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अर्पितभाव से किया गया कर्म ही दिव्य तप : जोशी
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हरि शाह दरबार अंबोआ में चल रही गोमद्भागवत कथा में उमड़ी भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
दौलतपुर चौक (ऊना)। पंडित हरि शाह दरबार में चल रही 26वीं गोमद्भागवत कथा के दूसरे दिन भी भक्तों की भीड़ उमड़ी। विशेष रूप से धर्मशाला महंता के गद्दीनशीन उपेंद्र पराशर उपस्थित हुए। उन्होंने प्रवचनों में उपस्थित भक्तों से कथाओं का अनुसरण करने और सही मार्ग चुनने के लिए प्रेरित किया। भक्तों से कहा कि भगवान का नाम सुमिरण करना चाहिए। इससे भगवान का पूर्णरूप से आशीर्वाद मिलता है। कथावाचक कृष्ण कन्हैया जोशी ने कथा का वर्णन करते हुए सती, ध्रुव चरित्र की कथा सुनाई। कहा कि अर्पितभाव से किया गया कर्म ही दिव्य तप समान होता है।इसके बाद ऋषभ देव के चरित्र वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य को ऋषभ देव जैसा आदर्श पिता होना चाहिए, जिन्होंने अपने पुत्रों को समझाया कि इस मानव शरीर को पाकर दिव्य तप करना चाहिए, जिससे अंतकरण की शुद्धि हो, तभी उसे अनंत सुख की प्राप्ति हो सकती है। भगवान को अर्पित भाव से किया गया कर्म ही दिव्य तप है। इस अवसर पर गद्दीनशीन बाबा राकेश शाह ने उपस्थित भक्तों को गोसेवा के लिए प्रेरित किया और भक्तों को भजन सुनाकर भाव विभोर कर दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
दौलतपुर चौक (ऊना)। पंडित हरि शाह दरबार में चल रही 26वीं गोमद्भागवत कथा के दूसरे दिन भी भक्तों की भीड़ उमड़ी। विशेष रूप से धर्मशाला महंता के गद्दीनशीन उपेंद्र पराशर उपस्थित हुए। उन्होंने प्रवचनों में उपस्थित भक्तों से कथाओं का अनुसरण करने और सही मार्ग चुनने के लिए प्रेरित किया। भक्तों से कहा कि भगवान का नाम सुमिरण करना चाहिए। इससे भगवान का पूर्णरूप से आशीर्वाद मिलता है। कथावाचक कृष्ण कन्हैया जोशी ने कथा का वर्णन करते हुए सती, ध्रुव चरित्र की कथा सुनाई। कहा कि अर्पितभाव से किया गया कर्म ही दिव्य तप समान होता है।इसके बाद ऋषभ देव के चरित्र वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य को ऋषभ देव जैसा आदर्श पिता होना चाहिए, जिन्होंने अपने पुत्रों को समझाया कि इस मानव शरीर को पाकर दिव्य तप करना चाहिए, जिससे अंतकरण की शुद्धि हो, तभी उसे अनंत सुख की प्राप्ति हो सकती है। भगवान को अर्पित भाव से किया गया कर्म ही दिव्य तप है। इस अवसर पर गद्दीनशीन बाबा राकेश शाह ने उपस्थित भक्तों को गोसेवा के लिए प्रेरित किया और भक्तों को भजन सुनाकर भाव विभोर कर दिया।