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Una News: पंचायत जलग्रां टब्बा के ग्रामीण लोकसभा चुनावों का करेंगे बहिष्कार
Sat, 18 May 2024 03:34 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sat, 18 May 2024 03:34 AM IST
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जलग्रां टब्बा में रेलवे लाईन पार पुल न होने के चलते प्रदर्शन करते ग्रामीण।संवाद
ऊना। जिला के सदर विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाली ग्राम पंचायत जलग्रां टब्बा के वार्ड नंबर पांच रक्कड कॉलोनी के लोगों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने का बिगुल बजा दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 14 सालों से यहां की रेलवे लाइन के ऊपर पुल नहीं बनाया गया है, जिसके चलते ग्रामीणों को आने-जाने के लिए 24 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके अपने गंतव्य की ओर रोजाना जाना पड़ रहा है। इससे ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि 1980 से यह समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल ने इस क्षेत्र की जनता की इस समस्या का समाधान करने की दिशा में कोई भी पहल आज दिन तक नहीं की है। कई बार केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर और सदर के विधायक से भी मिल चुके हैं और सैकड़ों बार पत्राचार भी कर चुके हैं, लेकिन इस दिशा में एक इंच भी काम नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि रेलवे विभाग का पैसा भी मंजूर होकर आया, लेकिन काम शुरू करने के लिए प्रदेश सरकार ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसके चलते वर्तमान में होने जा रहे लोकसभा चुनाव को लेकर ग्रामीणों ने बहिष्कार करने का मन बना लिया है। इस संदर्भ में शुक्रवार को रेलवे लाइन के पास रक्कड़ कॉलोनीवासियों ने एकत्रित होकर जहां एक ओर जमकर नारेबाजी की। वहीं, दूसरी ओर धरना-प्रदर्शन भी किया और अपनी नाराजगी जाहिर की और बताया कि अगर अभी भी हालत नहीं सुधरे तो ग्रामीणों को मजबूर होकर आंदोलन का रूप अख्तियार करना पड़ेगा। इसके लिए प्रशासन और सरकार जिम्मेदार होगी।
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ग्रामीणों का कहना है कि 2007 में रेलवे विभाग ने तमाम तरह की औरचारिकताओं को तो पूरा करते हुए लाइन के ऊपर पुल बनाने को मंजूरी प्रदान कर दी, लेकिन इस दिशा में प्रदेश सरकार अभी तक गंभीरता से निर्णय लेने में आगे नहीं आई है, जिसका खामियाजा वर्तमान में क्षेत्र की जनता को भुगतना पड रहा है। ग्रामीणों में आशा वर्कर संतोष कुमारी और आंगनबाड़ी वर्कर कंचना का कहना है कि इस क्षेत्र के लिए आपातकाल में भी एबुलेंस तक नहीं ले जा सकते हैं। अधिकतर बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र में जाने-आने के लिए भी इस कॉलोनी से होकर जाते हैं। बुजुर्गो और बीमार लोगों को रोजाना खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अब देखने होगा कि आने वाले समय में कौन से राजनीतिक दल का नेता यहां पर जाकर लोगों की समस्याओं का समाधान करने की हामी भरता है। यह काफी रोचक पहलू होगा, क्योंकि वर्तमान में लोकसभा चुनाव हो रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों की समस्या लाजमी है और इसका समाधान किए जाने की सूरत में किसी न किसी राजनीतिक दल को सीधे तौर पर ग्रामीणों के आक्रोश का शिकार होना पड़ सकता है।
उधर, एसडीएम विश्व मोहन देव चौहान का कहना है कि समस्या ध्यान में लाई गई है। जल्द ही जनहित के लिए सयुंक्त निरीक्षण रेलवे विभाग के अधिकारियों के साथ किया जाएगा।
सचित्र
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ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 14 सालों से यहां की रेलवे लाइन के ऊपर पुल नहीं बनाया गया है, जिसके चलते ग्रामीणों को आने-जाने के लिए 24 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके अपने गंतव्य की ओर रोजाना जाना पड़ रहा है। इससे ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि 1980 से यह समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल ने इस क्षेत्र की जनता की इस समस्या का समाधान करने की दिशा में कोई भी पहल आज दिन तक नहीं की है। कई बार केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर और सदर के विधायक से भी मिल चुके हैं और सैकड़ों बार पत्राचार भी कर चुके हैं, लेकिन इस दिशा में एक इंच भी काम नहीं हुआ है।
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उन्होंने कहा कि रेलवे विभाग का पैसा भी मंजूर होकर आया, लेकिन काम शुरू करने के लिए प्रदेश सरकार ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसके चलते वर्तमान में होने जा रहे लोकसभा चुनाव को लेकर ग्रामीणों ने बहिष्कार करने का मन बना लिया है। इस संदर्भ में शुक्रवार को रेलवे लाइन के पास रक्कड़ कॉलोनीवासियों ने एकत्रित होकर जहां एक ओर जमकर नारेबाजी की। वहीं, दूसरी ओर धरना-प्रदर्शन भी किया और अपनी नाराजगी जाहिर की और बताया कि अगर अभी भी हालत नहीं सुधरे तो ग्रामीणों को मजबूर होकर आंदोलन का रूप अख्तियार करना पड़ेगा। इसके लिए प्रशासन और सरकार जिम्मेदार होगी।
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ग्रामीणों का कहना है कि 2007 में रेलवे विभाग ने तमाम तरह की औरचारिकताओं को तो पूरा करते हुए लाइन के ऊपर पुल बनाने को मंजूरी प्रदान कर दी, लेकिन इस दिशा में प्रदेश सरकार अभी तक गंभीरता से निर्णय लेने में आगे नहीं आई है, जिसका खामियाजा वर्तमान में क्षेत्र की जनता को भुगतना पड रहा है। ग्रामीणों में आशा वर्कर संतोष कुमारी और आंगनबाड़ी वर्कर कंचना का कहना है कि इस क्षेत्र के लिए आपातकाल में भी एबुलेंस तक नहीं ले जा सकते हैं। अधिकतर बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र में जाने-आने के लिए भी इस कॉलोनी से होकर जाते हैं। बुजुर्गो और बीमार लोगों को रोजाना खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अब देखने होगा कि आने वाले समय में कौन से राजनीतिक दल का नेता यहां पर जाकर लोगों की समस्याओं का समाधान करने की हामी भरता है। यह काफी रोचक पहलू होगा, क्योंकि वर्तमान में लोकसभा चुनाव हो रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों की समस्या लाजमी है और इसका समाधान किए जाने की सूरत में किसी न किसी राजनीतिक दल को सीधे तौर पर ग्रामीणों के आक्रोश का शिकार होना पड़ सकता है।
उधर, एसडीएम विश्व मोहन देव चौहान का कहना है कि समस्या ध्यान में लाई गई है। जल्द ही जनहित के लिए सयुंक्त निरीक्षण रेलवे विभाग के अधिकारियों के साथ किया जाएगा।
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जलग्रां टब्बा में रेलवे लाईन पार पुल न होने के चलते प्रदर्शन करते ग्रामीण।संवाद