'बंदूक की नोक पर रोके गए सांसद': संजय राउत ने केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप; निर्वाचन आयोग पर क्या बोले?
संजय राउत ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जा रहे विपक्षी सांसदों को बंदूक की नोक पर रोका गया। उन्होंने चुनाव आयोग को हाइजैक करने का दावा करते हुए सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विपक्ष द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के विरोध में मार्च निकालने को लेकर शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्षी सांसदों को बंदूक की नोक पर निर्वाचन आयोग के कार्यालय पहुंचने से रोका गया। उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, 'जैसे वे आतंकवादी हों।' उन्होंने महिला सांसदों के साथ दुर्व्यवहार का भी आरोप लगाया। राउत ने कहा कि मंगलवार को दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से मिलने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को तैनात किया गया था। उन्होंने दावा किया कि 275 निहत्थे विपक्षी सांसदों को रोकने के लिए हजारों जवान लगाए गए और उन्हें बंदूक की नोक पर रोककर हिरासत में लिया गया। उन्होंने महिला सांसदों के साथ भी दुर्व्यवहार का आरोप लगाया।
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विपक्ष ने क्यों निकाला मार्च?
बता दें कि मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने कथित 'वोट चोरी' के आरोप में मार्च निकाला था। इस दौरान पुलिस द्वारा कई सांसदों को हिरासत में भी लिया गया और उन्हें निर्वाचन आयोग के कार्यालय जाने से रोक दिया गया। शिवसेना (यूबीटी) नेता राउत ने सवाल किया कि अगर निर्वाचन आयुक्त विपक्षी सांसदों से मुलाकात नहीं करते, तो क्या वो सिर्फ पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से ही मिलते हैं। उन्होंने कहा कि सीईसी ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा, उन्हें जाना होगा।
पूर्व सीईसी पर क्यों बोला हमला?
शिवसेना (यूबीटी) नेता राउत ने पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार पर भी निशाना साधा। राजीव कुमार पर उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने शिवसेना का नाम और चुनाव चिह्न चोरों के हाथों में सौंप दिया। इसके साथ ही उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना पर निशाना साधा। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना जून, 2022 में विभाजित हो गई थी। निर्वाचन आयोग ने फरवरी, 2023 में शिवसेना का नाम और ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को आवंटित किया था। उन्होंने राजीव कुमार द्वारा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के मामले में भी ऐसा करने का आरोप लगाया।
बता दें कि शिवसेना की तरह ही 2023 में शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में भी दो फाड़ हुआ था। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट को वास्तविक एनसीपी के रूप में मान्यता दी थी और 2024 में पार्टी का आधिकारिक नाम तथा ‘घड़ी’ चुनाव चिह्न अजीत पवार गुट को आवंटित किया।
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एसआईआर पर क्या बोले राउत?
संजय राउत ने देशभर में चल रहे एसआईआर प्रक्रिया और ईवीएम पर भी हमला बोला। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के माध्यम से चुनाव आयोग को हाइजैक करने का आरोप लगाया। राउत ने पीएम मोदी के प्रशासनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भाजपा नेताओं और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा करोड़ों रुपये के विज्ञापनों पर खर्च करने का भी आरोप लगाया और कहा कि यह पैसा सूखा प्रभावित इलाकों के गरीब किसानों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता था