फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Una News ›   Veena Devi of Jol became self-reliant through natural farming

Una News: प्राकृतिक खेती से आत्मनिर्भर बनीं जोल की वीना देवी

Fri, 06 Feb 2026 12:24 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 06 Feb 2026 12:24 AM IST
विज्ञापन
Veena Devi of Jol became self-reliant through natural farming
बंगाणा में तीन हजार किसान 600 हेक्टेयर भूमि पर रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती अपना रहे
विज्ञापन

विभाग की ओर से समय-समय पर दिया जा रह प्रशिक्षण
राकेश राणा
बंगाणा (ऊना)। उपमंडल बंगाणा की पंचायतों के अधिकतर किसान प्राकृतिक खेती को अपना रहे हैं, जो उनके लिए वरदान साबित हो रही है। इसी कड़ी में जोल क्षेत्र की रहने वाली वीना देवी ने प्राकृतिक खेती अपनाकर खुद को आत्मनिर्भर बनाया है। बीते काफी समय से वीना देवी ने खेती करना छोड़ दिया था, जिसका मुख्य कारण महंगी खाद और रासायनिक दवाइयों की बढ़ती लागत थी। लेकिन, पिछले एक वर्ष से उन्होंने प्राकृतिक खेती से जुड़कर दोबारा खेती शुरू की और वर्तमान में वे 10 कनाल भूमि पर प्राकृतिक तरीके से खेती कर रही हैं।
वीना देवी ने जून 2025 में 20 किलोग्राम अदरक का बीज 150 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा, जिस पर लगभग 3000 रुपये की लागत आई। जनवरी 2026 में उन्हें 100 किलोग्राम से अधिक अदरक की पैदावार प्राप्त हुई। प्राकृतिक तरीके से उगाया गया अदरक आसपास के लोग 150 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीद रहे हैं। अब तक वे लगभग 15,000 रुपये का अदरक बेच चुकी हैं।
विज्ञापन

अदरक के साथ-साथ वीना देवी ने हल्दी की भी प्राकृतिक खेती की, जिससे उन्हें करीब 80 किलोग्राम हल्दी की पैदावार हुई है। प्राकृतिक खेती से उत्साहित होकर वे क्षेत्र के अन्य किसानों को भी इस पद्धति के प्रति जागरूक करने में जुटी हुई हैं। वर्तमान में वीना देवी गेहूं, चना, सरसों और मटर की मिश्रित खेती कर रही हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने प्याज, देसी लहसुन और अमेरिकन लहसुन की भी प्राकृतिक विधि से खेती की है, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा होने की उम्मीद है। उपमंडल बंगाणा में लगभग तीन हजार किसान खुशहाल किसान योजना के तहत करीब 600 हेक्टेयर भूमि पर रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती अपना रहे हैं। किसानों को समय-समय पर घर-घर जाकर प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे मिट्टी की सेहत के साथ-साथ किसानों की आय में भी सुधार हो सके। सरकार पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीकों के समन्वय से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है, जिसमें देसी गाय के गोबर और गोमूत्र का उपयोग, जैविक इनपुट तथा उत्पादों को बाजार तक पहुंच दिलाना शामिल है। खंड तकनीक प्रबंधक कृषि विभाग (आत्मा परियोजना) रवि कुमार ने बताया कि वीना देवी क्षेत्र में प्राकृतिक खेती के माध्यम से न केवल जहर-मुक्त खेती कर रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर अन्य किसानों के लिए प्रेरणा भी बन रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed