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आयोग की चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा को मिले 65 प्रतिशत वरीयता : चौधरी
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कहा, साक्षात्कार को 100 प्रतिशत वरीयता से ओबीसी वर्ग के युवाओं को किया जा रहा बाहर
सामाजिक न्याय यात्रा के लिए अबादा वराना के ग्ज्ञीण पहुंचेंगे कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। अबादा वराना में 20 सितंबर को सामाजिक न्याय यात्रा में शामिल होने के लिए शुक्रवार को एक सभा का आयोजन किया गया। सभा को किसान योद्धा सरदार रुड़का सिंह कल्याण समिति के अध्यक्ष इंजीनियर बलवीर चौधरी तथा घृत बाहती चाहंग महासभा के संरक्षक पूर्व सैनिक सुभाष कौंडल ने संबोधित किया। इस दौरान किसान योद्धा सरदार रुड़का सिंह कल्याण समिति हरोली मंडल के सचिव एवं घृत बाहती चाहंग यूथ विंग के जिला अध्यक्ष, उपप्रधान खड्ड रविंद्र खसरु विशेष रूप से उपस्थित रहे।
सभा को संबोधित करते हुए बलवीर चौधरी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा को 65 प्रतिशत वरीयता दी जानी चाहिए। वर्तमान व्यवस्था में साक्षात्कार को 100 प्रतिशत वरीयता दिए जाने से ओबीसी वर्ग के युवाओं को नॉट फाउंड सूटेबल घोषित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन प्रदेश में पक्के नर्सरी शिक्षकों की नियुक्ति न होने के कारण लोगों को अपने दो बच्चों की पढ़ाई पर निजी स्कूलों में लगभग 50,000 रुपये सालाना खर्च करने पड़ रहे हैं। शिक्षा का अभाव प्रदेशवासियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
सभा में यह भी प्रश्न उठाया कि प्रदेश के सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ओबीसी वर्ग के लिए कोई कोटा नहीं है, जबकि सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत और अनुसूचित जाति वर्ग को 15 प्रतिशत आरक्षण का लाभ उपलब्ध है। बलवीर चौधरी ने मांग की कि प्रदेश सरकार को 103वें संविधान संशोधन की तर्ज पर 93वां संविधान संशोधन तुरंत लागू करना चाहिए। भेदभाव को समाप्त करने तथा मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए ग्रामवासियों ने 20 सितंबर को कांगड़ा से धर्मशाला तक पैदल यात्रा में शामिल होने का निर्णय लिया।
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सामाजिक न्याय यात्रा के लिए अबादा वराना के ग्ज्ञीण पहुंचेंगे कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। अबादा वराना में 20 सितंबर को सामाजिक न्याय यात्रा में शामिल होने के लिए शुक्रवार को एक सभा का आयोजन किया गया। सभा को किसान योद्धा सरदार रुड़का सिंह कल्याण समिति के अध्यक्ष इंजीनियर बलवीर चौधरी तथा घृत बाहती चाहंग महासभा के संरक्षक पूर्व सैनिक सुभाष कौंडल ने संबोधित किया। इस दौरान किसान योद्धा सरदार रुड़का सिंह कल्याण समिति हरोली मंडल के सचिव एवं घृत बाहती चाहंग यूथ विंग के जिला अध्यक्ष, उपप्रधान खड्ड रविंद्र खसरु विशेष रूप से उपस्थित रहे।
सभा को संबोधित करते हुए बलवीर चौधरी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा को 65 प्रतिशत वरीयता दी जानी चाहिए। वर्तमान व्यवस्था में साक्षात्कार को 100 प्रतिशत वरीयता दिए जाने से ओबीसी वर्ग के युवाओं को नॉट फाउंड सूटेबल घोषित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन प्रदेश में पक्के नर्सरी शिक्षकों की नियुक्ति न होने के कारण लोगों को अपने दो बच्चों की पढ़ाई पर निजी स्कूलों में लगभग 50,000 रुपये सालाना खर्च करने पड़ रहे हैं। शिक्षा का अभाव प्रदेशवासियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
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सभा में यह भी प्रश्न उठाया कि प्रदेश के सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ओबीसी वर्ग के लिए कोई कोटा नहीं है, जबकि सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत और अनुसूचित जाति वर्ग को 15 प्रतिशत आरक्षण का लाभ उपलब्ध है। बलवीर चौधरी ने मांग की कि प्रदेश सरकार को 103वें संविधान संशोधन की तर्ज पर 93वां संविधान संशोधन तुरंत लागू करना चाहिए। भेदभाव को समाप्त करने तथा मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए ग्रामवासियों ने 20 सितंबर को कांगड़ा से धर्मशाला तक पैदल यात्रा में शामिल होने का निर्णय लिया।
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