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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Vimal Negi death case: CBI charge sheet reveals fake completion certificate and document tampering.

विमल नेगी मौत मामला: सीबीआई चार्जशीट में फर्जी कंपलीशन सर्टिफिकेट और दस्तावेजों में हेरफेर का खुलासा

Sat, 06 Jun 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 06 Jun 2026 05:00 AM IST
सार

एचपीपीसीएल के मुख्य अभियंता विमल नेगी की मौत की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मामले को लेकर दाखिल चार्जशीट में कथित दस्तावेजों में गड़बड़ी और आपराधिक साजिश रचने के गंभीर पहलु शामिल किए हैं। 

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Vimal Negi death case: CBI charge sheet reveals fake completion certificate and document tampering.
विमल नेगी(फाइल)। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) के मुख्य अभियंता विमल नेगी की मौत की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मामले को लेकर दाखिल चार्जशीट में कथित दस्तावेजों में गड़बड़ी और आपराधिक साजिश रचने के गंभीर पहलु शामिल किए हैं। दावा किया गया है कि पेखूबेला सौर ऊर्जा परियोजना में अधूरे कार्य को पूरा दर्शाने और ठेकेदार के पक्ष में भुगतान करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर योजनाबद्ध तरीके से निर्णय लिए गए। सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार परियोजना में वास्तविक प्रगति और आधिकारिक रिकॉर्ड के बीच अंतर होने के बावजूद कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी किया गया।

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जांच एजेंसी का आरोप है कि प्रमाणपत्र को बैकडेट से लागू दिखाया गया, जिससे परियोजना की स्थिति को कागजों में वास्तविकता से अलग दिखाया किया जा सके। जांच में यह भी सामने आया है कि पेखूबेला सौर ऊर्जा परियोजना में ठेकेदार को लगभग 13 करोड़ का अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमों को दरकिनार किया गया, जिससे विमल नेगी पर लगातार दबाव बना और वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गए थे। जिन अधिकारियों ने भुगतान और कंपनीशन को लेकर आपत्तियां दर्ज कीं, उन्हें निर्णय प्रक्रिया से अलग कर दिया गया। चार्जशीट के अनुसार परियोजना की निगरानी की जिम्मेदारियां बदली गईं और ऐसे अधिकारियों पर दबाव बनाया गया, जो नियमों के अनुरूप कार्रवाई की वकालत कर रहे थे।

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सीबीआई ने अदालत को बताया है कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अधीनस्थ अधिकारियों से अनुकूल टिप्पणियां और प्रस्ताव तैयार कराने का प्रयास किया गया। एजेंसी का मानना है कि यह केवल प्रशासनिक निर्णयों का मामला नहीं बल्कि एक सुनियोजित आपराधिक साजिश का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य ठेकेदार के पक्ष में निर्णय सुनिश्चित करना था। जांच एजेंसी के अनुसार परियोजना से जुड़े दस्तावेजों, बैठकों के रिकॉर्ड और अधिकारियों के बयानों से यह संकेत मिलता है कि नियमों को दरकिनार कर आधिकारिक रिकॉर्ड को अपने फायदे के अनुरूप ढालने की कोशिश की गई। इसी घटनाक्रम के दौरान बढ़ते दबाव और विवादों के केंद्र में रहे विमल नेगी की भूमिका भी जांच का अहम हिस्सा बनी हुई है। सीबीआई ने चार्जशीट में बताया है कि मामले में पद के दुरुपयोग, दस्तावेजों में गड़बड़ी और आपराधिक साजिश के सबूत स्पष्ट रूप से सामने आए हैं, जिनकी न्यायिक जांच अब अदालत में आगे बढ़ेगी।

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