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चिंता-चिता मनुष्य को जलाती है, चिंतन करें : शास्त्री शशिकांत
Fri, 03 May 2024 03:04 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 03 May 2024 03:04 AM IST
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आश्रय पुरोधा चडतगढ़ में दूसरे दिन हुआ ज्ञान यज्ञ
संवाद न्यूज़ एजेंसी
मैहतपुर (ऊना)। गायत्री परिवार के सौजन्य से आश्रय पुरोधा चडतगढ़ में गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा के दूसरे दिन व्यास पीठ से प्रज्ञा प्राणवाचक शशिकांत शास्त्री ने कहा कि सच्चिदानंद रूप को पाने के लिए भक्ति ज्ञान और वैराग्य को समझना पड़ता है। सत, चित और आनंद का जिसे ज्ञान हो जाए, वह प्राणी ईश्वर कैसे परमानंद को करने का समर्थ पा जाता है। एक भजन के माध्यम से उन्होंने कहा कि चिंता और चिता ये दोनों मनुष्यों को जलाती हैं, इसलिए दोनों से बचना है तो ईश्वर का चिंतन करना चाहिए। शांतिकुज हरिद्वार के गायत्री परिवार के सदस्य प्रज्ञा प्राणवाचक शशिकांत शास्त्री ने कहा कि ईश्वरीय आनंद को प्राप्त करना कठिन नहीं है, लेकिन उसे प्राप्त करने के लिए हमें ईश्वर की भक्ति से जुड़ना होगा, तभी हम उस आनंद को प्राप्त कर पाएंगे। इस अवसर पर नरेंद्र निर्मोही सुरेश ऐरी, मास्टर कृष्ण देव शर्मा, केपी सूद, अश्विनी कालिया सहित अनेक प्रभु भक्तों ने कथा का रसपान किया।
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
मैहतपुर (ऊना)। गायत्री परिवार के सौजन्य से आश्रय पुरोधा चडतगढ़ में गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा के दूसरे दिन व्यास पीठ से प्रज्ञा प्राणवाचक शशिकांत शास्त्री ने कहा कि सच्चिदानंद रूप को पाने के लिए भक्ति ज्ञान और वैराग्य को समझना पड़ता है। सत, चित और आनंद का जिसे ज्ञान हो जाए, वह प्राणी ईश्वर कैसे परमानंद को करने का समर्थ पा जाता है। एक भजन के माध्यम से उन्होंने कहा कि चिंता और चिता ये दोनों मनुष्यों को जलाती हैं, इसलिए दोनों से बचना है तो ईश्वर का चिंतन करना चाहिए। शांतिकुज हरिद्वार के गायत्री परिवार के सदस्य प्रज्ञा प्राणवाचक शशिकांत शास्त्री ने कहा कि ईश्वरीय आनंद को प्राप्त करना कठिन नहीं है, लेकिन उसे प्राप्त करने के लिए हमें ईश्वर की भक्ति से जुड़ना होगा, तभी हम उस आनंद को प्राप्त कर पाएंगे। इस अवसर पर नरेंद्र निर्मोही सुरेश ऐरी, मास्टर कृष्ण देव शर्मा, केपी सूद, अश्विनी कालिया सहित अनेक प्रभु भक्तों ने कथा का रसपान किया।