जेट एयरवेज लोन मामला: 'तीन साल में सीबीआई की चार्जशीट भी नहीं', नरेश गोयल ने अदालत से मांगी राहत; ईडी का विरोध
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
538 करोड़ रुपये के जेट एयरवेज लोन घोटाले में जेट एयरवेज के 77 वर्षीय संस्थापक नरेश गोयल ने अदालत से खुद को इस केस से बरी करने की गुहार लगाई है। उनकी अर्जी का सबसे बड़ा आधार यह है कि सीबीआई को एफआईआर दर्ज किए तीन साल हो चुके हैं, लेकिन उसने अब तक अदालत में कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की है। दूसरी तरफ ईडी ने नरेश गोयल की इस मांग का डटकर विरोध किया है। ईडी ने अदालत में साफ कहा है कि सीबीआई की तरफ से चार्जशीट न आने का मतलब यह नहीं है कि आरोपी को राहत दे दी जाए। ईडी ने नरेश गोयल को जेट एयरवेज का मुख्य रणनीतिकार बताया है, जिसकी शह पर पूरा खेल रचा गया।
नरेश गोयल ने अपनी याचिका में पैसों की हेराफेरी के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि बैंकों के समूह ने अपना बकाया पैसा वसूलने के लिए पहले से ही कानूनी रास्ता अपना लिया है। गोयल ने दावा किया कि जेट एयरवेज की हालत उनके किसी गलत काम की वजह से नहीं, बल्कि ऐसे कारणों से खराब हुई जो उनके बस में नहीं थे। इनमें सस्ती एयरलाइन कंपनियों से मिला कड़ा मुकाबला और हवाई जहाज के ईंधन के दामों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी मुख्य वजहें थीं।
इस पूरे मामले की शुरुआत केनरा बैंक की एक शिकायत से हुई थी, जिसके आधार पर सीबीआई ने 3 मई 2023 को एफआईआर दर्ज की थी। सीबीआई का आरोप था कि गोयल और उनके साथियों ने एयरलाइन चलाने के नाम पर जो लोन लिया था, उससे भारत, लंदन और दुबई में अपने लिए निजी जायदाद खरीदी और निजी खर्च पूरे किए। इसके तुरंत बाद, ईडी ने विदेशों में पैसे भेजने और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए सीबीआई के इसी केस को मूल अपराध मानते हुए अपनी कार्रवाई शुरू कर दी थी।
गोयल की याचिका में कहा गया है कि सीबीआई पिछले तीन वर्षों से मामले की छानबीन कर रही है, लेकिन वह अब तक किसी ऐसे नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है जिससे यह साबित हो सके कि उन्होंने कोई अपराध किया है या केस में शामिल पैसा 'अपराध की कमाई' है। याचिका के मुताबिक, कानूनन मनी लॉन्ड्रिंग का केस तभी टिक सकता है जब कोई वैध मूल अपराध साबित हो, लेकिन सीबीआई अभी तक किसी ऐसे अपराध का खुलासा नहीं कर पाई है। इसमें यह बात भी उठाई गई है कि एफआईआर में भ्रष्टाचार रोकने वाले कानून की धाराएं लगाने के बावजूद किसी भी सरकारी अफसर को आरोपी नहीं बनाया गया है।
कानूनी नियमों के मुताबिक, धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए के तहत ईडी का मामला बिना किसी मूल अपराध के आगे नहीं बढ़ सकता। हालांकि, सीबीआई ने नरेश गोयल को अभी तक इस मामले में क्लीन चिट भी नहीं दी है। इसी बात को आधार बनाते हुए ईडी का तर्क है कि सीबीआई द्वारा चार्जशीट दाखिल न करने को केस खत्म करने का सही कारण नहीं माना जा सकता। ईडी ने कोर्ट में कहा कि आरोपी की हरकतों ने देश की वित्तीय व्यवस्था को तगड़ी चोट पहुंचाई है। एजेंसी के मुताबिक, जायज कारोबारी खर्चों के नाम पर कंपनी की संपत्तियों को चालाकी से विदेशी ट्रस्टों और अपने नजदीकी लोगों के खातों में भेजा गया था।
नरेश गोयल को सितंबर 2023 में ईडी ने गिरफ्तार किया था, जिसके बाद साल 2024 में उनकी खराब तबीयत को देखते हुए अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी। अपनी नई अर्जी में गोयल ने अपनी लगातार गिरती सेहत का हवाला दिया है और कहा है कि 2024 में अपनी पत्नी अनीता गोयल के गुजर जाने के बाद से वे मानसिक और भावनात्मक रूप से बहुत टूट चुके हैं। गोयल ने दावा किया है कि केनरा बैंक से मिली 538.62 करोड़ रुपये की कुल मदद में से 365.57 करोड़ रुपये 'नॉन-फंड बेस्ड' यानी लेटर ऑफ क्रेडिट के रूप में थे। यह पैसा सीधे सामान देने वाले वेंडरों के खातों में गया था और बाकी की रकम तेल कंपनियों तथा एयरपोर्ट ऑपरेटरों को चुकाई गई थी। इसके उलट, ईडी का आरोप है कि एयरलाइन चलाने के भुगतानों और बाकी खर्चों को जानबूझकर बहुत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था ताकि इस रकम का इस्तेमाल गोयल अपने निजी फायदे के लिए कर सकें।
जेट एयरवेज ने साल 2019 में अपनी उड़ानें पूरी तरह से बंद कर दी थीं, जिसके बाद हजारों कर्मचारियों की नौकरियां चली गई थीं। इसके बाद नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने साल 2024 में कंपनी को बंद करके उसकी संपत्तियां बेचने यानी लिक्विडेशन का आदेश दिया था। अपनी अर्जी में गोयल ने यह दावा भी किया है कि जेट एयरवेज की संपत्तियों, जैसे कि हवाई जहाज, जमीन, इमारतें, गाड़ियां और हैंगर को बेचकर 3,500 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की वसूली हो जाएगी, जिसका इस्तेमाल बैंकों का कर्ज चुकाने में किया जाएगा।