभावक बच्चों का दाखिला स्कूल में नहीं करा पा रहे हैं। ऐसे में बच्चों को दाखिला देने और अभिभावकों को प्रेरित करने के लिए घर-घर पहुंचकर उन्हें जागरूक करने के साथ हर संभव मदद दी जा रही है। सदाकत ने बताया कि उन्हें अब तक अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है, और वह 100 से अधिक लोगों तक पहुंच पाए हैं।