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टूटे स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चे
Updated Fri, 24 Nov 2017 01:02 AM IST
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पुंछ। केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा आए दिन सरकारी स्कूलों में बच्चों को उचित शिक्षा एवं सुविधाएं देने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। सरकारी स्कूल में सुविधाओं के नाम पर बच्चों को कुछ नहीं मिल रहा है। गरीब घरों के बच्चे अपनी जान जोखिम में डाल कर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर है। ऐसा ही एक स्कूल जिले की बालाकोट तहसील के भारत पाक नियंत्रण रेखा से सटे गांव खनेतर का प्राइमरी स्कूल हसनाल है। जिसकी इमारत पाक गोलाबारी में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। मात्र दो कमरों वाले इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे गोलाबारी से गिरी आधी दिवार वाले कमरों के बरामदे में बैठ कर पिछले ढाई महीनों से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। छात्र शाहिस्ता परवेज, इमरान और तब्बसूम का कहना है हमारे स्कूल के साथ न तो कोई मैदान है और न ही कोई कमरा है। जिसमें बैठ कर हम इस सर्दी के मौसम में अपनी पढ़ाई कर सकें। स्कूल में करीब ढाई महीने पहले पाक गोलाबारी में एक गोला गिरा था। जिससे स्कूल की आधी दिवार गिर गई थी। शिक्षक अल्ताफ हुसैन मीर का कहना है कि 27 सितंबर को पाक सेना ने बालाकोट क्षेत्र में भारी गोलाबारी की थी। जिसमें सबसे अधिक गोले हमारे इस गांव में गिरे थे। उन गोलों की चपेट में हमारे स्कूल के तीन बच्चे बुरी तरह घायल हो गए थे और एक गोला स्कूल के बाहर गिरने से स्कूल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। सेना द्वारा उपलब्ध कराए गए पचास डेस्क पड़े थे। उसकी पत्थरों से बनी दिवार का एक हिस्सा गिर गया था। जिसके चलते उस कमरे को खोल भी नहीं सकते हैं और अब अगर दोबारा पाक सेना कोई गोला स्कूल के आस पार गिरता है। या फिर बारिश के दिनों में जोरदार तरीके से बिजली भी कड़कती है तो स्कूल की इमारत गिर जाएगी और उसमें पड़े डेस्क भी तबाह हो जाएंगे। उच्च अधिकारियों को भी पत्र लिख कर कूल की मरमत करवाने की मांग कर रखी है। अल्ताफ मीर का कहना है कि जब से इमारत क्षतिग्रस्त हुई हैं तो स्कूल में बहुत कम बच्चे आते हैं। उनके अभिभावक कहते हैं कि हमें अपने बच्चों को इस टूटी इमारत के नीचे दबा कर नहीं मारना है।