{"_id":"6ab821debd79030fa80a7fdd","slug":"no-match-found-even-after-a-six-month-wait-final-settlement-reached-at-476-lakh-una-news-c-93-1-una1002-207369-2026-09-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Una News: छह माह इंतजार के बाद भी नहीं जुड़ा रिश्ता, 4.76 लाख पर हुआ अंतिम समझौता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Una News: छह माह इंतजार के बाद भी नहीं जुड़ा रिश्ता, 4.76 लाख पर हुआ अंतिम समझौता
Sun, 27 Sep 2026 01:19 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sun, 27 Sep 2026 01:19 AM IST
विज्ञापन
दुलैहड़ (ऊना)। पांच साल पहले शुरू हुआ वैवाहिक रिश्ता करीब तीन साल अलग रहने के बाद आखिरकार खत्म हो गया। परिवार न्यायालय ऊना ने आपसी सहमति से तलाक की याचिका मंजूर करते हुए दंपती का विवाह विच्छेद कर दिया। दोनों के बीच 4.76 लाख रुपये के स्थायी गुजारा भत्ते समेत अन्य मामलों को लेकर समझौता हुआ। छह माह की वैधानिक अवधि पूरी होने के बाद भी दोनों ने साथ रहने से इन्कार किया और अपने फैसले पर कायम रहे।
मामले के अनुसार दंपती का विवाह 30 नवंबर 2020 को ऊना में हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। विवाह के बाद दोनों पंचकूला में पति-पत्नी के रूप में रहने लगे। कुछ समय बाद उनके बीच मतभेद पैदा हो गए। इसके बाद दोनों 13 जुलाई 2023 से अलग रहने लगे। दंपती की कोई संतान नहीं है।
दोनों ने परिवार न्यायालय में संयुक्त याचिका दायर कर बताया कि उनके बीच मतभेद इस स्तर तक पहुंच चुके हैं कि अब साथ रहने की संभावना नहीं है। दोनों ने आपसी सहमति से सभी विवाद खत्म करने पर सहमति जताई। समझौते के तहत पत्नी को कुल 4.76 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता देने पर सहमति बनी। इसमें पहली मोशन के दौरान 2.76 लाख और दूसरी मोशन के दौरान दो लाख रुपये का भुगतान किया गया। समझौते में मोटरसाइकिल के ऋण से संबंधित दस्तावेज और एनओसी उपलब्ध कराने के साथ सोने-चांदी के आभूषण लौटाने की शर्त भी शामिल रही। दोनों पक्षों ने भविष्य में एक-दूसरे के जीवन में हस्तक्षेप नहीं करने और सभी दावों का अंतिम रूप से निपटारा करने पर सहमति जताई। अदालत में दोनों के पहले और दूसरे मोशन के बयान 28 फरवरी और 23 सितंबर 2026 को दर्ज किए गए। छह माह की वैधानिक अवधि पूरी होने के बाद दोनों फिर अदालत में पहुंचे। अदालत ने पुनर्मिलन की संभावना तलाशने के साथ दोनों की सहमति अलग-अलग भी जानी। दोनों ने स्पष्ट किया कि वे विवाह संबंध खत्म करना चाहते हैं और उनके बीच अब कोई बकाया विवाद नहीं है। अदालत ने दोनों के बयानों के आधार पर माना कि उनकी वैवाहिक स्थिति सामान्य होने की संभावना नहीं है। अदालत ने यह भी संतुष्टि की कि दोनों की सहमति स्वेच्छा से है और किसी दबाव, धोखे या प्रभाव में नहीं ली गई है। इसके बाद अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश प्रथम, परिवार न्यायालय ऊना राजिंदर कुमार ने 26 सितंबर को याचिका मंजूर करते हुए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से तलाक की डिक्री जारी कर दी। दोनों पक्षों को समझौते और अदालत में दिए गए बयानों का पालन करने के लिए बाध्य किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मामले के अनुसार दंपती का विवाह 30 नवंबर 2020 को ऊना में हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। विवाह के बाद दोनों पंचकूला में पति-पत्नी के रूप में रहने लगे। कुछ समय बाद उनके बीच मतभेद पैदा हो गए। इसके बाद दोनों 13 जुलाई 2023 से अलग रहने लगे। दंपती की कोई संतान नहीं है।
विज्ञापन
दोनों ने परिवार न्यायालय में संयुक्त याचिका दायर कर बताया कि उनके बीच मतभेद इस स्तर तक पहुंच चुके हैं कि अब साथ रहने की संभावना नहीं है। दोनों ने आपसी सहमति से सभी विवाद खत्म करने पर सहमति जताई। समझौते के तहत पत्नी को कुल 4.76 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता देने पर सहमति बनी। इसमें पहली मोशन के दौरान 2.76 लाख और दूसरी मोशन के दौरान दो लाख रुपये का भुगतान किया गया। समझौते में मोटरसाइकिल के ऋण से संबंधित दस्तावेज और एनओसी उपलब्ध कराने के साथ सोने-चांदी के आभूषण लौटाने की शर्त भी शामिल रही। दोनों पक्षों ने भविष्य में एक-दूसरे के जीवन में हस्तक्षेप नहीं करने और सभी दावों का अंतिम रूप से निपटारा करने पर सहमति जताई। अदालत में दोनों के पहले और दूसरे मोशन के बयान 28 फरवरी और 23 सितंबर 2026 को दर्ज किए गए। छह माह की वैधानिक अवधि पूरी होने के बाद दोनों फिर अदालत में पहुंचे। अदालत ने पुनर्मिलन की संभावना तलाशने के साथ दोनों की सहमति अलग-अलग भी जानी। दोनों ने स्पष्ट किया कि वे विवाह संबंध खत्म करना चाहते हैं और उनके बीच अब कोई बकाया विवाद नहीं है। अदालत ने दोनों के बयानों के आधार पर माना कि उनकी वैवाहिक स्थिति सामान्य होने की संभावना नहीं है। अदालत ने यह भी संतुष्टि की कि दोनों की सहमति स्वेच्छा से है और किसी दबाव, धोखे या प्रभाव में नहीं ली गई है। इसके बाद अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश प्रथम, परिवार न्यायालय ऊना राजिंदर कुमार ने 26 सितंबर को याचिका मंजूर करते हुए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से तलाक की डिक्री जारी कर दी। दोनों पक्षों को समझौते और अदालत में दिए गए बयानों का पालन करने के लिए बाध्य किया गया है।
विज्ञापन