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निरंतर जारी है एड्स पाजिटिव मामलों का आना
Updated Fri, 01 Dec 2017 12:54 AM IST
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कठुआ।
जिला में इस वर्ष एड्स के मरीजों की संख्या में पिछले वर्ष के मुकाबले थोड़ी कमी आई है, लेकिन अभी तक यह वित्त वर्ष समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में आने वाले चार महीनों में मरीजों की संख्या में और इजाफा होगा। इस वर्ष अप्रैल से नवंबर तक 13 पाजिटिव मरीज आए हैं। यानी हर महीने दो पाजिटिव मरीज आते हैं। इस हिसाब से मार्च के अंत तक यह आंकड़ा बीस मरीजों की संख्या को पार कर सकता है। यह पिछले वर्ष के आंकडे़ (23 मरीज) में बस तीन मरीज ही कम होगा।
एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्र कठुआ से प्राप्त आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2014 के बाद निरंतर संख्या में मरीजों का आना जारी है। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों का आना ध्यान देने वाली बात यह है कि जहां बनी, लोहाई मल्हार, बसोहली आदि इलाकों के लोग पल्लेदारी का काम करने के लिए बाहरी राज्यों में जाते हैं, वहां एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या कम है, जबकि, अशिक्षित लोग भी यही अधिक हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि कुल एचआईवी मरीजों में से एक बड़ा हिस्सा हीरानगर ब्लॉक के मरीजों का है। जिला कठुआ के आईसीटीसी सेंटर में मरीजों की जांच कर एचआईवी पॉजिटिव होने का पता लगाया जा सकता है। इसके साथ दवा भी नि:शुल्क यही से मिलती है। लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं होता। दरअसल, जम्मू कश्मीर स्टेट एड्स प्रिवेंशन और कंट्रोल सोसाइटी तो बनाई गई है, लेकिन कठुआ जिले में पिछले चार सालों में जागरूकता गतिविधियों को अंजाम नहीं दिया गया है। आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य मंत्रालय ने जागरूकता कार्यक्रमों के लिए दिए जाने वाली सहयोग राशि को भी देना बंद कर दिया है। ऐसे में विभाग की पहुंच आम लोगों से दूर होती जा रही है। समाज में खुले तौर पर एड्स के बारे में बात करना आज भी आम लोग शर्म की बात महसूस करते हैं। जरूरत पड़ने पर ही आईसीटीसी सेंटर पहुंचते हैं। एड्स दिवस पर जरूरत है एक बार फिर सरकारी तंत्र को सक्रिय कर आम लोगों तक पहुंचाया जाए, ताकि ऐसे मामलों से निपटा जा सके।
एचआईवी पाजिटिव पाए गए लोगों के आंकड़े
वर्ष पाजिटिव मामले
2007-08 16
2008-09 42
2009-10 39
2010-11 15
2011-12 26
2012-12 17
2013-14 28
2014-15 11
2015-16 09
2016-17 23
2017-18 13
कुल 239
बाक्स
इस वर्ष 2103 मामलों की जांच
इस वर्ष विभाग ने अब तक 2103 मामलों की जांच की है। इसमें 653 पुरुष, 298 महिलाएं और 1152 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इन मामलों में 13 मामले पाजिटिव पाए गए। इसमें सात पुरुष, चार महिलाएं और दो गर्भवती महिलाएं शामिल हैं।
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वर्ष 2007-08 से अब तक कुल 33,134 मामलों की जांच की गई
वर्ष 2007-08 से अब तक कुल 33,134 मामलों की जांच की गई। इनमें 10,155 पुरुषों, 3827 महिलाओं के साथ ही 19,160 गर्भवती महिलाएं शामिल थे। इन सभी मामलों की जांच के बाद 107 पुरुष, 84 महिलाएं, 25 गर्भवती महिलाएं एचआईवी पाजिटिव पाए गए, जबकि 23 बच्चे भी इसमें शामिल हैं।
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जिला में इस वर्ष एड्स के मरीजों की संख्या में पिछले वर्ष के मुकाबले थोड़ी कमी आई है, लेकिन अभी तक यह वित्त वर्ष समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में आने वाले चार महीनों में मरीजों की संख्या में और इजाफा होगा। इस वर्ष अप्रैल से नवंबर तक 13 पाजिटिव मरीज आए हैं। यानी हर महीने दो पाजिटिव मरीज आते हैं। इस हिसाब से मार्च के अंत तक यह आंकड़ा बीस मरीजों की संख्या को पार कर सकता है। यह पिछले वर्ष के आंकडे़ (23 मरीज) में बस तीन मरीज ही कम होगा।
एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्र कठुआ से प्राप्त आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2014 के बाद निरंतर संख्या में मरीजों का आना जारी है। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों का आना ध्यान देने वाली बात यह है कि जहां बनी, लोहाई मल्हार, बसोहली आदि इलाकों के लोग पल्लेदारी का काम करने के लिए बाहरी राज्यों में जाते हैं, वहां एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या कम है, जबकि, अशिक्षित लोग भी यही अधिक हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि कुल एचआईवी मरीजों में से एक बड़ा हिस्सा हीरानगर ब्लॉक के मरीजों का है। जिला कठुआ के आईसीटीसी सेंटर में मरीजों की जांच कर एचआईवी पॉजिटिव होने का पता लगाया जा सकता है। इसके साथ दवा भी नि:शुल्क यही से मिलती है। लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं होता। दरअसल, जम्मू कश्मीर स्टेट एड्स प्रिवेंशन और कंट्रोल सोसाइटी तो बनाई गई है, लेकिन कठुआ जिले में पिछले चार सालों में जागरूकता गतिविधियों को अंजाम नहीं दिया गया है। आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य मंत्रालय ने जागरूकता कार्यक्रमों के लिए दिए जाने वाली सहयोग राशि को भी देना बंद कर दिया है। ऐसे में विभाग की पहुंच आम लोगों से दूर होती जा रही है। समाज में खुले तौर पर एड्स के बारे में बात करना आज भी आम लोग शर्म की बात महसूस करते हैं। जरूरत पड़ने पर ही आईसीटीसी सेंटर पहुंचते हैं। एड्स दिवस पर जरूरत है एक बार फिर सरकारी तंत्र को सक्रिय कर आम लोगों तक पहुंचाया जाए, ताकि ऐसे मामलों से निपटा जा सके।
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एचआईवी पाजिटिव पाए गए लोगों के आंकड़े
वर्ष पाजिटिव मामले
2007-08 16
2008-09 42
2009-10 39
2010-11 15
2011-12 26
2012-12 17
2013-14 28
2014-15 11
2015-16 09
2016-17 23
2017-18 13
कुल 239
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इस वर्ष 2103 मामलों की जांच
इस वर्ष विभाग ने अब तक 2103 मामलों की जांच की है। इसमें 653 पुरुष, 298 महिलाएं और 1152 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इन मामलों में 13 मामले पाजिटिव पाए गए। इसमें सात पुरुष, चार महिलाएं और दो गर्भवती महिलाएं शामिल हैं।
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वर्ष 2007-08 से अब तक कुल 33,134 मामलों की जांच की गई
वर्ष 2007-08 से अब तक कुल 33,134 मामलों की जांच की गई। इनमें 10,155 पुरुषों, 3827 महिलाओं के साथ ही 19,160 गर्भवती महिलाएं शामिल थे। इन सभी मामलों की जांच के बाद 107 पुरुष, 84 महिलाएं, 25 गर्भवती महिलाएं एचआईवी पाजिटिव पाए गए, जबकि 23 बच्चे भी इसमें शामिल हैं।