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Una News: होली पर्व को लेकर बाजारों में रौनक चरम पर
Tue, 03 Mar 2026 06:58 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 03 Mar 2026 06:58 AM IST
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ऊना। जिले में होली पर्व को लेकर बाजारों में रौनक चरम पर पहुंच गई है। शहर के मुख्य बाजार, सब्जी मंडी क्षेत्र, पुराना बाजार और आसपास के कस्बों में गुलाल, पिचकारियों, मुखौटों, टोपी, चश्मों और अन्य सजावटी सामान से सजी दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ने लगी है। जैसे-जैसे होली नजदीक आ रही है, त्योहार का रंग लोगों के चेहरों पर साफ झलकने लगा है।
खासकर बच्चों में होली को लेकर अलग ही उत्साह देखने को मिल रहा है। बाजार में इस बार साधारण प्लास्टिक पिचकारियों से लेकर बड़े टैंक और प्रेशर गन मॉडल तक की भरमार है। पिचकारियों की कीमत 150 रुपये से शुरू होकर 1200 रुपये तक पहुंच रही है। छोटे बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर वाली हल्की पिचकारियां उपलब्ध हैं जबकि युवाओं के लिए हाई प्रेशर और मल्टी-नोजल पिचकारियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। दुकानदारों का कहना है कि इस बार रंगों की वैरायटी भी काफी बढ़ी है। पारंपरिक गुलाल के साथ-साथ हर्बल और ऑर्गेनिक रंगों की मांग अधिक है। अभिभावक बच्चों की त्वचा और आंखों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केमिकल मुक्त रंगों को प्राथमिकता दे रहे हैं। बाजार में लाल, गुलाबी, हरा, पीला और बैंगनी रंग के साथ-साथ चमकीले और सुगंधित गुलाल भी उपलब्ध हैं। केवल रंग और पिचकारियां ही नहीं बल्कि होली से जुड़े अन्य सामान जैसे रंगीन विग, फैंसी चश्मे, फेस मास्क, डीजे स्प्रे और रंगीन गुब्बारों की भी अच्छी बिक्री हो रही है। युवाओं में होली पार्टी और डीजे सेलिब्रेशन को लेकर भी खास उत्साह है जिसके चलते स्पीकर और सजावटी सामग्री की दुकानों पर भी रौनक बढ़ी है।
दुकानदार पंकज का कहना है कि लोगों के सेहत व चेहरा खराब होने के डर से होली का रंग फीका पड़ने लगा है। ग्राहक पहले से कम हो रहे हैं। मुख्य कारण ऑनलाइन शॉपिंग भी मना जा रहा है। इस बार रौनक तो है लेकिन खरीदारी से लोगों ने हाथ खींचे हैं। पहले की तरह खुली खरीदारी बेहद कम हो चुकी है।
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प्रदेश व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुमेश शर्मा ने लोगों से अपील की कि स्थानीय बाजारों से खरीदारी करें। दुकानदारों को ऑनलाइन खरीद से बड़ा झटका लगा है। उनकी आर्थिक स्थिति पहले जैसी नहीं रही। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग अपने आसपास की आर्थिकी को मजबूत करने में सहयोग दें।
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खासकर बच्चों में होली को लेकर अलग ही उत्साह देखने को मिल रहा है। बाजार में इस बार साधारण प्लास्टिक पिचकारियों से लेकर बड़े टैंक और प्रेशर गन मॉडल तक की भरमार है। पिचकारियों की कीमत 150 रुपये से शुरू होकर 1200 रुपये तक पहुंच रही है। छोटे बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर वाली हल्की पिचकारियां उपलब्ध हैं जबकि युवाओं के लिए हाई प्रेशर और मल्टी-नोजल पिचकारियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। दुकानदारों का कहना है कि इस बार रंगों की वैरायटी भी काफी बढ़ी है। पारंपरिक गुलाल के साथ-साथ हर्बल और ऑर्गेनिक रंगों की मांग अधिक है। अभिभावक बच्चों की त्वचा और आंखों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केमिकल मुक्त रंगों को प्राथमिकता दे रहे हैं। बाजार में लाल, गुलाबी, हरा, पीला और बैंगनी रंग के साथ-साथ चमकीले और सुगंधित गुलाल भी उपलब्ध हैं। केवल रंग और पिचकारियां ही नहीं बल्कि होली से जुड़े अन्य सामान जैसे रंगीन विग, फैंसी चश्मे, फेस मास्क, डीजे स्प्रे और रंगीन गुब्बारों की भी अच्छी बिक्री हो रही है। युवाओं में होली पार्टी और डीजे सेलिब्रेशन को लेकर भी खास उत्साह है जिसके चलते स्पीकर और सजावटी सामग्री की दुकानों पर भी रौनक बढ़ी है।
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दुकानदार पंकज का कहना है कि लोगों के सेहत व चेहरा खराब होने के डर से होली का रंग फीका पड़ने लगा है। ग्राहक पहले से कम हो रहे हैं। मुख्य कारण ऑनलाइन शॉपिंग भी मना जा रहा है। इस बार रौनक तो है लेकिन खरीदारी से लोगों ने हाथ खींचे हैं। पहले की तरह खुली खरीदारी बेहद कम हो चुकी है।
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प्रदेश व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुमेश शर्मा ने लोगों से अपील की कि स्थानीय बाजारों से खरीदारी करें। दुकानदारों को ऑनलाइन खरीद से बड़ा झटका लगा है। उनकी आर्थिक स्थिति पहले जैसी नहीं रही। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग अपने आसपास की आर्थिकी को मजबूत करने में सहयोग दें।