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रिपोर्ट: देश में मलेरिया के मामले 10 फीसदी घटे, उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा गिरावट; इस साल मौतें भी कम हुईं
सार
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इस साल मलेरिया के 1.42 लाख मरीज, 33 मौतें, यूपी समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में राहत
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यूपी में मामले 59%, पंजाब में 52%, हरियाणा में 55 फीसदी
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उत्तराखंड में 31%, जम्मू-कश्मीर में 22% और दिल्ली में 27% घटे
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झारखंड में मरीजों की संख्या में 36 फीसदी का इजाफा, केरल, आंध्र प्रदेश में भी चिंताजनक हालत
इस साल मलेरिया के 1.42 लाख मरीज, 33 मौतें, यूपी समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में राहत
यूपी में मामले 59%, पंजाब में 52%, हरियाणा में 55 फीसदी
उत्तराखंड में 31%, जम्मू-कश्मीर में 22% और दिल्ली में 27% घटे
झारखंड में मरीजों की संख्या में 36 फीसदी का इजाफा, केरल, आंध्र प्रदेश में भी चिंताजनक हालत
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देश में घटे मलेरिया के मामले
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
देश में मलेरिया के खिलाफ चल रही मुहिम का असर इस साल के आंकड़ों में दिखाई देने लगा है। अगस्त 2026 तक देश में मलेरिया के 1,42,403 मामले सामने आए और 33 लोगों की मौत हुई। पिछले साल अगस्त तक 1,58,980 मामले और 45 मौतें दर्ज हुई थीं। यानी इस साल मरीजों की संख्या में 10.43 प्रतिशत और मौतों में करीब 27 प्रतिशत की कमी आई है। हालांकि, देश के कुछ राज्यों में संक्रमण अभी भी चिंता का कारण बना हुआ है। मंगलवार को राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीवीबीडीसी) ने इसको लेकर रिपोर्ट जारी कर दी है। इसके अनुसार, इस साल देश में करीब 11.85 करोड़ लोगों की मलेरिया जांच हुई। पिछले साल इसी अवधि में करीब 12.44 करोड़ जांच हुई थीं।
उत्तर भारत में बड़ी राहत, यूपी में सबसे ज्यादा गिरावट
उत्तर भारत के कई राज्यों में पिछले साल की तुलना में मलेरिया के मामले तेजी से घटे हैं। उत्तर प्रदेश मेंसस 7,517 से घटकर 3,075 मामले रह गए, यानी 59 प्रतिशत की कमी। पंजाब में 268 से 129 मामले, हरियाणा में 359 से 163, दिल्ली में 223 से 163, उत्तराखंड में 143 से 98 और जम्मू-कश्मीर में 79 से 62 मामले रह गए। यानी उत्तर भारत के इन राज्यों में कुल मामलों में कमी आई है, लेकिन तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हरियाणा में पीएफ मलेरिया यानी फाल्सीपेरम परजीवी से होने वाले मलेरिया के मामलों का हिस्सा बढ़ा है। यह मलेरिया का एक गंभीर रूप होता है, इसलिए इसके मरीजों की पहचान और समय पर इलाज बेहद जरूरी है।
झारखंड में 36% उछाल, आंध्र प्रदेश और केरल में भी बढ़े मामले
देशभर में कुल मरीज घटे हैं, लेकिन कुछ राज्यों में उलटा रुझान देखने को मिला। झारखंड में मामले 23,808 से बढ़कर 32,338 हो गए, यानी 36 प्रतिशत की वृद्धि। आंध्र प्रदेश में 6,784 से बढ़कर 7,966 और केरल में 790 से बढ़कर 840 मामले हुए। मणिपुर, नगालैंड और गोवा में भी पिछले साल के मुकाबले मामले बढ़े हैं। वहीं सबसे अधिक मामलों वाले राज्यों में ओडिशा में 37,899, झारखंड में 32,338, छत्तीसगढ़ में 18,887 और महाराष्ट्र में 13,448 मामले दर्ज हुए। इन चार राज्यों में ही देश के कुल मामलों का करीब 72 प्रतिशत हिस्सा रहा।
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मलेरिया मुक्त भारत के लिए 2030 का लक्ष्य
सरकार ने देश को मलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। एनसीवीबीडीसी के मुताबिक 2030 तक मलेरिया को खत्म करना और जिन इलाकों में संक्रमण रुक चुका है, वहां दोबारा स्थानीय संक्रमण न फैलने देना प्रमुख लक्ष्य है। 2027 तक देश में स्थानीय स्तर पर होने वाले मलेरिया संक्रमण को शून्य करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए हर मरीज की पहचान, उसके संक्रमण के स्रोत की जांच और उसके आसपास संक्रमण रोकने की कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है।
10 फीसदी की कमी का मतलब
2025 में अगस्त तक 1,58,980 मलेरिया मरीज मिले थे। 2026 में यह संख्या घटकर 1,42,403 हुई। यानी एक साल में 16,577 कम मामले दर्ज हुए। मौतें भी 45 से घटकर 33 रह गईं।
उत्तर भारत में कितने मामले
जहां संक्रमण बढ़ा
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उत्तर भारत में बड़ी राहत, यूपी में सबसे ज्यादा गिरावट
उत्तर भारत के कई राज्यों में पिछले साल की तुलना में मलेरिया के मामले तेजी से घटे हैं। उत्तर प्रदेश मेंसस 7,517 से घटकर 3,075 मामले रह गए, यानी 59 प्रतिशत की कमी। पंजाब में 268 से 129 मामले, हरियाणा में 359 से 163, दिल्ली में 223 से 163, उत्तराखंड में 143 से 98 और जम्मू-कश्मीर में 79 से 62 मामले रह गए। यानी उत्तर भारत के इन राज्यों में कुल मामलों में कमी आई है, लेकिन तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हरियाणा में पीएफ मलेरिया यानी फाल्सीपेरम परजीवी से होने वाले मलेरिया के मामलों का हिस्सा बढ़ा है। यह मलेरिया का एक गंभीर रूप होता है, इसलिए इसके मरीजों की पहचान और समय पर इलाज बेहद जरूरी है।
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झारखंड में 36% उछाल, आंध्र प्रदेश और केरल में भी बढ़े मामले
देशभर में कुल मरीज घटे हैं, लेकिन कुछ राज्यों में उलटा रुझान देखने को मिला। झारखंड में मामले 23,808 से बढ़कर 32,338 हो गए, यानी 36 प्रतिशत की वृद्धि। आंध्र प्रदेश में 6,784 से बढ़कर 7,966 और केरल में 790 से बढ़कर 840 मामले हुए। मणिपुर, नगालैंड और गोवा में भी पिछले साल के मुकाबले मामले बढ़े हैं। वहीं सबसे अधिक मामलों वाले राज्यों में ओडिशा में 37,899, झारखंड में 32,338, छत्तीसगढ़ में 18,887 और महाराष्ट्र में 13,448 मामले दर्ज हुए। इन चार राज्यों में ही देश के कुल मामलों का करीब 72 प्रतिशत हिस्सा रहा।
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मलेरिया मुक्त भारत के लिए 2030 का लक्ष्य
सरकार ने देश को मलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। एनसीवीबीडीसी के मुताबिक 2030 तक मलेरिया को खत्म करना और जिन इलाकों में संक्रमण रुक चुका है, वहां दोबारा स्थानीय संक्रमण न फैलने देना प्रमुख लक्ष्य है। 2027 तक देश में स्थानीय स्तर पर होने वाले मलेरिया संक्रमण को शून्य करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए हर मरीज की पहचान, उसके संक्रमण के स्रोत की जांच और उसके आसपास संक्रमण रोकने की कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है।
10 फीसदी की कमी का मतलब
2025 में अगस्त तक 1,58,980 मलेरिया मरीज मिले थे। 2026 में यह संख्या घटकर 1,42,403 हुई। यानी एक साल में 16,577 कम मामले दर्ज हुए। मौतें भी 45 से घटकर 33 रह गईं।
उत्तर भारत में कितने मामले
- यूपी : 3,075
- दिल्ली : 163
- हरियाणा : 163
- पंजाब : 129
- उत्तराखंड : 98
- जम्मू-कश्मीर : 62
जहां संक्रमण बढ़ा
- झारखंड : 32,338
- आंध्र प्रदेश : 7,966
- मणिपुर : 215
- गोवा : 363
- केरल : 840