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Una News: मूसलाधार बारिश से मक्की की फसल को नुकसान
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किसान बाेले- खेतों में जलभराव के कारण फसलें गली
बरसात ने बढ़ाई किसानों की चिंता, मक्की की बिजाई को लेकर किसान पशोपेश में
कृषि विभाग की सलाह, दो-चार दिन के बाद ही करें मक्की की बिजाई
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले के कई स्थानों पर लगातार बारिश ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। पंचायत बेरियां और इसके आसपास के क्षेत्रों में मक्की की फसल को नुकसान हुआ है। खेतों में जलभराव के कारण फसलें गल गई हैं और उत्पादन लगभग शून्य हो गया है। किसानों मोहन सिंह, रविंदर कुमार और हंसराज ने बताया कि इस बार समय पर मक्की की बुआई की गई थी। फसल अच्छी स्थिति में थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश ने खेतों को तबाह कर दिया। फसलों की जड़ें सड़ गई हैं और पौधे बर्बाद हो गए हैं। किसान अब दोबारा मेहनत में जुट गए हैं। जिन खेतों में फसल पूरी तरह से खराब हो गई है, वहां किसान मजदूरों को उतारकर दोबारा बीज की बिजाई करवा रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि मौसम ने साथ दिया तो फिर फसल की उम्मीद की जा सकती है।
कृषि विभाग ने किसानों को एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि मौसम के एकाएक बदल रहे मिजाज को मद्देनजर रखते हुए दो-चार दिन के बाद रुक कर ही मक्की की बिजाई करें। जिन किसानों ने मक्की की बिजाई कर रखी है और उनकी मक्की की पौध निकल आई है तो वे बिजाई वाले खेतों में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था करें ताकि खेतों में पानी खड़ा न हो और मक्की की नई फसल निकलने के साथ खराब भी न हो। अधिकतर क्षेत्रों में किसानों ने मक्की की बिजाई कर डाली है और बारिश के चलते खेतों में पानी जमा होने की सूरत में मक्की की पौध नष्ट हो गई है। जिले में तकरीबन 26000 हेक्टेयर भूमि पर मक्की की बिजाई की जाती है। इसके अलावा 1500 हेक्टेयर एरिया में आलू की भी बिजाई की जाती है। कहीं-कहीं पर किसानों ने मक्की की अर्ली बिजाई भी की है। तकरीबन 1500 हेक्टेयर भूमि पर किसानों ने मक्की की अर्ली बिजाई की है और ऐसे एरिया से मक्की काटने के बाद वहां पर आलू की बिजाई किसानों द्वारा की जाएगी।
उधर कृषि विभाग ऊना के उपनिदेशक डॉक्टर कुलभूषण धीमान के अनुसार ऊना जिले में कुछ क्षेत्रों में बारिश हुई है। जिन किसानों ने अभी मक्की की बिजाई नहीं की है, वह दो-चार दिन के बाद मौसम का मिजाज देखते हुए रुक कर ही बिजाई करें और जिन खेतों में मक्की की बिजाई कर डाली है वहां पानी की निकासी का उचित प्रबंध करें।
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बरसात ने बढ़ाई किसानों की चिंता, मक्की की बिजाई को लेकर किसान पशोपेश में
कृषि विभाग की सलाह, दो-चार दिन के बाद ही करें मक्की की बिजाई
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले के कई स्थानों पर लगातार बारिश ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। पंचायत बेरियां और इसके आसपास के क्षेत्रों में मक्की की फसल को नुकसान हुआ है। खेतों में जलभराव के कारण फसलें गल गई हैं और उत्पादन लगभग शून्य हो गया है। किसानों मोहन सिंह, रविंदर कुमार और हंसराज ने बताया कि इस बार समय पर मक्की की बुआई की गई थी। फसल अच्छी स्थिति में थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश ने खेतों को तबाह कर दिया। फसलों की जड़ें सड़ गई हैं और पौधे बर्बाद हो गए हैं। किसान अब दोबारा मेहनत में जुट गए हैं। जिन खेतों में फसल पूरी तरह से खराब हो गई है, वहां किसान मजदूरों को उतारकर दोबारा बीज की बिजाई करवा रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि मौसम ने साथ दिया तो फिर फसल की उम्मीद की जा सकती है।
कृषि विभाग ने किसानों को एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि मौसम के एकाएक बदल रहे मिजाज को मद्देनजर रखते हुए दो-चार दिन के बाद रुक कर ही मक्की की बिजाई करें। जिन किसानों ने मक्की की बिजाई कर रखी है और उनकी मक्की की पौध निकल आई है तो वे बिजाई वाले खेतों में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था करें ताकि खेतों में पानी खड़ा न हो और मक्की की नई फसल निकलने के साथ खराब भी न हो। अधिकतर क्षेत्रों में किसानों ने मक्की की बिजाई कर डाली है और बारिश के चलते खेतों में पानी जमा होने की सूरत में मक्की की पौध नष्ट हो गई है। जिले में तकरीबन 26000 हेक्टेयर भूमि पर मक्की की बिजाई की जाती है। इसके अलावा 1500 हेक्टेयर एरिया में आलू की भी बिजाई की जाती है। कहीं-कहीं पर किसानों ने मक्की की अर्ली बिजाई भी की है। तकरीबन 1500 हेक्टेयर भूमि पर किसानों ने मक्की की अर्ली बिजाई की है और ऐसे एरिया से मक्की काटने के बाद वहां पर आलू की बिजाई किसानों द्वारा की जाएगी।
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उधर कृषि विभाग ऊना के उपनिदेशक डॉक्टर कुलभूषण धीमान के अनुसार ऊना जिले में कुछ क्षेत्रों में बारिश हुई है। जिन किसानों ने अभी मक्की की बिजाई नहीं की है, वह दो-चार दिन के बाद मौसम का मिजाज देखते हुए रुक कर ही बिजाई करें और जिन खेतों में मक्की की बिजाई कर डाली है वहां पानी की निकासी का उचित प्रबंध करें।
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