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वेंटिलेंटर तो हैं पर चलाने के लिए स्टाफ नहीं
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There is ventilator but no staff to run
ऊना। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के चलते जिले में गंभीर मरीजों के लिए अलग से आईसीयू वार्ड नहीं बन पाया है। अगर कोरोना की तीसरी लहर आती है तो मरीजों को परेशान होना पड़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग के पास आईसीयू चलाने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ की कमी है। इस कारण से कोरोना के गंभीर मरीजों को टांडा मेडिकल कॉलेज ही भेजा जाता है।
विभाग के पास वेंटिलेंटर तो हैं, लेकिन उनके संचालन के लिए प्रशिक्षित स्टाफ की कमी के चलते कोरोना के गंभीर मरीज का उपचार जिले में नहीं हो पाता है। इसके लिए उन्हें टांडा मेडिकल कॉलेज कांगड़ा ही रेफर किया जाता है जहां प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ उक्त मरीज का उपचार करता है।
जिले में कोरोना के दूसरी लहर ने कहर बरपाया था। उस दौरान सरकार की तरफ से कोरोना के मरीजों के उपचार के लिए बड़े दावे किए गए थे। कोरोना की दूसरी लहर कम होने के बाद सरकार जिले में कोरोना के मरीजों के लिए विशेष आईसीयू वार्ड तैयार नहीं कर पाई है। इसका खामियाजा कोरोना की तीसरी लहर के दौरान भुगतना पड़ सकता है। उपायुक्त राघव शर्मा ने बताया कि जिले में कोरोना के साधारण मरीजों के लिए तो आईसीयू की व्यवस्था तो है लेकिन गंभीर मरीजों के लिए मरीजों को टांडा मेडिकल कॉलेज ही भेजना पड़ता है।
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पालकवाह में बनाया गया कोविड अस्पताल
जिले के पालकवाह में बने कोविड अस्पताल में कोरोना के गंभीर मरीजों का उपचार किया जाता है। जिन मरीजों में कोरोना के अलावा अन्य घातक रोग भी हैं, उन मामलों में मरीज की सेहत ज्यादा खराब होने पर उन्हें टांडा मेडिकल कॉलेज भेजना पड़ता है।
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विभाग के पास वेंटिलेंटर तो हैं, लेकिन उनके संचालन के लिए प्रशिक्षित स्टाफ की कमी के चलते कोरोना के गंभीर मरीज का उपचार जिले में नहीं हो पाता है। इसके लिए उन्हें टांडा मेडिकल कॉलेज कांगड़ा ही रेफर किया जाता है जहां प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ उक्त मरीज का उपचार करता है।
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जिले में कोरोना के दूसरी लहर ने कहर बरपाया था। उस दौरान सरकार की तरफ से कोरोना के मरीजों के उपचार के लिए बड़े दावे किए गए थे। कोरोना की दूसरी लहर कम होने के बाद सरकार जिले में कोरोना के मरीजों के लिए विशेष आईसीयू वार्ड तैयार नहीं कर पाई है। इसका खामियाजा कोरोना की तीसरी लहर के दौरान भुगतना पड़ सकता है। उपायुक्त राघव शर्मा ने बताया कि जिले में कोरोना के साधारण मरीजों के लिए तो आईसीयू की व्यवस्था तो है लेकिन गंभीर मरीजों के लिए मरीजों को टांडा मेडिकल कॉलेज ही भेजना पड़ता है।
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पालकवाह में बनाया गया कोविड अस्पताल
जिले के पालकवाह में बने कोविड अस्पताल में कोरोना के गंभीर मरीजों का उपचार किया जाता है। जिन मरीजों में कोरोना के अलावा अन्य घातक रोग भी हैं, उन मामलों में मरीज की सेहत ज्यादा खराब होने पर उन्हें टांडा मेडिकल कॉलेज भेजना पड़ता है।