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Una News: लठियाणी जिला परिषद सीट पर फिर महिला आरक्षण
Thu, 16 Apr 2026 12:26 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Thu, 16 Apr 2026 12:26 AM IST
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ऊना। लठियाणी जिला परिषद वार्ड का इतिहास बदलते आरक्षण और रोचक चुनावी मुकाबलों से भरा हुआ है। पहले धुंदला–मुच्छाली के नाम से जानी जाने वाली यह सीट अब लठियाणी जिला परिषद वार्ड के रूप में स्थापित हो चुकी है। यहां हर चुनाव में नए राजनीतिक समीकरण बनते हैं और मतदाता अलग संदेश देते आए हैं। चुनावी सफर पर एक नजर डाली जाए तो 1995 में महिला आरक्षण में कांग्रेस की उर्मिला शर्मा विजयी रहीं। भाजपा की विमला देवी को हार का सामना करना पड़ा जबकि बागी मोहन देई ने मुकाबला रोचक बनाया। वर्ष 2000 में अनारक्षित सीट पर भाजपा के बागी देस राज मोदगिल ने चार हजार से अधिक मतों से जीत दर्ज कर बड़ा उलटफेर किया। भाजपा ने जगत राम को प्रत्याशी बनाया था। कांग्रेस विचारधारा से ज्ञान चंद शर्मा, राजेन्द्र सिंह, उर्मिला शर्मा ने भी चुनाव लड़ा। देस राज मोदगिल की लहर में सब हार गए थे। वर्ष 2005 में अनुसूचित जाति आरक्षण में भाजपा के करमचंद ने कांग्रेस के महेंद्र सिंह को हराया। वर्ष में 2010 में महिला आरक्षण में बागी उम्मीदवारों के चलते वोट बंटे और भाजपा को नुकसान उठाना पड़ा। भाजपा ने शकुंतला देवी को उम्मीदवार बनाया। कांग्रेस ने सत्या देवी को। भाजपा की बागी सुनीता खरेयाल के कारण सत्या देवी जीत गई। वर्ष 2015 में अनुसूचित जाति महिला सीट पर भाजपा की इंदुबाला ने जीत दर्ज की। इंदुबाला के मुकाबले में कांग्रेस ने सुमन लता को चुनाव मैदान में उतारा था। सीधे मुकाबले में भाजपा जीती जबकि 2021 में महिला सीट पर कांग्रेस की सत्या देवी ने जीत हासिल की। यह भी देखा गया कि बागियों की मौजूदगी में भाजपा को नुकसान हुआ। भाजपा ने उर्मिला ठाकुर को उम्मीदवार बनाया था। सत्ता विरोधी लहर का असर हुआ।
इस बार फिर सीट महिला वर्ग के लिए सीट रक्षित होने से राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कई पुरुष दावेदार, जो चुनाव लड़ने की तैयारी में थे, अब निराश नजर आ रहे हैं। अब परिवार की महिला सदस्यों को आगे लाने की रणनीतिक तौर पर चर्चाएं जारी हैं जिससे नए महिला चेहरों की एंट्री तय है। लठियाणी जिला परिषद सीट पर जीत केवल पार्टी की नहीं, बल्कि समीकरणों और परिस्थितियों की होती है। यहां हर चुनाव एक नई कहानी लिखता है। लठियाणी जिला परिषद सीट का इतिहास यह स्पष्ट करता है कि यहां चुनाव केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं बल्कि आरक्षण, स्थानीय परिस्थितियों और व्यक्तिगत समीकरणों के आधार पर तय होते हैं। 2026 का चुनाव एक बार फिर नए चेहरे, नई रणनीति और कड़े मुकाबले का गवाह बनने जा रहा है।
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इस बार फिर सीट महिला वर्ग के लिए सीट रक्षित होने से राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कई पुरुष दावेदार, जो चुनाव लड़ने की तैयारी में थे, अब निराश नजर आ रहे हैं। अब परिवार की महिला सदस्यों को आगे लाने की रणनीतिक तौर पर चर्चाएं जारी हैं जिससे नए महिला चेहरों की एंट्री तय है। लठियाणी जिला परिषद सीट पर जीत केवल पार्टी की नहीं, बल्कि समीकरणों और परिस्थितियों की होती है। यहां हर चुनाव एक नई कहानी लिखता है। लठियाणी जिला परिषद सीट का इतिहास यह स्पष्ट करता है कि यहां चुनाव केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं बल्कि आरक्षण, स्थानीय परिस्थितियों और व्यक्तिगत समीकरणों के आधार पर तय होते हैं। 2026 का चुनाव एक बार फिर नए चेहरे, नई रणनीति और कड़े मुकाबले का गवाह बनने जा रहा है।
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