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जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज का मामला: जस्टिस भुइयां ने जताई चिंता, बोले- पुलिस का संयम खत्म होता दिख रहा

Fri, 04 Sep 2026 10:58 PM IST
राहुल कुमार पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: राहुल कुमार Updated Fri, 04 Sep 2026 10:58 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने जंतर-मंतर पर  छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों की ओर से प्रदर्शनकारियों पर हमले पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों से जिस संयम की उम्मीद की जाती है, वह खत्म होता दिख रहा है।
 

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Police detachment disappearing: Justice Ujjal Bhuyan on assault of protesters at Jantar Mantar
जस्टिस उज्जल भुइयां - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां ने शुक्रवार को कहा कि जंतर-मंतर पर विरोध कर रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा किया गया बल प्रयोग परेशान करने वाला और गंभीर चिंता का विषय है।न्यायमूर्ति भुइयां ने पूर्व सचिव (सुरक्षा) यशोवर्धन आजाद की लिखी किताब ‘पुलिसिंग द रिपब्लिक’ के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। 

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उन्होंने कहा कि हम सभी को दुख होता है जब हम भारतीय पुलिस सेवा के युवा अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जाकर प्रदर्शनकारियों और आंदोलनकारियों पर हमला करते हुए देखते हैं। यह देखना बहुत ही दुखद है। पुलिस अधिकारियों से जिस संयम की उम्मीद की जाती है, वह किसी तरह खत्म होता दिख रहा है और यह वास्तव में गंभीर चिंता का विषय है।
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जस्टिस भुइयां ने कहा कि बिना अधिक बल प्रयोग किए या मानवाधिकारों का उल्लंघन किए बिना भी प्रभावी पुलिसिंग की जा सकती है। ज्यादातर आम लोगों के लिए सड़क पर सीटी और लाठी लिए खड़ा पुलिसवाला राज्य की शक्ति और अधिकार का प्रतीक होता है। जब उन्हें लगता है कि उनके साथ गलत हुआ है तो वे पुलिस की मदद लेते हैं। इसलिए, यह बहुत जरूरी है कि पुलिस बल अपनी विश्वसनीयता बनाए रखे। ऐसा तभी किया जा सकता है जब संविधान का सख्ती से पालन किया जाए, एक सच्चे पेशेवर बल के रूप में काम किया जाए, निष्पक्षता से काम किया जाए, साहस और दृढ़ विश्वास के साथ काम किया जाए, ईमानदारी बनाए रखी जाए और धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों का पालन किया जाए, जिससे कानून के शासन को बनाए रखा जा सके।
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जस्टिस भुइयां ने कहा कि कानून के शासन से चलने वाले सभ्य समाज में हिरासत में मौत शायद सबसे बुरे अपराधों में से एक है। किसी भी तरह की यातना, क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार अनुच्छेद 29 के तहत प्रतिबंधित है, चाहे वह जांच, पूछताछ या किसी अन्य स्थिति में हो। जब सरकार के अधिकारी कानून तोड़ने वाले बन जाते हैं, तो इससे अराजकता को बढ़ावा मिल सकता है। अगर सरकार के अधिकारी ही कानून तोड़ने लगें, तो इससे कानून के प्रति अनादर पैदा होगा और अराजकता को बढ़ावा मिलेगा। कोई भी सभ्य देश ऐसा होने नहीं दे सकता।
 

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