प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के तीन द्वीपों को नया नाम दिया। अपने कार्यकाल में पहली बार यहां पहुंचे मोदी ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के यहां तिरंगा फहराने की 75वीं सालगिरह पर रोस आइलैंड का नामकरण उनके नाम पर करने की घोषणा की। अब इसे नेताजी सुभाषचंद्र बोस द्वीप के नाम से जाना जाएगा। इसके अलावा नील आइलैंड को शहीद द्वीप और हेवलॉक आइलैंड को स्वराज द्वीप के नाम से पहचाना जाएगा। बता दें कि द्वितीय विश्व युद्ध में अंडमान-निकोबार पर जापानी सेना के कब्जे के बाद 30 दिसंबर, 1943 को यहां पहुंचे नेताजी ने ही अंडमान-निकोबार का नाम बदलकर शहीद और स्वराज द्वीप करने की सलाह दी थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने बदले अंडमान निकोबार के तीन द्वीपों के नाम, 'नेताजी को दी श्रद्धांजलि'
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आजाद हिंद फौज की टोपी पहनकर नेताजी स्टेडियम में आयोजित जनसभा में पहुंचे प्रधानमंत्री ने कहा, जब भी स्वतंत्रता सेनानियों की बात होती है, तो नेताजी का नाम बहुत गर्व से लिया जाता है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने अंडमान की धरती पर ही पहले प्रधानमंत्री के रूप में भारत की स्वतंत्रता का संकल्प लिया था। उन्होंने कहा, इससे देश को प्रेरणा मिली थी और इसी कारण अंडमान के द्वीप का नामकरण उनके नाम पर करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही कहा कि सरकार अंडमान-निकोबार के लोगोें को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए काम कर रही है।
जब पीएम के आग्रह पर मोबाइलों से जगमगाया स्टेडियम
अपना संबोधन शुरू करने से पहले प्रधानमंत्री ने उपस्थित जनता से अपने मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर नेताजी और आजाद हिंद फौज के शहीदों को श्रद्धांजलि देने का आग्रह किया। इस पर हजारों मोबाइलों की लाइट से स्टेडियम तत्काल ही जगमगा गया। इससे पहले प्रधानमंत्री मरीना पार्क पहुंचे और यहां 150 फुट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज को फहराया। साथ ही नेता जी की प्रतिमा पर पुष्प चढ़ाकर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी।
जारी किया 75 रुपये का सिक्का, सेल्युलर जेल भी पहुंचे
प्रधानमंत्री ने इस विशेष दिन पर नेताजी के यहां तिरंगा फहराने की स्मृति में स्मारक डाक टिकट और 75 रुपये का सिक्का भी जारी किया। प्रधानमंत्री ने सेल्युलर जेल का भी दौरान किया और उन शहीदों व स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी, जिन्हें अंग्रेज शासित भारत में यहां राजनीतिक बंदी के तौर पर सजा-ए-काला पानी देकर निवार्सित किया जाता था या फांसी पर लटका दिया जाता था। वर्ष 1896 में शुरू होकर 1906 में पूरी हुई इस जेल में बहुत सारे नामी स्वतंत्रता सेनानियों को बंद रखकर यंत्रणाएं दी गई थीं।
वीर सावरकर की बैरक में फर्श पर बैठकर लगाया ध्यान
प्रधानमंत्री जेल परिसर में उस बैरक में भी पहुंचे, जिसमें हिंदुत्व विचारक वीर सावरकर को रखा गया था। बैरक में पहुंचने पर सावरकर के फोटो के सामने मोदी फर्श पर बैठ गए और कुछ समय के लिए अपनी आंखें बंद करते हुए हाथ जोड़कर ध्यान जैसी मुद्रा बना ली। बैरक से निकलकर वह केंद्रीय टॉवर में गए, जहां उन्होंने संगमरमर पर लिखे गए यहां कैद रहे लोगों के नाम पढ़े। उन्होंने कहा, वीर सावरकर, बाबा भान सिंह, इंदुभूषण राय जैसे शहीदों की बैरक किसी मंदिर से कम नहीं मानी जा सकती। पीएम ने फांसीघर भी देखा, जहां एकसाथ तीन लोगों को फांसी देने की व्यवस्था थी और फिर म्यूजियम में जाकर विजिटर बुक में हस्ताक्षर भी किए।