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Una News: आलू की फसल में खरपतवार का प्रकोप
Fri, 25 Sep 2026 01:07 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 25 Sep 2026 01:07 AM IST
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ऊना। जिले में आलू की बिजाई के बाद अब किसानों की चिंता खरपतवार ने बढ़ा दी है। पिछले दिनों हुई अच्छी बारिश के बाद करीब 15 दिन पहले बीजी की गई आलू की फसल में घास तेजी से उगने लगी है।
इससे फसल की वृद्धि प्रभावित होने की आशंका के चलते किसानों ने मजदूरों की मदद से खरपतवारनाशक दवाओं का छिड़काव शुरू कर दिया है। वहीं, गर्म मौसम को देखते हुए आलू की फसल को पर्याप्त नमी देने के लिए सिंचाई का काम भी शुरू हो गया है।
जिले में इस बार करीब 2000 हेक्टेयर भूमि पर आलू की फसल तैयार हो रही है। किसानों के अनुसार करीब 50 फीसदी क्षेत्र में आलू की बिजाई निर्धारित समय पर हो गई थी जबकि शेष क्षेत्र में बिजाई का काम करीब 20 सितंबर के आसपास पूरा हुआ है।
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शुरुआती दौर में हुई बारिश से फसल को नमी मिली, लेकिन इसके साथ खेतों में खरपतवार भी तेजी से पनप गया। किसानों रणवीर सिंह, विजय कुमार, राकेश सैनी, बलवीर सिंह और राकेश कुमार ने बताया कि बीते दिनों हुई बारिश के बाद खेतों में घास तेजी से उग रही है।
यदि समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया जाए तो यह आलू के पौधों के साथ पोषक तत्वों और नमी के लिए प्रतिस्पर्धा करती है। इससे फसल की वृद्धि दर प्रभावित हो सकती है। इसी कारण किसान अब दवा के छिड़काव के साथ खेतों में मजदूरों की मदद से खरपतवार हटाने में भी जुटे हैं।
किसानों ने बताया कि खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए उन्हें प्रति कनाल करीब 150 से 200 रुपये तक का खर्च करना पड़ रहा है। इसमें दवा और मजदूरी शामिल है। मजदूरों की जरूरत पड़ने से खेती की लागत भी बढ़ रही है।
किसानों का कहना है कि शुरुआती अवस्था में खरपतवार पर नियंत्रण करना जरूरी है ताकि आलू के पौधों को पर्याप्त पोषक तत्व और नमी मिल सके। उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर ने बताया कि आलू की फसल की शुरुआती अवस्था में खेत को खरपतवार मुक्त रखना जरूरी है।
खरपतवार फसल के साथ पोषक तत्वों, पानी और अन्य संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है।
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इससे फसल की वृद्धि प्रभावित होने की आशंका के चलते किसानों ने मजदूरों की मदद से खरपतवारनाशक दवाओं का छिड़काव शुरू कर दिया है। वहीं, गर्म मौसम को देखते हुए आलू की फसल को पर्याप्त नमी देने के लिए सिंचाई का काम भी शुरू हो गया है।
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जिले में इस बार करीब 2000 हेक्टेयर भूमि पर आलू की फसल तैयार हो रही है। किसानों के अनुसार करीब 50 फीसदी क्षेत्र में आलू की बिजाई निर्धारित समय पर हो गई थी जबकि शेष क्षेत्र में बिजाई का काम करीब 20 सितंबर के आसपास पूरा हुआ है।
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शुरुआती दौर में हुई बारिश से फसल को नमी मिली, लेकिन इसके साथ खेतों में खरपतवार भी तेजी से पनप गया। किसानों रणवीर सिंह, विजय कुमार, राकेश सैनी, बलवीर सिंह और राकेश कुमार ने बताया कि बीते दिनों हुई बारिश के बाद खेतों में घास तेजी से उग रही है।
यदि समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया जाए तो यह आलू के पौधों के साथ पोषक तत्वों और नमी के लिए प्रतिस्पर्धा करती है। इससे फसल की वृद्धि दर प्रभावित हो सकती है। इसी कारण किसान अब दवा के छिड़काव के साथ खेतों में मजदूरों की मदद से खरपतवार हटाने में भी जुटे हैं।
किसानों ने बताया कि खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए उन्हें प्रति कनाल करीब 150 से 200 रुपये तक का खर्च करना पड़ रहा है। इसमें दवा और मजदूरी शामिल है। मजदूरों की जरूरत पड़ने से खेती की लागत भी बढ़ रही है।
किसानों का कहना है कि शुरुआती अवस्था में खरपतवार पर नियंत्रण करना जरूरी है ताकि आलू के पौधों को पर्याप्त पोषक तत्व और नमी मिल सके। उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर ने बताया कि आलू की फसल की शुरुआती अवस्था में खेत को खरपतवार मुक्त रखना जरूरी है।
खरपतवार फसल के साथ पोषक तत्वों, पानी और अन्य संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है।