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Una News: बेहड़ जसवां पंचायत में महिला आरक्षण से बदले सियासी समीकरण
Sat, 18 Apr 2026 01:41 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sat, 18 Apr 2026 01:41 AM IST
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बड़ूही (ऊना)। उपमंडल अंब के तहत ग्राम पंचायत बेहड़ जसवां में इस बार पंचायत चुनाव दिलचस्प ही नहीं बल्कि पूरी तरह से समीकरण बदलने वाले साबित हो रहे हैं। प्रधान पद महिला वर्ग के लिए आरक्षित होते ही पंचायत की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जहां एक ओर नए महिला चेहरे मैदान में उतरने को तैयार हैं। वहीं पुराने दावेदारों के सपनों को बड़ा झटका लगा है।
चुनावी सरगर्मियां अब खुले तौर पर दिखाई देने लगी हैं। संभावित महिला उम्मीदवार गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क साध रही हैं लेकिन इस बार जनता का मूड साफ है कि सिर्फ वादों से काम नहीं चलेगा, काम करके दिखाना होगा। हालांकि पंचायत में पिछले कुछ समय में करीब चार करोड़ रुपये के विकास कार्य करवाए गए हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। ग्रामीणों में इन कार्यों को लेकर असंतोष साफ नजर आ रहा है। लोगों का कहना है कि कागजों में विकास हुआ है लेकिन असल में बुनियादी सुविधाएं अब भी अधूरी हैं। पंचायत के कई वार्ड आज भी पक्के रास्तों के इंतजार में हैं। बच्चों के लिए खेल मैदान नहीं, सफाई व्यवस्था बदहाल, श्मशानघाट और सामुदायिक भवन जैसी जरूरी सुविधाएं तक पूरी नहीं हो पाई हैं। चक्क गांव के लोग लंबे समय से श्मशानघाट और सामुदायिक भवन की मांग कर रहे हैं लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। वहीं खत्रीयां से सुनयारा होते हुए गगरोला को जाने वाला रास्ता लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। खराब सड़क के चलते रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। पिछले चुनाव में यह सीट अनुसूचित जाति महिला वर्ग के लिए आरक्षित थी। जिसमें नीलम कुमारी ने एक तरफा जीत हासिल की थी लेकिन इस बार सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षण होने से मुकाबला पूरी तरह खुला और रोमांचक हो गया है। भौगोलिक दृष्टि से बेहड जसवां पंचायत बड़ी पंचायत है। पंचायत के सात वार्डों में से चार महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। जिससे साफ है कि इस बार महिला नेतृत्व की परीक्षा भी है और मौका भी।
ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें ऐसा प्रतिनिधि चाहिए जो चुनाव जीतने के बाद गायब न हो जाए, बल्कि हर समस्या के समाधान के लिए जमीन पर काम करे।
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चुनावी सरगर्मियां अब खुले तौर पर दिखाई देने लगी हैं। संभावित महिला उम्मीदवार गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क साध रही हैं लेकिन इस बार जनता का मूड साफ है कि सिर्फ वादों से काम नहीं चलेगा, काम करके दिखाना होगा। हालांकि पंचायत में पिछले कुछ समय में करीब चार करोड़ रुपये के विकास कार्य करवाए गए हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। ग्रामीणों में इन कार्यों को लेकर असंतोष साफ नजर आ रहा है। लोगों का कहना है कि कागजों में विकास हुआ है लेकिन असल में बुनियादी सुविधाएं अब भी अधूरी हैं। पंचायत के कई वार्ड आज भी पक्के रास्तों के इंतजार में हैं। बच्चों के लिए खेल मैदान नहीं, सफाई व्यवस्था बदहाल, श्मशानघाट और सामुदायिक भवन जैसी जरूरी सुविधाएं तक पूरी नहीं हो पाई हैं। चक्क गांव के लोग लंबे समय से श्मशानघाट और सामुदायिक भवन की मांग कर रहे हैं लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। वहीं खत्रीयां से सुनयारा होते हुए गगरोला को जाने वाला रास्ता लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। खराब सड़क के चलते रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। पिछले चुनाव में यह सीट अनुसूचित जाति महिला वर्ग के लिए आरक्षित थी। जिसमें नीलम कुमारी ने एक तरफा जीत हासिल की थी लेकिन इस बार सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षण होने से मुकाबला पूरी तरह खुला और रोमांचक हो गया है। भौगोलिक दृष्टि से बेहड जसवां पंचायत बड़ी पंचायत है। पंचायत के सात वार्डों में से चार महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। जिससे साफ है कि इस बार महिला नेतृत्व की परीक्षा भी है और मौका भी।
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ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें ऐसा प्रतिनिधि चाहिए जो चुनाव जीतने के बाद गायब न हो जाए, बल्कि हर समस्या के समाधान के लिए जमीन पर काम करे।