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Una News: बिना बारिश गेहूं की फसल पर मंडराए संकट के बादल
Tue, 18 Feb 2025 07:37 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 18 Feb 2025 07:37 AM IST
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ऊना के रामपुर क्षेत्र में बिना बारिश पीली होने लगी गेंहू की फसल। -संवाद
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ऊना। जिला ऊना में गेहूं की फसल पीला रतुआ रोग की चपेट में आ गई है। खासकर गैर-सिंचित क्षेत्रों में यह रोग तेजी से फैल रहा है। जिन इलाकों में समय पर सिंचाई, खाद और कीटनाशकों का छिड़काव नहीं हुआ, वहां फसल की वृद्धि रुक गई है और पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि विभाग ने किसानों से सतर्क रहने और उचित उपाय अपनाने की सलाह दी है।
जानकारी के अनुसार जिला ऊना में करीब 35,000 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की फसल तैयार हो रही है। इसमें से 65 फीसदी क्षेत्र बारिश पर निर्भर है। इस बार समय पर वर्षा न होने से मिट्टी में नमी की कमी बनी रही। इससे किसान समय पर खाद और कीटनाशकों का छिड़काव नहीं कर पाए हैं। इससे भी फसल प्रभावित हो रही है। अब कई जगहों पर पीला रतुआ रोग तेजी से फैल रहा है, जिससे पैदावार में गिरावट आने की आशंका है।
रविंद्र कुमार, सुनील, अमनदीप, विवेक और कृष्ण कुमार आदि किसान बताते हैं कि सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्रों में फसल की स्थिति बेहतर है, लेकिन बारिश पर निर्भर इलाकों में फसल कमजोर पड़ रही है। साथ ही पीला रतुआ रोग तेजी से फैलने लगा है। किसानों का कहना है कि अगर इस बार खाने लायक भी फसल मिल जाए, तो बहुत होगा।
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विशेषज्ञों के अनुसार फसल के पीला पड़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें खाद की कमी, जड़ों की खराबी, सूखी मिट्टी, देर से रोपण और दिन में अधिक तापमान शामिल हैं। इस समय रात का तापमान 5 डिग्री तक गिर रहा है, जबकि दिन में यह 30 डिग्री तक पहुंच रहा है। यह तापमान का भारी अंतर फसल की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
जिला कृषि विभाग के उपनिदेशक कुलभूषण धीमान का कहना है कि जिला में अधिकांश इलाकों में गेहूं की फसल अच्छी स्थिति में है। कुछ गैर सिंचित क्षेत्रों में फसल पीली पड़ने की शिकायतें हो सकती हैं, लेकिन अब तक किसानों ने आधिकारिक रूप से कोई सूचना नहीं दी है। कृषि विभाग जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में निरीक्षण करेगा। किसान समस्या आने पर विभाग के अधिकारियों से परामर्श लें।
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जानकारी के अनुसार जिला ऊना में करीब 35,000 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की फसल तैयार हो रही है। इसमें से 65 फीसदी क्षेत्र बारिश पर निर्भर है। इस बार समय पर वर्षा न होने से मिट्टी में नमी की कमी बनी रही। इससे किसान समय पर खाद और कीटनाशकों का छिड़काव नहीं कर पाए हैं। इससे भी फसल प्रभावित हो रही है। अब कई जगहों पर पीला रतुआ रोग तेजी से फैल रहा है, जिससे पैदावार में गिरावट आने की आशंका है।
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रविंद्र कुमार, सुनील, अमनदीप, विवेक और कृष्ण कुमार आदि किसान बताते हैं कि सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्रों में फसल की स्थिति बेहतर है, लेकिन बारिश पर निर्भर इलाकों में फसल कमजोर पड़ रही है। साथ ही पीला रतुआ रोग तेजी से फैलने लगा है। किसानों का कहना है कि अगर इस बार खाने लायक भी फसल मिल जाए, तो बहुत होगा।
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विशेषज्ञों के अनुसार फसल के पीला पड़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें खाद की कमी, जड़ों की खराबी, सूखी मिट्टी, देर से रोपण और दिन में अधिक तापमान शामिल हैं। इस समय रात का तापमान 5 डिग्री तक गिर रहा है, जबकि दिन में यह 30 डिग्री तक पहुंच रहा है। यह तापमान का भारी अंतर फसल की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
जिला कृषि विभाग के उपनिदेशक कुलभूषण धीमान का कहना है कि जिला में अधिकांश इलाकों में गेहूं की फसल अच्छी स्थिति में है। कुछ गैर सिंचित क्षेत्रों में फसल पीली पड़ने की शिकायतें हो सकती हैं, लेकिन अब तक किसानों ने आधिकारिक रूप से कोई सूचना नहीं दी है। कृषि विभाग जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में निरीक्षण करेगा। किसान समस्या आने पर विभाग के अधिकारियों से परामर्श लें।