{"_id":"67d7885ef8e4ed70e803ae37","slug":"study-sun-s-heat-also-increases-the-risk-of-earthquakes-temperature-fluctuations-weaken-rocks-2025-03-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"अध्ययन: सूरज की तपिश भी बढ़ाती है भूकंप का खतरा, तापमान में उतार-चढ़ाव से चट्टानें होती हैं कमजोर","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
अध्ययन: सूरज की तपिश भी बढ़ाती है भूकंप का खतरा, तापमान में उतार-चढ़ाव से चट्टानें होती हैं कमजोर
Mon, 17 Mar 2025 07:56 AM IST
शुभम कुमार
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: शुभम कुमार
Updated Mon, 17 Mar 2025 07:56 AM IST
सार
शोधकर्ताओं ने भूकंप, सौर गतिविधि और सतह के तापमान के बीच संबंध को समझने के लिए गणितीय मॉडल का उपयोग किया। उन्होंने पाया कि सतह के तापमान में बदलाव को शामिल करने से भूकंप की भविष्यवाणी अधिक सटीक हो सकती है, विशेष रूप से उथली गहराई पर आने वाले भूकंपों के लिए।
विज्ञापन
भूकंप
- फोटो : एएनआई / एजेंसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जापान में हुए अध्ययन में सामने आया है कि सूरज की गर्मी भी भूकंप का खतरा बढ़ाती है। भूकंप एक जटिल प्राकृतिक घटना है जिसे वैज्ञानिक गहराई से समझने की कोशिश कर रहे हैं। अध्ययन के अनुसार सूर्य की गर्मी से वातावरण का तापमान बदल जाता है, जिससे चट्टानों के गुणों और जमीन के नीचे बह रहे जल पर असर पड़ता है। इन परिवर्तनों के कारण भूकंप आने की संभावना बढ़ सकती है।
जापान के सुकुबा विश्वविद्यालय और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड इंडस्ट्रियल साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों का यह अध्ययन वैज्ञानिक जर्नल कैओस में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं के अनुसार सौर विकिरण जो वायुमंडल द्वारा अवशोषित या परावर्तित नहीं होता (उदाहरण के लिए बादलों द्वारा) पृथ्वी की सतह तक पहुंचता है। पृथ्वी अपनी सतह पर पहुंचने वाली अधिकांश ऊर्जा को अवशोषित कर लेती है, एक छोटा सा अंश परावर्तित होता है। सूर्य की ऊर्जा में बदलाव होने पर इसका प्रभाव धरती के भीतर मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल पर भी पड़ता है। तापमान में उतार-चढ़ाव से चट्टानें कमजोर हो सकती हैं, जिससे उनके टूटने की संभावना बढ़ जाती है और यही भूकंप का कारण बन सकता है।
ये भी पढ़ें:- निवेश-बचत: नए-पुराने निवेशकों के लिए हाइब्रिड फंड अच्छा विकल्प, कम जोखिम व सुरक्षा के लिए शॉर्ट ड्यूरेशन बेहतर
विज्ञापन
गणितीय मॉडल से भविष्यवाणी
शोधकर्ताओं ने भूकंप, सौर गतिविधि और सतह के तापमान के बीच संबंध को समझने के लिए गणितीय मॉडल का उपयोग किया। उन्होंने पाया कि सतह के तापमान में बदलाव को शामिल करने से भूकंप की भविष्यवाणी अधिक सटीक हो सकती है, विशेष रूप से उथली गहराई पर आने वाले भूकंपों के लिए। क्योंकि गर्मी और पानी का प्रभाव मुख्य रूप से पृथ्वी की ऊपरी परतों पर पड़ता है, इसलिए यह कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
टेक्टोनिक प्लेटों पर तापमान और पानी का प्रभाव
अध्ययन से जुड़े वैज्ञानिक मैथ्यूस हेनरिक जुनक्वेरा के अनुसार बारिश और पिघलती बर्फ टेक्टोनिक प्लेटों के किनारों पर दबाव को प्रभावित करती है। धरती कई टेक्टोनिक प्लेटों में विभाजित है जो लगातार धीमी गति से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं या इनके बीच दबाव बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो भूकंप आते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि सूर्य की गर्मी और पानी जैसे कारक भूकंप के मुख्य कारण तो नहीं हैं, लेकिन ये भूकम्पीय घटनाओं को प्रभावित करते हैं।
ये भी पढ़ें:-निवेश मंत्रा: पुरानी व्यवस्था के तहत एक लाख का टैक्स बचाने का अंतिम मौका, आयकर रिटर्न भरते समय रखें ध्यान
ग्लोबल वार्मिंग और भूकंप का संबंध
इससे पहले सीस्मोलॉजिकल रिसर्च लेटर्स जर्नल में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया था कि वैश्विक तापमान में हो रही वृद्धि के कारण भविष्य में अधिक शक्तिशाली भूकंप आ सकते हैं। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज और यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का बढ़ता जल स्तर और तेज तूफान भी भूकंप की तीव्रता को प्रभावित कर सकते हैं।
विज्ञापन
जापान के सुकुबा विश्वविद्यालय और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड इंडस्ट्रियल साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों का यह अध्ययन वैज्ञानिक जर्नल कैओस में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं के अनुसार सौर विकिरण जो वायुमंडल द्वारा अवशोषित या परावर्तित नहीं होता (उदाहरण के लिए बादलों द्वारा) पृथ्वी की सतह तक पहुंचता है। पृथ्वी अपनी सतह पर पहुंचने वाली अधिकांश ऊर्जा को अवशोषित कर लेती है, एक छोटा सा अंश परावर्तित होता है। सूर्य की ऊर्जा में बदलाव होने पर इसका प्रभाव धरती के भीतर मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल पर भी पड़ता है। तापमान में उतार-चढ़ाव से चट्टानें कमजोर हो सकती हैं, जिससे उनके टूटने की संभावना बढ़ जाती है और यही भूकंप का कारण बन सकता है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें:- निवेश-बचत: नए-पुराने निवेशकों के लिए हाइब्रिड फंड अच्छा विकल्प, कम जोखिम व सुरक्षा के लिए शॉर्ट ड्यूरेशन बेहतर
विज्ञापन
गणितीय मॉडल से भविष्यवाणी
शोधकर्ताओं ने भूकंप, सौर गतिविधि और सतह के तापमान के बीच संबंध को समझने के लिए गणितीय मॉडल का उपयोग किया। उन्होंने पाया कि सतह के तापमान में बदलाव को शामिल करने से भूकंप की भविष्यवाणी अधिक सटीक हो सकती है, विशेष रूप से उथली गहराई पर आने वाले भूकंपों के लिए। क्योंकि गर्मी और पानी का प्रभाव मुख्य रूप से पृथ्वी की ऊपरी परतों पर पड़ता है, इसलिए यह कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
टेक्टोनिक प्लेटों पर तापमान और पानी का प्रभाव
अध्ययन से जुड़े वैज्ञानिक मैथ्यूस हेनरिक जुनक्वेरा के अनुसार बारिश और पिघलती बर्फ टेक्टोनिक प्लेटों के किनारों पर दबाव को प्रभावित करती है। धरती कई टेक्टोनिक प्लेटों में विभाजित है जो लगातार धीमी गति से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं या इनके बीच दबाव बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो भूकंप आते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि सूर्य की गर्मी और पानी जैसे कारक भूकंप के मुख्य कारण तो नहीं हैं, लेकिन ये भूकम्पीय घटनाओं को प्रभावित करते हैं।
ये भी पढ़ें:-निवेश मंत्रा: पुरानी व्यवस्था के तहत एक लाख का टैक्स बचाने का अंतिम मौका, आयकर रिटर्न भरते समय रखें ध्यान
ग्लोबल वार्मिंग और भूकंप का संबंध
इससे पहले सीस्मोलॉजिकल रिसर्च लेटर्स जर्नल में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया था कि वैश्विक तापमान में हो रही वृद्धि के कारण भविष्य में अधिक शक्तिशाली भूकंप आ सकते हैं। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज और यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का बढ़ता जल स्तर और तेज तूफान भी भूकंप की तीव्रता को प्रभावित कर सकते हैं।