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Una News: ऊना की अनु ने पिन पार्वती का दुर्गम पहाड़ी मार्ग किया फतह
Thu, 27 Jun 2024 06:43 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Thu, 27 Jun 2024 06:43 AM IST
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दल ने 18 हजार की ऊंचाई को पार कर लहराया तिरंगा
दिल्ली, बंगलूरू के सदस्यों के साथ 2024 के पहले दल में हुई शामिल
खतरों से खेलने की शौकीन हैं रायपुर सहोड़ा की बेटी
एसडी शर्मा
मैहतपुर (ऊना)। ऊना की बेटी ने बतौर ट्रैकर पिन पार्वती के दुर्गम, बर्फ से लदी और बेहद खतरनाक पहाड़ी मार्ग को पार करते हुए कीर्तिमान स्थापित किया है। जिद, जुनून, जज्बे और साहस को बटोर कर तथा जान को हथेली पर रखकर अपने दल के साथियों के साथ जब यह सफर शुरू किया तो उन्हें यकीन था कि वे पिन पार्वती घाटी को पार कर पाएंगी।
मंगलवार को अनु सहोड़ दो साथी ट्रैकरों के साथ अपने घर गांव रायपुर सहोड़ा पहुंचीं तो पिता रामचंद्र सहोड़ तथा छोटे भाई चंदामक्षु ने गर्मजोशी से स्वागत किया। अनु ने बताया कि उनके दल में बंगलूरू से गिरीश आर, कर्नाटक से अनीता, दिल्ली से पुनीत, अंकित, नवनीत, केरल से अरुण, मुंबई से विवेक तथा गुजरात से ध्रुव शामिल थे। तीन गाइड उनके दल के साथ रहे।
पिन पार्वती लोकप्रिय ट्रैकिंग मार्ग है। उन्होंने 15 जून को कसोल से ट्रैकिंग शुरू की। करीब 11 किलोमीटर मार्ग तय करके वे खीर गंगा पहुंचे। खीर गंगा से टुंडा भुज, ठाकुर कुआं, ओडिथाच, मंतलाई से पार्वती बेस कैंप होते हुए उनका सफर नौ दिन बाद काजा में समाप्त हुआ। अनु सहोड़ ने बताया कि लगभग 17450 फीट ऊंचाई पर यह पहाड़ी दर्रा स्थित है और इस बेहद खूबसूरत ट्रैकिंग मार्ग को फतेह करने के लिए करीब 98 किलोमीटर का रास्ता जो बेहद कठिन और जान को जोखिम में डालने वाला है, उसे हमारे दल ने फतेह किया है।
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कोरोना काल के दौरान 2020 में अनु ने ट्रैकिंग के इस जोखिम पूर्ण मार्ग को चुना और सबसे पहले केजीएल (कश्मीर ग्रेट लेक्स) की 14000 फीट की पहाड़ी को पार करके इसकी शुरुआत की थी। इसके बाद अनु अमतापास, वालीपास, नाग टिब्बा तथा बुरानघाटी पर ट्रैकिंग कर चुकी है। बेंगलुरु के 38 वर्षीय बॉक्सर तथा ट्रैकर गिरीशआर के मुताबिक 2024 का हमारा यह प्रथम दल है, जिसने पिन पार्वती के इस बेहद जोखिम पूर्ण मार्ग को फतह किया है। बंगलुरु की 41 वर्षीय अनीता जो दो बच्चों की मां भी हैं, ने बताया कि ट्रैकिंग पर जाना उनका शौक है। कहा कि इसमें हर कदम पर हालांकि मौत का खतरा भी बराबर रहता है। अनु सहोड़ ने कहा कि चारों ओर बर्फ, ऊंची पहाड़ियां, बेहद खूबसूरत दृश्य, जान हथेली पर रखकर आगे बढ़ते रहने का जज्बा आप को किसी दूसरी दुनिया में ले जाता है, बस इसी एडवेंचर को पाने के लिए उसने इस मार्ग को चुना है।
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दिल्ली, बंगलूरू के सदस्यों के साथ 2024 के पहले दल में हुई शामिल
खतरों से खेलने की शौकीन हैं रायपुर सहोड़ा की बेटी
एसडी शर्मा
मैहतपुर (ऊना)। ऊना की बेटी ने बतौर ट्रैकर पिन पार्वती के दुर्गम, बर्फ से लदी और बेहद खतरनाक पहाड़ी मार्ग को पार करते हुए कीर्तिमान स्थापित किया है। जिद, जुनून, जज्बे और साहस को बटोर कर तथा जान को हथेली पर रखकर अपने दल के साथियों के साथ जब यह सफर शुरू किया तो उन्हें यकीन था कि वे पिन पार्वती घाटी को पार कर पाएंगी।
मंगलवार को अनु सहोड़ दो साथी ट्रैकरों के साथ अपने घर गांव रायपुर सहोड़ा पहुंचीं तो पिता रामचंद्र सहोड़ तथा छोटे भाई चंदामक्षु ने गर्मजोशी से स्वागत किया। अनु ने बताया कि उनके दल में बंगलूरू से गिरीश आर, कर्नाटक से अनीता, दिल्ली से पुनीत, अंकित, नवनीत, केरल से अरुण, मुंबई से विवेक तथा गुजरात से ध्रुव शामिल थे। तीन गाइड उनके दल के साथ रहे।
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पिन पार्वती लोकप्रिय ट्रैकिंग मार्ग है। उन्होंने 15 जून को कसोल से ट्रैकिंग शुरू की। करीब 11 किलोमीटर मार्ग तय करके वे खीर गंगा पहुंचे। खीर गंगा से टुंडा भुज, ठाकुर कुआं, ओडिथाच, मंतलाई से पार्वती बेस कैंप होते हुए उनका सफर नौ दिन बाद काजा में समाप्त हुआ। अनु सहोड़ ने बताया कि लगभग 17450 फीट ऊंचाई पर यह पहाड़ी दर्रा स्थित है और इस बेहद खूबसूरत ट्रैकिंग मार्ग को फतेह करने के लिए करीब 98 किलोमीटर का रास्ता जो बेहद कठिन और जान को जोखिम में डालने वाला है, उसे हमारे दल ने फतेह किया है।
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कोरोना काल के दौरान 2020 में अनु ने ट्रैकिंग के इस जोखिम पूर्ण मार्ग को चुना और सबसे पहले केजीएल (कश्मीर ग्रेट लेक्स) की 14000 फीट की पहाड़ी को पार करके इसकी शुरुआत की थी। इसके बाद अनु अमतापास, वालीपास, नाग टिब्बा तथा बुरानघाटी पर ट्रैकिंग कर चुकी है। बेंगलुरु के 38 वर्षीय बॉक्सर तथा ट्रैकर गिरीशआर के मुताबिक 2024 का हमारा यह प्रथम दल है, जिसने पिन पार्वती के इस बेहद जोखिम पूर्ण मार्ग को फतह किया है। बंगलुरु की 41 वर्षीय अनीता जो दो बच्चों की मां भी हैं, ने बताया कि ट्रैकिंग पर जाना उनका शौक है। कहा कि इसमें हर कदम पर हालांकि मौत का खतरा भी बराबर रहता है। अनु सहोड़ ने कहा कि चारों ओर बर्फ, ऊंची पहाड़ियां, बेहद खूबसूरत दृश्य, जान हथेली पर रखकर आगे बढ़ते रहने का जज्बा आप को किसी दूसरी दुनिया में ले जाता है, बस इसी एडवेंचर को पाने के लिए उसने इस मार्ग को चुना है।